Tuesday, 23 August 2016

Keep smile on your face

Thought of the day for all my Punjabi friends..:

Smile to at least 1 unknown Punjabi person while walking today ..

So that, he forgets all his Problems
& starts thinking..

"Eh Bhutni da kaun si..??"😊

Pakistani joke

एक पाकिस्तानी मोहतरमा सज-धज कर अपने शौहर से बोली,
"जानू बताओ तो जरा मैं कैसी लग रही हूँ."

शौहर बोला-  खुदा कसम ऐसी लग रही है कि दिल करता है तुझे हिंदुस्तान में फेंक आऊँ.

बेगम लरजाते हुए बोली ,
हाय अल्लाह...
साफ़ साफ़ कहो ना कि मैं बम्ब 💣लग रही हूँ.....!
😂😝😜😂😝😜😂😝😂😜😜😂

Bihar toppers

भांजा : "अरे मामा...
आज मुहल्ले का ए.टी.एम. बंद क्यों है...??"

मामा : "क्या बताई बे...
तुम्हार मामी गई रहिन ना...
खुद ए.टी.एम. से पैसा निकालै..."

भांजा : "यह तो अच्छी बात है न मामा...??
पर इस समय ए.टी.एम. क्यों बन्द है...??"

मामा : "जब ए.टी.एम. की स्क्रीन पर...
लिखा देखिन... 'एंटर योर पिन' तो...
आपन बाल की पिन घुसेड़ आईं...!!"

😜😜😜😜😜

Real talk

*बहुत शानदार *बात* लिखी

🌳*नीम* के पेड़ कम हो रहे है पर घरों में *कड़वाहट* बढती जा रही है !

जुबान में *मीठास* कम हो रही है , और शरीर मे *शुगर* बढती जा रही है !                                          🌺🌺🌺Gud Mrng🌺🌺🌺

Rio Olympic

अब कुछ हफ्तों बाद पता चलेगा...

सिंधु,  साक्षी,  और दिपा की सफलता का राज..

Bounvita है, Horlicks है,
के fair n lovely है

या फिर कोई... Shampoo 🙄😜

Silly girl

Height of Disappointment...

A woman realising AFTER a Long search on Google that...

Phillip's 21 inch was actually a TV!!
😁😁

Burhar atanki

अभी कुछ दिन पहले मैं छुट्टी पर अपने घर गया हुआ था, शाम को मैं और पिताजी "ज़ी न्यूज़" पर सुधीर चौधरी वाला "DNA" देख रहे थे जिसमें बुरहान वानी और इस्लामिक आतंकवाद का मुद्दा चल रहा था।
अचानक पिताजी ने मुझसे पूछा " अशोक मुसलमानों की क्या आइडियोलॉजी है कभी तुमने इस पर गौर किया है"

मैं थोड़ा संशय में पड़ गया आज पिताजी ने ये कौन सा अज़ीब प्रश्न कर दिया, मैं कुछ ज़वाब देता उससे पहले ही पिताजी ने मुझसे कहा तुम्हें एक कहानी सुनाता हूँ।

" एक गाँव में एक संपन्न परिवार रहता था, उनके पास खेती बाड़ी और पशुओं की कोई कमी नही थी, परिवार में दो बेटे थे जो शादीशुदा और संपन्न थे लेकिन एक बेटा बेईमान था वो हमेशा किसी न किसी बात पर अपने माता पिता और भाई से झगड़ा करता रहता था, उसकी रोज़ की कलह कलेश को देखकर मातापिता ने सारी संपत्ति दो भागों में बाँट दी, वो कलेशि लड़का अपनी सारी सम्पति लेकर दूसरे गाँव में वस गया।
लेकिन  उस बेईमान लड़के के भी एक लड़का और लड़की थी जो विभाजन के समय ये कहकर की "वो दादा और दादी को छोड़कर कहीं नही जाएंगे वो दादा दादी को बहुत प्रेम करते हैं,  वो हमेशा दादा दादी के साथ ही रहेंगें"
और वो दोनों दादा दादी के साथ रुक गये।
बूढे दादा दादी उन्हें बहुत प्यार करते थे, अब दादा दादी ने उन बच्चों का अच्छे स्कूल में दाखिला कराया, उन्हें अच्छी अच्छी व्यवस्था देने लगे। शुरुआती दिनों में उन बच्चों ने दादा दादी से कहा की वे कभी उन माता पिता के पास नही जाएँगे,  दादा दादी में बच्चों को समझाया की तुम हर महीने अपने माता पिता से मिल सकते हो।
अब बच्चे हर महीने अपने माता पिता के पास जाते थे और दादा दादी के ख़र्चे से मौज उड़ाते थे। इस तरह उनका समय बीतता गया।
  
कुछ वर्षों बाद जब बच्चे बड़े हो गये, अब दादा दादी ने अपना हिस्सा बेचकर लड़के के लिए एक अच्छा व्यवसाय खुलवाया और लड़की के लिए एक अच्छा परिवार देखकर शादी कर दी, जिसमें दादा दादी ने अपनी सम्पति का चौथाई हिस्सा दहेज़ में दे दिया।

अब लड़के ने अपने व्यवसाय में घाटा दिखाकर उस व्यवसाय को बचाने के बहाने दादा दादी से और रुपये ऐंठा, फिर लड़की ने भी अपने पति के लिए व्यवसाय खुलवाने के लिए दादा दादी से एक अच्छी रक़म उधार ली, इस तरह ये मंझारा चलता रहा और दादा दादी हमेशा इस भृम में रहे की उनके नाती नातिनि उन्हें बहुत प्यार करते हैं।

लेकिन दादा दादी का दूसरा लड़का जो ये मंशा समझ रहा था ने उन बुड्ढों को समझाने की बहुत कोशिस की जिसके चलते परिवार में बहुत झगड़ा हुआ, फिर उन लड़के लड़की ने सारे गाँव में ये हल्ला मचा दिया की दादा दादी और उसके चाचा जी उन पर बहुत अत्याचार कर रहे हैं, फिर उन बच्चों ने गाँव में शोर कर दिया की इन दादा दादी के कहने पर वे अपने माता पिता के साथ नही गये और आज ये सभी हम पर अत्याचार कर रहें हैं, फिर उन बच्चों ने "पटवारी" को कुछ लालच देकर अपने पक्ष में खड़ा कर लिया और गाँव में घोषणा कर दी की वे दादा दादी की सम्पति के जायज़ हक़दार हैं और वे अपना हिस्सा लेकर दादा दादी से अलग होना चाहते हैं।
अब गाँव के कुछ लालची उनके पक्ष में खड़े हो गये और इस तरह उन बच्चों ने दादा दादी को कंगाल कर दिया और उन बूढे दादा दादी को सारे गाँव की नज़रों में अत्याचारी, बेईमान, धोखेबाज़ की पदवी  दिला दी।
और फिर वो बच्चे अपने माँ बाप के साथ मिल गये।

अब दिनों बाद कहानी में ट्विस्ट आया जब दादा दादी को पता चला की "ये सारा खेल प्रीप्लान था, जिसे उनके ही उस कलेशि लड़के ने रचा था और जान बूझकर अपने बच्चों को वहाँ छोड़कर गया जिससे वो उनकी सारी सम्पति को हड़प सके"

अब मेरे पिताजी ने मुझसे कहा की "अशोक अब मुसलमानों की स्तिथि देखो, उन्होंने भारत जैसे सम्पन्न परिवार को जान बूझकर धर्म के आधार पर विभाजित करवाया और अपना हिस्सा लिया।
अब उन्होंने अपने प्लान के थ्रू कुछ मुसलमानों को भारत में ही रहने की हिदायत दी, अब उन मुसलमानों ने भी भारत के हिन्दुओँ को भरोषा दिया की वो भारत से बहुत प्यार करते हैं (ठीक वैसे ही जैसे वो बच्चे उन बूढ़े दादा दादी से करते थे)
और वो अपने मरते दम तक भारत में ही रहेंगें"

फिर कुछ सालों बाद उन मुसलमानों ने पाकिस्तान के अपने रिश्तेदारों ( माता पिता) से मिलना शुरू कर दिया, लेकिन मासूम भारत के हिन्दू यही समझते रहे की वो मुसलमान उन्हें बहुत प्यार करते हैं, इसलिये वो मुस्लिम भारत छोड़कर नही गये।
इस वात्सल्य में हिन्दुओँ ने अपनी जमीं पर उनके लिए मस्जिदें बनवायीं और उन्हें सिर आँखों पर रखा।
फिर उन मुसलमानों ने अपना रँग दिखाना शुरू किया और बेईमानी पर उतर आये और उन्होंने भारत के कई हिस्सों पर अपनी आबादी के आधार पर कब्ज़ा जमा लिया, जिसमें उस "पटवारी" जैसे वामपंथियों ने भारत में ये घोषणा कर दी की हिन्दू बहुत दमनकारी  और अत्याचारी हैं, इन हिन्दुओँ ने मासूम मुसलमानों पर अत्याचार किया है और उनका हिस्सा नही दे रहे।

फिर पिताजी ने कहा की " अशोक तुम्हें क्या लगता है, की उन दादा दादी ( हिन्दुओँ ) को आज वेवकूफ़ बनाया जा रहा है, एक्चुअल में उन दादा दादी (हिन्दुओँ )का वेवकूफ़ बनने का इतिहास बहुत पुराना है, पहले मुसलमानों ने हिन्दुओँ को तलवार के बल पर इस्लाम क़बूल कराया और जब इससे बात ना बनी तो उन्होंने हिन्दुओँ को वेवकूफ़ बनाने का एक और तरीका ईजाद कर लिया, वो था  "सूफ़ी संत" जिसमें हिन्दुओँ को ढोंगी प्रेम के नाम पर इस्लाम और अल्लाह की महत्ता दिखाने लगे, उनके हर सूफ़ी गाने में सिर्फ़ इस्लाम के प्रतीकों जैसे " अल्लाह, ख़ुदा, मौला, रसूल, सजदा जैसे शब्द ही आते थे जिसको उन मासूम दादा दादी जैसे हिन्दुओँ ने पुरजोर से अपनाया।

फिर पिताजी ने मुझसे कहा की "अशोक भारत एक मात्र हिन्दू राष्ट्र है, लेकिन दुःख की बात है यहाँ हिन्दुओँ को आज भी मुसलमानों की मानसिकता समझ नही आयी, तुम्हें क्या लगता है अगर कश्मीर इन्हें दे दिया जाए तो समस्या ख़त्म हो जायेगी! बिल्कुल नही ख़त्म होगी, आज ये कश्मीर की माँग कर रहे हैं आने वाले कल को ये हैदराबाद माँगेगे फिर केरल फिर असम फिर पश्चिम बंगाल और इस तरह ये धीरे धीरे पुरे भारत पर कब्ज़ा करना चाहेँगे।

क्या तुम जानते हो मुसलमान हमेशा अपने प्री प्लान के थ्रू काम करते हैं, जब उन्हें किसी देश पर कब्ज़ा करना होता है तो वो हमेशा अपने आप को दो ग्रुप में डिवाइड कर लेते हैं जिसमें एक कट्टर होता है जो आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देता है और दूसरा तुमसे झूठें प्रेम का ढोंग दिखाता है जो तुम्हें हमेशा ये विश्वास दिलाता है की आतंकवादी इस्लामी नही होते, उन्हें धर्म के आधार पर नही देखना चाहिए और तुम मासूम हिन्दू उनकी बात मान लेते हो, ये रक़म खर्च करके हिन्दुओँ के कुछ ग़द्दारों जैसे वामपंथी और पत्रकारों को अपनी तरफ़ मिला लेते हैं फिर वो ग़द्दार देश में हर तरह ये माहौल बना देते हैं की मुसलमानों पर अत्याचार हो रहा है। और धीरे धीरे तुम सभी हिन्दू अपनी सम्पति जैसे कश्मीर, बंगाल, असम, केरल, यूपी, बिहार, जैसे कई राज्यों से उन दादा दादी की तरह बेदखल कर दिए जाते हो, लेकिन वो दूसरा शाँति और प्रेम का ढोँग दिखाने वाला समुदाय तुम्हें कभी महशुस ही नही होने देता की तुम्हारे घर से बेदख़ल किया जा रहा है और तुम आँख बन्द करके मान भी लेते हो"

और सुनों जब वो तुम्हारे राज्य या देश पर कब्ज़ा कर लेते हैं तो फिर वो दोनों ( आतंकवादी कट्टर और शाँति का ढोँग करने वाले) उस राज्य या देश को आपस में बराबर बाँट लेते हैं ठीक उस कलेशि बाप और उनके बच्चों की तरह"......

अब पिताजी ने अपनी बात पर विराम दिया और
मैं आज अपने पिताजी की बात सुनकर स्तब्ध रह गया, कितनी बढ़ी बात उन्होंने कितने आसान शब्दों में समझा दी।

नोट :- पोस्ट को शेयर करें या कॉपी कट पेस्ट करके अपनी वाल पर लगायें , लेकिन इस तार्किक ज्ञान को ज़्यादा लोगों तक पहुँचाये।

धन्यवाद🏹🚩🏹

Sleep well

😜😜😜😜😜
आज मैंने अपने आप से पूछा कि जिंदगी कैसे जीनी चाहिए ?
मुझे मेरे *कमरे* ने जवाब दिया कि

*छत ने कहा* – ऊंचा सोंचो
*पंखे ने कहा* – दिमाग ठंडा रक्खो
*घड़ी ने कहा* – समय की कदर करो
*कैलेंडर ने कहा* – वक्त के साथ चलो
*पर्स ने कहा* – भविष्य के लिए बचाओ
*शीशे ने कहा* – अपने आप को देखो
*दीवार ने कहा* – दूसरों का बोझ बांटो
*खिड़की ने कहा* – अपने देखने का दायरा बढ़ाओ
*फर्श ने कहा* – जमीन से जुड़ कर रहो
.

फिर मैंने बिस्तर की तरफ देखा औuर *बिस्तर ने कहा* –
,
चादर ओढ़ कर सो जा   पागल,
बाकी सब मोह माया है।😜😂😂😂😂😂😂

Monday, 22 August 2016

Tid for tad

एक बिजनेसमैन सुबह जल्दी में अपने घर से बाहर आकर अपनी कार का दरवाजा खोलता है। तभी पास बैठे एक आवारा कुत्ते पर उसका पैर पड़ जाता है, कुत्ता उसपर झपटता है और उसके पैर में दाँत गड़ा देता है।

गुस्से में वो 10-12 पत्थर उठाकर कुत्ते को मारता है लेकिन एक पत्थर भी कुत्ते को नहीं लगता और कुत्ता भाग जाता है।😜

अपने ऑफिस में पहुँचकर वो ऑफिस के सभी पदाधिकारियों की मीटिंग बुलाता है और कुत्ते का गुस्सा उनपर उतारता है।😁

अपने बॉस का जबरन का गुस्सा झेलकर अधिकारी भी परेशान हो जाते हैं।😔

सारे अधिकारी अपना गुस्सा अपने से नीचे स्तर के कर्मचारियों पर उतारते हैं और इस प्रकार गुस्से का ये दमनचक्र सबसे निचले स्तर के कर्मचारी ऑफिस बॉय और चपरासी तक पहुँचता है।😙😣

अब चपरासी के नीचे तो कोई नहीं। इसलिए अपना गुस्सा वो दारू पर उतरता है और घर जाता है।🍻

बीवी दरवाजा खोलती है और शिकायती लहजे में बोलती है---" इतनी देर से आए ?? "🙆
चपरासी, बीवी को एक झापड़ लगा देता है 👋 और बोलता है---" मैं ऑफिस में कंचे खेल रहा था क्या ???😱 काम था मुझे ऑफिस में, अब भेजा मत खा और खाना लगा। "😁

अब बीवी भुनभुनाती है कि, बिना कारण चाँटा खाया।😩

वो अपना गुस्सा बच्चे पर उतारती है और उसकी पिटाई कर देती है।🙇

अब बच्चा क्या करे ??
वो गुस्से में घर से बाहर चला जाता है।🚶🚶🏃😭
और.......

और........

और.........

बच्चा, एक पत्थर उठाता है और सामने से गुजरते एक कुत्ते को मारता है, पत्थर लगते ही कुत्ता बिलबिलाता, काऊँ काऊँ करता भागता है।
मित्रों, ये सुबह वाला ही कुत्ता था !!!😃😃😃😃
उसे पत्थर लगना ही था, सिर्फ बिजनेसमैन वाला नहीं लगा, बच्चे वाला लगा। उसका सर्कल कम्पलीट हुआ।
इसलिए आप कभी भी चिंता ना करें।
अगर किसी ने आपको परेशान किया है तो, उसे पत्थर लगेगा........अवश्य लगेगा......बराबर लगेगा।।
इस कारण आप निश्चिन्त रहो।
आपका बुरा करने वाले का,
बुरा अवश्य ही होगा।
ये सृष्टि का नियम है...

Friday, 19 August 2016

Small thing matters

छोटी चीज़ें अक्सर डरा देती हैं...

आप पर्वत पर बैठ सकते हैं
लेकिन सुई पर नहीं...

-पप्पू टेलर
😝😝😝