Sunday, 12 November 2017

After death of Sardar Patel

पटेल की मौत के बाद नेहरू ने उनकी बेटी मणिबेन के साथ किया था जानवरो जैसा बर्ताव
नेहरू की सन्तानो ने नेहरू के बाद भी देश पर राज किया, और उनके पास आज खरबो की संपत्ति है, नेहरू की सन्तानो के बारे में आप सब जानते है, पर क्या आप सरदार पटेल वंशजो के बारे में जानते है, उनके भी बच्चे थे, उनकी भी बेटी थी, उनका भी परिवार था, कांग्रेस पार्टी और नेहरू ने उनके साथ क्या किया, कभी आपने इसके बारे में जाना ही नहीं
कांग्रेस पार्टी और खासकर नेहरू और उसके सन्तानो को सरदार पटेल से कितनी नफरत थी इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते है की पटेल देहांत 1950 में हुआ था, पर कांग्रेस ने उन्हें भारत रत्न देने से इंकार कर दिया, और जब बहुत ज्यादा विरोध होने लगा तो 1991 में जाकर सरदार पटेल को उनकी मौत के 41 साल बाद भारत रत्न दिया गया
आज जो हम आपको जानकारी देने वाले है वो जानकारी बहुत ही कम लोगों के पास है, सरदार पटेल की पुत्री जी जिनका नाम था मणिबेन पटेल, वो भी कांग्रेस की नेता थी और अपने पिता की तरह ही अंग्रेजो के खिलाफ उन्होंने आज़ादी के आंदोलन में हिस्सा लिया था, 1947 में सरदार पटेल भारत के गृह मंत्री बने, 1950 में पटेल का देहांत हो गया
पटेल के देहांत के बाद उनकी पुत्री मणिबेन नेहरू से मिलने दिल्ली गयी थी, दरअसल वो नेहरू को अपने पिता के कहे अनुसार 2 चीजें देने गयी थी, वो 2 चीजें थी एक बैग और एक किताब, नेहरू ने पहले तो मिलने से ही इंकार कर दिया, फिर काफी देर इंतज़ार करवाया और मिला, मणिबेन ने बैग और किताब देकर नेहरू से कहा की, सरदार पटेल ने उन्हें कहा था की जब मैं मर जाऊं तो ये बैग और किताब सिर्फ नेहरू को ही देना, और यही देने मैं आपके पास दिल्ली आई हूँ
बता दें की उस बैग में 35 लाख रुपए थे, जो की कांग्रेस पार्टी को आम भारतीयों ने चंदे के रूप में दिया था, और किताब कुछ और नहीं बल्कि किन किन लोगों ने चंदा दिया था उनके नाम और लिस्ट थे, 1947 में 35 लाख की रकम आज के हिसाब से बहुत ज्यादा थी, पटेल बहुत ईमानदार थे, और उनकी मौत के बाद उनकी बेटी ने कांग्रेस का सारा पैसा और अकाउंट की किताब नेहरू को सौंप दिया
दिल्ली के आवास में नेहरू ने मणिबेन से वो बैग और किताब ले लिया, और मणिबेन को पानी तक नहीं पूछा गया, और उन्हें जाने के लिए कह दिया गया, वो किताब और 35 लाख रुपए नेहरू को सौंपकर अहमदाबाद लौट आयीं
उसके बाद कांग्रेस पार्टी और उसके किसी भी नेता ने मणिबेन का हाल तक नहीं जाना, मणिबेन जो की देश के गृहमंत्री की पुत्री थी, वो इतनी गरीबी में रहने लगी जिसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता की गृहमंत्री की बेटी की ये स्तिथि हो सकती है, उस ज़माने में गुजरात में भी कांग्रेस की ही सरकार थी पर मणिबेन से जैसे कांग्रेस को नफरत सी थी क्यूंकि नेहरू और उसकी औलादें पटेल और उनकी बेटी को बस मार डालना चाहते थे
अपने अंतिम दिनों में मणिबेन की आँखें कमजोर हो गयी थी, उनके पास 30 साल पुराना चश्मा था पर उनकी आँखें इतनी कमजोर हो गयी थी की चश्मे का नंबर बढ़ गया था, नए चश्मे की जरुरत थी, पर मणिबेन के पास चश्मा खरीदने का भी पैसा नहीं था, वो अहमदाबाद की सड़कों पर चलते हुए गिर जाया करती थी, और ऐसे ही उनकी दुखद मौत भी हो गयी
आपको एक और बात बताते है, उस ज़माने में कांग्रेस का गुजरात में मुख्यमंत्री था चिमनभाई पटेल, जब चिमनभाई पटेल को पता चला की मणिबेन मर रह है तो वो एक फोटोग्राफर को लेकर उनके पास पहुंचा और उसने उनके अधमरे शरीर के साथ तस्वीर खिंचवाई और चला गया, 1 चश्मा तक कांग्रेस ने सरदार पटेल की बेटी को नहीं दिया, वो तस्वीर भी अख़बारों में छपी थी, कोंग्रेसी मुख्यमंत्री ने तस्वीर के लिए मणिबेन से मुलाकात की थी और मरने के लिए छोड़ आया था, उसके बाद मणिबेन का देहांत हो गया, जिसमे कांग्रेस का एक भी नेता नहीं गया
नेहरू की संताने आज खरबों के मालिक है, पर कांग्रेस पार्टी ने सरदार पटेल के देहांत के बाद उनके परिवार से कैसा बर्ताव किया आप मणिबेन की कहानी को जानकर समझ सकते हैं, आज गुजरात में कथित पटेलों का नेता हार्दिक पटेल इसी कांग्रेस के साथ पटेलों के वोट का सौदा कर रहा है, जिस कांग्रेस ने सरदार पटेल की बेटी को सरदार पटेल की मौत के बाद 1 चश्मा तक नहीं दिया

मित्रों इस पोस्ट को गुजरात ही नही देश के हर नागरिक तक पहुंचायें 

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जय हिंद जय श्री राम जय माँ भारती

Most motivational story

*⭕  हृदय परिवर्तन  ⭕*
~~~~~~~~~~~~~~

♦ एक राजा को राज भोगते हुए काफी समय हो गया था । बाल भी सफ़ेद होने लगे थे । एक दिन उसने अपने दरबार में एक उत्सव रखा और अपने गुरुदेव एवं मित्र देश के राजाओं को भी सादर आमन्त्रित किया । उत्सव को रोचक बनाने के लिए राज्य की सुप्रसिद्ध नर्तकी को भी बुलाया गया ।
 
♦ राजा ने कुछ स्वर्ण मुद्रायें अपने गुरु जी को भी दीं, ताकि यदि वे चाहें तो नर्तकी के अच्छे गीत व नृत्य पर वे उसे पुरस्कृत कर सकें । सारी रात नृत्य चलता रहा । ब्रह्म मुहूर्त की बेला आयी । नर्तकी ने देखा कि मेरा तबले वाला ऊँघ रहा है, उसको जगाने के लिए नर्तकी ने एक दोहा पढ़ा -
 *"बहु बीती, थोड़ी रही, पल पल गयी बिताय।*
*एक पलक के कारने, क्यों कलंक लग जाय ।"*

♦ अब इस दोहे का अलग-अलग व्यक्तियों ने अपने अनुरुप अलग-अलग अर्थ निकाला । तबले वाला सतर्क होकर बजाने लगा । 

♦ जब यह बात गुरु जी ने सुनी तो  उन्होंने सारी मोहरें उस नर्तकी के सामने फैंक दीं । 

♦ वही दोहा नर्तकी ने फिर पढ़ा तो राजा की लड़की ने अपना नवलखा हार नर्तकी को भेंट कर दिया । 

♦ उसने फिर वही दोहा दोहराया तो राजा के पुत्र युवराज ने अपना मुकट उतारकर नर्तकी को समर्पित कर दिया । 

♦ नर्तकी फिर वही दोहा दोहराने लगी तो राजा ने कहा - "बस कर, एक दोहे से तुमने वैश्या होकर भी सबको लूट लिया है ।"

♦ जब यह बात राजा के गुरु ने सुनी तो गुरु के नेत्रों में आँसू आ गए और गुरु जी कहने लगे - "राजा ! इसको तू वैश्या मत कह, ये तो अब मेरी गुरु बन गयी है । इसने मेरी आँखें खोल दी हैं । यह कह रही है कि मैं सारी उम्र संयमपूर्वक भक्ति करता रहा और आखिरी समय में नर्तकी का मुज़रा देखकर अपनी साधना नष्ट करने यहाँ चला आया हूँ, भाई ! मैं तो चला ।" यह कहकर गुरु जी तो अपना कमण्डल उठाकर जंगल की ओर चल पड़े ।

♦ राजा की लड़की ने कहा - "पिता जी ! मैं जवान हो गयी हूँ । आप आँखें बन्द किए बैठे हैं, मेरी शादी नहीं कर रहे थे और आज रात मैंने आपके महावत के साथ भागकर अपना जीवन बर्बाद कर लेना था । लेकिन इस नर्तकी ने मुझे सुमति दी है कि जल्दबाजी मत कर कभी तो तेरी शादी होगी ही । क्यों अपने पिता को कलंकित करने पर तुली है ?"

♦ युवराज ने कहा - "पिता जी ! आप वृद्ध हो चले हैं, फिर भी मुझे राज नहीं दे रहे थे । मैंने आज रात ही आपके सिपाहियों से मिलकर आपका कत्ल करवा देना था । लेकिन इस नर्तकी ने समझाया कि पगले ! आज नहीं तो कल आखिर राज तो तुम्हें ही मिलना है, क्यों अपने पिता के खून का कलंक अपने सिर पर लेता है । धैर्य रख ।"

♦ जब ये सब बातें राजा ने सुनी तो राजा को भी आत्म ज्ञान हो गया । राजा के मन में वैराग्य आ गया । राजा ने तुरन्त फैसला लिया - "क्यों न मैं अभी युवराज का राजतिलक कर दूँ ।" फिर क्या था, उसी समय राजा ने युवराज का राजतिलक किया और अपनी पुत्री को कहा - "पुत्री ! दरबार में एक से एक राजकुमार आये हुए हैं । तुम अपनी इच्छा से किसी भी राजकुमार के गले में वरमाला डालकर पति रुप में चुन सकती हो ।" राजकुमारी ने ऐसा ही किया और राजा सब त्याग कर जंगल में गुरु की शरण में चला गया ।

♦ यह सब देखकर नर्तकी ने सोचा - "मेरे एक दोहे से इतने लोग सुधर गए, लेकिन मैं क्यूँ नहीं सुधर पायी ?" उसी समय नर्तकी में भी वैराग्य आ गया । उसने उसी समय निर्णय लिया कि आज से मैं अपना बुरा धंधा बन्द करती हूँ और कहा कि "हे प्रभु ! मेरे पापों से मुझे क्षमा करना । बस, आज से मैं सिर्फ तेरा नाम सुमिरन करुँगी ।"

♦ समझ आने की बात है, दुनिया बदलते देर नहीं लगती । एक दोहे की दो लाईनों से भी हृदय परिवर्तन हो सकता है । बस, केवल थोड़ा धैर्य रखकर चिन्तन करने की आवश्यकता है ।

♦ प्रशंसा से पिघलना नहीं चाहिए, आलोचना से उबलना नहीं चाहिए । नि:स्वार्थ भाव से कर्म करते रहें । क्योंकि इस धरा का, इस धरा पर, सब धरा रह जायेगा।

🍁🌼🍁🌼🍁🌼🍁🌼           
           🙏 सबका मंगल हो। 🙏🏻

Most motivational story

*⭕  हृदय परिवर्तन  ⭕*
~~~~~~~~~~~~~~

♦ एक राजा को राज भोगते हुए काफी समय हो गया था । बाल भी सफ़ेद होने लगे थे । एक दिन उसने अपने दरबार में एक उत्सव रखा और अपने गुरुदेव एवं मित्र देश के राजाओं को भी सादर आमन्त्रित किया । उत्सव को रोचक बनाने के लिए राज्य की सुप्रसिद्ध नर्तकी को भी बुलाया गया ।
 
♦ राजा ने कुछ स्वर्ण मुद्रायें अपने गुरु जी को भी दीं, ताकि यदि वे चाहें तो नर्तकी के अच्छे गीत व नृत्य पर वे उसे पुरस्कृत कर सकें । सारी रात नृत्य चलता रहा । ब्रह्म मुहूर्त की बेला आयी । नर्तकी ने देखा कि मेरा तबले वाला ऊँघ रहा है, उसको जगाने के लिए नर्तकी ने एक दोहा पढ़ा -
 *"बहु बीती, थोड़ी रही, पल पल गयी बिताय।*
*एक पलक के कारने, क्यों कलंक लग जाय ।"*

♦ अब इस दोहे का अलग-अलग व्यक्तियों ने अपने अनुरुप अलग-अलग अर्थ निकाला । तबले वाला सतर्क होकर बजाने लगा । 

♦ जब यह बात गुरु जी ने सुनी तो  उन्होंने सारी मोहरें उस नर्तकी के सामने फैंक दीं । 

♦ वही दोहा नर्तकी ने फिर पढ़ा तो राजा की लड़की ने अपना नवलखा हार नर्तकी को भेंट कर दिया । 

♦ उसने फिर वही दोहा दोहराया तो राजा के पुत्र युवराज ने अपना मुकट उतारकर नर्तकी को समर्पित कर दिया । 

♦ नर्तकी फिर वही दोहा दोहराने लगी तो राजा ने कहा - "बस कर, एक दोहे से तुमने वैश्या होकर भी सबको लूट लिया है ।"

♦ जब यह बात राजा के गुरु ने सुनी तो गुरु के नेत्रों में आँसू आ गए और गुरु जी कहने लगे - "राजा ! इसको तू वैश्या मत कह, ये तो अब मेरी गुरु बन गयी है । इसने मेरी आँखें खोल दी हैं । यह कह रही है कि मैं सारी उम्र संयमपूर्वक भक्ति करता रहा और आखिरी समय में नर्तकी का मुज़रा देखकर अपनी साधना नष्ट करने यहाँ चला आया हूँ, भाई ! मैं तो चला ।" यह कहकर गुरु जी तो अपना कमण्डल उठाकर जंगल की ओर चल पड़े ।

♦ राजा की लड़की ने कहा - "पिता जी ! मैं जवान हो गयी हूँ । आप आँखें बन्द किए बैठे हैं, मेरी शादी नहीं कर रहे थे और आज रात मैंने आपके महावत के साथ भागकर अपना जीवन बर्बाद कर लेना था । लेकिन इस नर्तकी ने मुझे सुमति दी है कि जल्दबाजी मत कर कभी तो तेरी शादी होगी ही । क्यों अपने पिता को कलंकित करने पर तुली है ?"

♦ युवराज ने कहा - "पिता जी ! आप वृद्ध हो चले हैं, फिर भी मुझे राज नहीं दे रहे थे । मैंने आज रात ही आपके सिपाहियों से मिलकर आपका कत्ल करवा देना था । लेकिन इस नर्तकी ने समझाया कि पगले ! आज नहीं तो कल आखिर राज तो तुम्हें ही मिलना है, क्यों अपने पिता के खून का कलंक अपने सिर पर लेता है । धैर्य रख ।"

♦ जब ये सब बातें राजा ने सुनी तो राजा को भी आत्म ज्ञान हो गया । राजा के मन में वैराग्य आ गया । राजा ने तुरन्त फैसला लिया - "क्यों न मैं अभी युवराज का राजतिलक कर दूँ ।" फिर क्या था, उसी समय राजा ने युवराज का राजतिलक किया और अपनी पुत्री को कहा - "पुत्री ! दरबार में एक से एक राजकुमार आये हुए हैं । तुम अपनी इच्छा से किसी भी राजकुमार के गले में वरमाला डालकर पति रुप में चुन सकती हो ।" राजकुमारी ने ऐसा ही किया और राजा सब त्याग कर जंगल में गुरु की शरण में चला गया ।

♦ यह सब देखकर नर्तकी ने सोचा - "मेरे एक दोहे से इतने लोग सुधर गए, लेकिन मैं क्यूँ नहीं सुधर पायी ?" उसी समय नर्तकी में भी वैराग्य आ गया । उसने उसी समय निर्णय लिया कि आज से मैं अपना बुरा धंधा बन्द करती हूँ और कहा कि "हे प्रभु ! मेरे पापों से मुझे क्षमा करना । बस, आज से मैं सिर्फ तेरा नाम सुमिरन करुँगी ।"

♦ समझ आने की बात है, दुनिया बदलते देर नहीं लगती । एक दोहे की दो लाईनों से भी हृदय परिवर्तन हो सकता है । बस, केवल थोड़ा धैर्य रखकर चिन्तन करने की आवश्यकता है ।

♦ प्रशंसा से पिघलना नहीं चाहिए, आलोचना से उबलना नहीं चाहिए । नि:स्वार्थ भाव से कर्म करते रहें । क्योंकि इस धरा का, इस धरा पर, सब धरा रह जायेगा।

🍁🌼🍁🌼🍁🌼🍁🌼           
           🙏 सबका मंगल हो। 🙏🏻

Saturday, 11 November 2017

How to decrease heart attack chances

*साढ़े तीन मिनिट: डॉक्टर की सलाह!*

       डॉ.के.पी.सिंह(Goldmedalist)
       कैंसर रोग विशेषज्ञ
       दिल्ली
      
        *जिन्हें सुबह या रात में सोते समय  पेशाब करने जाना पड़ता हैं उनके लिए विशेष सूचना!!*

        हर एक व्यक्ति को इसी साढ़े तीन मिनिट में सावधानी बरतनी चाहिए।

*यह इतना महत्व पूर्ण क्यों है?*
        यही साढ़े तीन मिनिट अकस्माक होने वाली मौतों की संख्या कम कर सकते हैं।

        जब जब ऐसी घटना हुई हैं, परिणाम स्वरूप तंदुरुस्त व्यक्ति भी रात में ही मृत पाया गया हैं।

        ऐसे लोगों के बारे में हम कहते हैं, कि कल ही हमने इनसे बात की थी। ऐसा अचानक क्या हुआ? यह कैसे मर गया?

       इसका मुख्य कारण यह है कि रात मे जब भी हम मूत्र विसर्जन के लिए जाते हैं, तब अचनाक या ताबड़तोब उठते हैं, परिणाम स्वरूप मस्तिष्क तक रक्त नही पहुंचता है।

       यह साढ़े तीन मिनिट बहुत महत्वपूर्ण होते हैं।

      मध्य रात्रि जब हम पेशाब करने उठते है तो हमारा ईसीजी का पैटर्न बदल सकता है। इसका कारण यह है, कि अचानक खड़े होने पर मस्तिष्क को रक्त नहीं पहुच पाता और हमारे ह्रदय की क्रिया बंद हो जाती है।

           साढ़े तीन मिनिट का प्रयास एक उत्तम उपाय है।

1. *नींद से उठते समय आधा मिनिट गद्दे पर लेटे हुए रहिए।*

2. *अगले आधा मिनिट गद्दे पर बैठिये।*

3. *अगले अढाई मिनिट पैर को गद्दे के नीचे झूलते छोड़िये।*

          साढ़े तीन मिनिट के बाद आपका मस्तिष्क बिना खून का नहीं रहेगा और ह्रदय की क्रिया भी बंद नहीं होगी! इससे अचानक होने वाली मौतें भी कम होंगी।

     आपके प्रियजनों को लाभ हो अतएव सजग करने हेतु अवश्य प्रसारित करे।
                 
            *धन्यवाद!!*

           डॉ.के.पी.सिंह(Goldmedalist)
           कैंसर रोग विशेषज्ञ दिल्ली
       
          🙏निवेदन एवं आग्रह 🙏

          आपको सिर्फ 10 लोगो को ये मैसेज फॉरवर्ड करना है और वो 10 लोग भी दूसरे 10 लोगों को फॉरवर्ड करें ।
बस आपको तो एक कड़ी जोड़नी है देखते ही देखते सिर्फ आठ steps में पूरा देश जुड़ जायेगा। —

अच्छा लगे तो कृपया सभी मित्र के साथ शेयर करें --

Cruel Akhabar

अकबर की महानता का गुणगान तो कई इतिहासकारों ने किया है लेकिन.....

अकबर की औछी हरकतों का वर्णन बहुत कम इतिहासकारों ने किया है ........!

अकबर अपने गंदे इरादों से प्रतिवर्ष दिल्ली में नौरोज का मेला आयोजित करवाता था......!

जिसमें पुरुषों का प्रवेश निषेध था ........!

अकबर इस मेले में महिला की वेष-भूषा में जाता था और जो महिला उसे मंत्र मुग्ध कर देती .....

उसे दासियाँ छल कपट से अकबर के सम्मुख ले जाती थी .........!

एक दिन नौरोज के मेले में #महाराणा #प्रताप #सिंह की भतीजी, छोटे भाई महाराज शक्तिसिंह की पुत्री, मेले की सजावट देखने के लिए आई .......

जिनका नाम बाईसा किरणदेवी था ........!

जिनका विवाह बीकानेर के पृथ्वीराज जी से हुआ।

बाईसा किरणदेवी की सुंदरता को देखकर अकबर अपने आप पर काबू नही रख पाया ......

और उसने बिना सोचे समझे दासियों के माध्यम से धोखे से जनाना महल में बुला लिया .......!

जैसे ही अकबर ने बाईसा किरणदेवी को स्पर्श करने की कोशिश की ........

किरणदेवी ने कमर से कटार निकाली और अकबर को ऩीचे पटकर छाती पर पैर रखकर कटार गर्दन पर लगा दी ........

और कहा नींच..... नराधम तुझे पता नहीं मैं उन #महाराणा प्रताप की भतीजी हुं ........!

जिनके नाम से तुझे नींद नहीं आती है ......!

बोल तेरी आखिरी इच्छा क्या है .............?

अकबर का खुन सुख गया .........!

कभी सोचा नहीं होगा कि सम्राट अकबर आज एक राजपूत बाईसा के चरणों में होगा .........!

अकबर बोला मुझे पहचानने में भूल हो गई ......

मुझे माफ कर दो देवी .......!

तो किरण देवी ने कहा कि .........

आज के बाद दिल्ली में नौरोज का मेला नहीं लगेगा ..........!

और किसी भी नारी को परेशान नहीं करेगा......!

*अकबर ने हाथ जोड़कर कहा आज के बाद कभी मेला नहीं लगेगा ..........!

उस दिन के बाद कभी मेला नहीं लगा.........!

इस घटना का वर्णन गिरधर आसिया द्वारा रचित सगत रासो मे 632 पृष्ठ संख्या पर दिया गया है।

बीकानेर संग्रहालय में लगी एक पेटिंग मे भी इस घटना को एक दोहे के माध्यम से बताया गया है।

किरण सिंहणी सी चढी... उर पर खींच कटार..!
भीख मांगता प्राण की....अकबर हाथ पसार...!!

अकबर की छाती पर पैर रखकर खड़ी वीर बाला किरन का चित्र आज भी जय पुर के संग्रहालय मे सुरक्षित है , यह देखिये ----

Monday, 30 October 2017

Swami Vivekanand story

एक विदेशी महिला ने विवेकानंद से कहा - मैं आपसे शादी करना चाहती
हूँ"।
विवेकानंद ने पूछा- "क्यों देवी ? पर मैं तो ब्रह्मचारी
हूँ"।

महिला ने जवाब दिया -"क्योंकि मुझे आपके जैसा
ही एक पुत्र चाहिए, जो पूरी दुनिया में मेरा नाम रौशन करे और वो केवल आपसे शादी
करके ही मिल सकता है मुझे"।
विवेकानंद कहते हैं - "इसका और एक उपाय है"
विदेशी महिला पूछती है -"क्या"?

विवेकानंद ने मुस्कुराते हुए कहा -"आप मुझे ही अपना
पुत्र मान लीजिये और आप मेरी माँ बन जाइए ऐसे में आपको मेरे जैसा पुत्र भी मिल
जाएगा और मुझे अपना ब्रह्मचर्य भी नही तोड़ना
पड़ेगा"
महिला हतप्रभ होकर विवेकानंद को ताकने लगी
और रोने लग गयी,

ये होती है महान आत्माओ की विचार धारा ।

"पूरे समुंद्र का पानी भी एक जहाज को नहीं डुबा सकता, जब तक पानी को जहाज अन्दर न आने दे।

इसी तरह दुनिया का कोई भी नकारात्मक विचार आपको नीचे नहीं गिरा सकता, जब तक आप उसे अपने
अंदर आने की अनुमति न दें।"

"अंदाज़ कुछ अलग हैं मेरे सोचने का,,

सब को मंजिल का शौक है और मुझे रास्तों का...

ये दुनिया इसलिए बुरी नही के यहाँ बुरे लोग ज्यादा है।
बल्कि इसलिए बुरी है कि यहाँ अच्छे
लोग खामोश है..!!!

Medical emergency attacks

कुछ बिंदु जो दिखने में छोटे हैं परंतु भविष्य में बहुत बड़ी समस्याओं को जन्म दे सकते हैं -

१. आजकल अक्सर हॉस्पिटल मे डाक्टरो और कर्मचारियों से मार पीट की घटनाएँ हो रही है. किसी परिजन की मृत्यु होने पर दुख और नाराज़गी जायज़ है परन्तु दुख मे किसी से मारपीट या जानलेवा हमले से जान वापस आ जाती है ? उसका नतीजा भी समाज को झेलना पड़ता है, अब डाक्टर भी गंभीर मरीज का इलाज करने से डरते है और मरीज को अन्य जगह रेफर करने से कभी कभी सही समय पर इलाज नही मिलता और मरीज को नुकसान होता है.

२. अक्सर अब डाक्टर कुछ विशेष धर्म, समूह, कुछ विशेष स्थान के लोगो, कुछ विशेष प्रोफेशनल्स ( व्यवसाय) के लोगो का इलाज करने से कतराते हैं या डरते है. क्या यह सही है? डाक्टर को ऐसा नही करना चाहिए, परन्तु जान, माल, इज़्ज़त का डर तो सबको लगता है. पहले हम किसी भी गंभीर मरीज को सही होने की दिलासा देते थे, अब सबसे पहले बुरी प्रोग्नोसिस बताते है और गंभीर मरीज लेने से पहले अपने बचाव का रास्ता ढूंढते है, यह क्या मरीज के हित मे है?

३. चिकित्सा पेशे मे प्रोफेशनल ख़तरा हमेशा रहता है, कोई भी डाक्टर मरीज को जान बुझ कर नही मारता. कई बार हमारे पास कोई और विकल्प नही होता. लापरवाही और ग़लत निर्णय अलग अलग बातें हैं. मुझे आपरेशन करते समय १ या २ सेकंड मे निर्णय लेना होता है, उस समय मैं ना तो कोई किताब मे पढ़ सकता हूँ और कभी कभी अपने किसी साथी से सलाह भी नही ले पाता, और उस १ सेकंड मे लिया गया मेरा निर्णय ग़लत भी हो सकताहै, परन्तु मैने कोई लापरवाही नही की, यह बात अलग है की मेरे ग़लत निर्णय से मेरे मरीज को नुकसान हो सकता है, परन्तु ऐसी ही स्थिति मे मैने असंख्य जाने भी बचाई है, जो मेरे निर्णय लेने मे १ सेकंड की देरी से मर जाते. क्या आप समझते है, मरीज की साँस रुक गयी हो या फिर तेज़ी से खून बह रहा हो, कई बार तो हमे सोचने का समय भी नही मिलता और बिना कुछ सोचे समझे तुरंत निर्णय लेना पड़ता है, ऐसे समय मानव शरीर की प्रतिक्रिया हर मरीज मे अलग अलग होती है.

४. क्या नासा के डिस्कवरी मे कल्पना चावला नही मारी गयी, फिर क्या उन इन्जिनियरो या वैज्ञानिको पर हमला हुआ ? क्या इन्जिनियरो की ग़लती से पुल नही गिर जाते, जबकि उनके पास निर्माण के समय निर्णय लेने के लिए महीनो से लेकर वर्षों का समय होता है, उच्च न्यायालयों मे निचली अदालत का निर्णय पलट जाता जाता है, जबकि जज के पास सोचने और निर्णय लेने के लिए महीनो से लेकर वर्षो का समय और वकील होते है, क्या किसी जज को ग़लत निर्णय लेने के लिए कोई सज़ा मिली है? ट्रेन ड्राइवर की एक ग़लती से अनेक मौत हो सकती है, हवाई जहाज़ के पायलट की वजह से अनेक मौत हो जाती है, यह सब एक इंसान है. कोई ना कोई तो यह काम करेगा, जो भी करेगा उससे भी ग़लती हो सकती है मैं यह नही कह रहा हूँ की डाक्टरो को ग़लती करने का अधिकार है, परन्तु उनकी सीमाओ का भी ध्यान रखना चाहिए. यदि कोई बड़ी ग़लती है, तो क़ानूनन कार्यवाही होनी चाहिए, ना की जानलेवा हमला. खून का बदला खून.

५. यदि डाक्टर गंभीर मरीज नही देखेंगे, तो कौन इलाज करेगा. अचानक पेट दर्द होने पर डाक्टर ही याद आएगा, उस समय ना तो कोई विधायक, सांसद या डी. एम. साहब और ना ही कप्तान काम आएँगे.

६. मित्रो, एक चिकित्सक दिन रात काम करता है, पैसे के लिए नही, प्रोफेशनल जिम्मेदारी बस . कई बार डॉ रात मे ३ बजे तक दुर्घटनाग्रस्त मरीज का आपरेशन करते हैं फिर उसके बाद सोते हैं. दोबारा अगर सुबह ६ बजे एक इमरजेंसी फिर अगर आ गयी, तो वो फिर हॉस्पिटल मे. क्या हम इंसान नही है, क्या हमें नींद नही आती ?
मित्रो, क्या आपको रात मे कभी ज़रूरत होने पर किसी भी कीमत पर प्लंबर , सफाई कर्मचारी, इंजीनियर,वकील,C
A, मजदूर की सेवाएँ मिल पाती है, नही ना, फिर तो डाक्टर की सेवाओ की कद्र कीजिए.

७. मित्रो, आपने अपने कालेज के दिनो मे देखा ही होगा, जिन बच्चो के मेडिकल मे एडमिशन हुए थे, वे और बच्चो की तुलना मे कितने होनहार थे और वे कितने घंटे पढ़ते थे , शायद आप भी उनकी क़ाबलियत से सहमत होंगे, फिर वही छात्र आगे डाक्टर बनकर इतने लापरवाह, कामचोर हो सकते है ? जबकि हर माँ बाप अपने बच्चो को डाक्टर बनाना चाहता है, यदि वे नही पढ़े और बाद मे बढ़े होकर उन होनहार डाक्टरो की कमियाँ निकालने लगे.

८. मित्रो, कई बार हम दिन रात काम प्रोफेशनल मजबूरी मे करते है. एक बार मेरे अपने बेटे के जन्मदिन का केक शाम ७ बजे के बजाए रात मे ११.३० कटा, क्योंकि मैं खुद एक एमरजेंसी आपरेशन कर रहा था. एक दो बार अपनी पत्नी के जन्मदिन पर बाहर खाना खाने नही जा पाए, क्योंकि मैं मरीज़ो मे व्यस्त था, अब बताएँ हमारे परिवार पर क्या बीतती होगी. जब पत्नी कहती है की बेटा अभी पापा के पास समय नही है हम बाजार नही जा पायेन्गे. मेरे कई मित्र गवाह हैकि उनके यहाँ फंक्शन मे मैं कितने समय पर पहुँच पाया. ऐसा नही है की मैं जाना नही चाहता था, बल्कि मुझे मरीज़ो के चक्कर मे देर हो गयी थी, फिर भी मैं लापरवाह कहलाता हूँ, क्योंकि मैं एक डाक्टर हूँ.

९. मित्रो, आजकल नकली दवाओ, नकली खाने का काम ज़ोर शोर से चल रहा है, सब जानते है पर कोई कुछ नही करता. लोग कहते की डाक्टर ने ग़लत इंजेक्शन लगाकर हमारे मरीज को मार दिया, परन्तु हमे भी नही पता की वो इंजेक्शन असली था भी या नही. क्योंकि कंपनी तो किसी नेता या उद्योगपति की होगी, उसे कुछ कह नही सकते बस डाक्टर को पीटो. छत्तीसगढ़ मे नकली दवा से नसबंदी की १८ महिलाओ की मौत हो गयी, सर्जन के खिलाफ कार्यवाही हुई, क्योंकि फैक्टरी तो हेल्थ मिनिस्टर के बेटे की थी.

१०. बहुत समय हम भी मरीज की मौत का कारण नही जानते जैसे - कई बार स्वस्थ बच्चा ( ६माह तक) अचानक बिना किसी बीमारी मर जाते है, पता नही क्या कारण है, जब स्वस्थ बच्चा मर सकता है तो बीमार क्यों नही, कई बार सफल आपरेशन के कई घंटे बाद मरीज की अचानक मौत क्यों हो जाती है, वास्तव मे कारण पता नही. स्वस्थ आदमी अचानक बिना किसी बीमारी के तुरंत मर जाताहै,मान लिया जाता हैं की हार्ट अटैक हुआ होगा, असली कारण पता नही. ऐसा ही कई बार हमारे काम भी हो जाता है, इसका मतलब यह नही की हमने ग़लत इलाज से उसे मार दिया. कुछ कारण अभी अज्ञात है.इसका मतलब यह नही डाक्टर को पीटने लगो.

मेरे कहने का यह मतलब नही की सभी डाक्टर सही है, कोई ग़लती नही हो सकती, परन्तु उसके लिए न्याय सम्मत कार्यवाही कीजिए, मुक़दमा कीजिए, मेडिकल एक्सपर्ट से बात कीजिए, परन्तु हमारे और हमारे परिवार के साथ मार पीट ना कीजिए. यदि हम गंभीर मरीज़ो को अपने सेवाए नही देंगे,अनेक अमूल्य जानें जा सकती है.

Algaovadi in India

*एक बादशाह अपने कुत्ते के साथ नाव में यात्रा कर रहा था । उस नाव में अन्य यात्रियों के साथ एक दार्शनिक भी था।* 

*कुत्ते ने कभी नौका में सफर नहीं किया था, इसलिए वह अपने को सहज महसूस नहीं कर पा रहा था।* 

*वह उछल-कूद कर रहा था और किसी को चैन से नहीं बैठने दे रहा था।*

*मल्लाह उसकी उछल-कूद से परेशान था कि ऐसी स्थिति में यात्रियों की हड़बड़ाहट से नाव डूब जाएगी।* 

*वह भी डूबेगा और दूसरों को भी ले डूबेगा।*

 *परन्तु कुत्ता अपने स्वभाव के कारण उछल-कूद में लगा था।*

 *ऐसी स्थिति देखकर बादशाह भी गुस्से में था।*

 *पर, कुत्ते को सुधारने का कोई उपाय उन्हें समझ में नहीं आ रहा था।*

*नाव में बैठे दार्शनिक से रहा नहीं गया।*

 *वह बादशाह के पास गया और बोला - "सरकार ! अगर आप इजाजत दें तो मैं इस कुत्ते को भीगी बिल्ली बना सकता हूँ ।"*

 *बादशाह ने तत्काल अनुमति दे दी।* 
*दार्शनिक ने दो यात्रियों का सहारा लिया और उस कुत्ते को नाव से उठाकर नदी में फेंक दिया।*

 *कुत्ता तैरता हुआ नाव के खूंटे को पकड़ने लगा।*

 *उसको अब अपनी जान के लाले पड़ रहे थे।* 

*कुछ देर बाद दार्शनिक ने उसे खींचकर नाव में चढ़ा लिया।*

*वह कुत्ता चुपके से जाकर एक कोने में बैठ गया।*

 *नाव के यात्रियों के साथ बादशाह को भी उस कुत्ते के बदले व्यवहार पर बड़ा आश्चर्य हुआ।*

 *बादशाह ने दार्शनिक से पूछा - "यह पहले तो उछल-कूद और हरकतें कर रहा था, अब देखो कैसे यह पालतू बकरी की तरह बैठा है ?"*
.
*दार्शनिक बोला -*
*"खुद तकलीफ का स्वाद चखे बिना किसी को दूसरे की विपत्ति का अहसास नहीं होता है।*

 *इस कुत्ते को जब मैंने पानी में फेंक दिया तो इसे पानी की ताकत और नाव की उपयोगिता समझ में आ गयी ।"*

*🙏भारत में रहकर भारत को गाली देने वाले कुत्तों के लिए समर्पित 🙏*

Sunday, 29 October 2017

Ramayan meaning

*रामायण कथा का एक अंश*
जिससे हमे *सीख* मिलती है *"एहसास"* की...
    🔰🔰🔰🔰🔰🔰

*श्री राम, लक्ष्मण एवम् सीता' मैया* चित्रकूट पर्वत की ओर जा रहे थे,
राह बहुत *पथरीली और कंटीली* थी !
की यकायक *श्री राम* के चरणों मे *कांटा* चुभ गया !

श्रीराम *रूष्ट या क्रोधित* नहीं हुए, बल्कि हाथ जोड़कर धरती माता से *अनुरोध* करने लगे !
बोले- "माँ, मेरी एक *विनम्र प्रार्थना* है आपसे, क्या आप *स्वीकार* करेंगी ?"

*धरती* बोली- "प्रभु प्रार्थना नहीं, आज्ञा दीजिए !"

प्रभु बोले, "माँ, मेरी बस यही विनती है कि जब भरत मेरी खोज मे इस पथ से गुज़रे, तो आप *नरम* हो जाना !
कुछ पल के लिए अपने आँचल के ये पत्थर और कांटे छुपा लेना !
मुझे कांटा चुभा सो चुभा, पर मेरे भरत के पाँव मे *आघात* मत करना"

श्री राम को यूँ व्यग्र देखकर धरा दंग रह गई !
पूछा- "भगवन, धृष्टता क्षमा हो ! पर क्या भरत आपसे अधिक सुकुमार है ?
जब आप इतनी सहजता से सब सहन कर गए, तो क्या कुमार भरत सहन नही कर पाँएगें ?
फिर उनको लेकर आपके चित मे ऐसी *व्याकुलता* क्यों ?"

*श्री राम* बोले- "नही...नही माते, आप मेरे कहने का अभिप्राय नही समझीं ! भरत को यदि कांटा चुभा, तो वह उसके पाँव को नही, उसके *हृदय* को विदीर्ण कर देगा !"

*"हृदय विदीर्ण* !! ऐसा क्यों प्रभु ?",
*धरती माँ* जिज्ञासा भरे स्वर में बोलीं !

"अपनी पीड़ा से नहीं माँ, बल्कि यह सोचकर कि...इसी *कंटीली राह* से मेरे भैया राम गुज़रे होंगे और ये *शूल* उनके पगों मे भी चुभे होंगे !
मैया, मेरा भरत कल्पना मे भी मेरी *पीड़ा* सहन नहीं कर सकता, इसलिए उसकी उपस्थिति मे आप *कमल पंखुड़ियों सी कोमल* बन जाना..!!"

अर्थात 
*रिश्ते* अंदरूनी एहसास, आत्मीय अनुभूति के दम पर ही टिकते हैं ।
जहाँ *गहरी आत्मीयता* नही, वो रिश्ता शायद नही परंतु *दिखावा* हो सकता है ।
🔰🔰
इसीलिए कहा गया है कि...
*रिश्ते*खून से नहीं, *परिवार* से नही,
*मित्रता* से नही, *व्यवहार* से नही,
बल्कि...
सिर्फ और सिर्फ *आत्मीय "एहसास"* से ही बनते और *निर्वहन* किए जाते हैं।
जहाँ *एहसास* ही नहीं, 
*आत्मीयता* ही नहीं ..
वहाँ *अपनापन* कहाँ से आएगा l
          🍃🍂🍃🍂🍃
*हम सबके लिए प्रेरणास्पद लघुकथा* ✍✍

Heart problems

*हृदय की बीमारी*

*आयुर्वेदिक इलाज !!*


हमारे देश भारत मे 3000 साल पहले एक बहुत बड़े ऋषि हुये थे

उनका नाम था *महाऋषि वागवट जी !!* 

उन्होने एक पुस्तक लिखी थी

 जिसका नाम है *अष्टांग हृदयम!!* 

*(Astang  hrudayam)*

और इस पुस्तक मे उन्होने ने
 बीमारियो को ठीक करने के लिए *7000* सूत्र लिखे थे ! 

यह उनमे से ही एक सूत्र है !! 

वागवट जी लिखते है कि कभी भी हृदय को घात हो रहा है ! 

मतलब दिल की नलियों मे blockage होना शुरू हो रहा है ! 

तो इसका मतलब है कि रकत (blood) मे acidity(अम्लता ) बढ़ी हुई है ! 

अम्लता आप समझते है !

जिसको अँग्रेजी मे कहते है acidity !! 

*अम्लता दो तरह की होती है !*

एक होती है *पेट कि अम्लता !*

*और एक होती है रक्त (blood) की अम्लता !!*

आपके पेट मे अम्लता जब बढ़ती है !

तो आप कहेंगे पेट मे जलन सी हो रही है !! 

खट्टी खट्टी डकार आ रही है ! 

मुंह से पानी निकाल रहा है ! 

और अगर ये अम्लता (acidity)और बढ़ जाये ! 

तो hyperacidity होगी ! 

और यही पेट की अम्लता बढ़ते-बढ़ते जब रक्त मे आती है तो रक्त अम्लता  (blood acidity) होती !! 

और जब blood मे acidity बढ़ती है तो ये अम्लीय रक्त  (blood) दिल की नलियो मे से निकल नहीं पाता ! 

और नलिया मे blockage कर देता है ! 

तभी heart attack होता है !! इसके बिना heart attack नहीं होता !! 

और ये आयुर्वेद का सबसे बढ़ा सच है जिसको कोई डाक्टर आपको बताता नहीं ! 

क्योंकि इसका इलाज सबसे सरल है !! 

इलाज क्या है ?? 

वागबट जी लिखते है कि जब रक्त (blood) मे अम्लता (acidity) बढ़ गई है ! 

तो आप ऐसी चीजों का उपयोग करो जो क्षारीय है ! 

आप जानते है दो तरह की चीजे होती है ! 

*अम्लीय और क्षारीय !!*

*acidic and alkaline* 

अब अम्ल और क्षार को मिला दो तो क्या होता है ! ????? 

*acid and alkaline को मिला दो तो क्या होता है )?????*

*neutral*

होता है सब जानते है !!

तो वागबट जी लिखते है ! 

*कि रक्त की अम्लता बढ़ी हुई है तो क्षारीय(alkaline) चीजे खाओ !*

तो रक्त की अम्लता (acidity) neutral हो जाएगी !!! 

और रक्त मे अम्लता neutral हो गई ! 

तो heart attack की जिंदगी मे कभी संभावना ही नहीं !! 

ये है सारी कहानी !! 

अब आप पूछोगे जी ऐसे कौन सी चीजे है जो क्षारीय है और हम खाये ?????

आपके रसोई घर मे ऐसी बहुत सी चीजे है जो क्षारीय है ! 

जिनहे आप खाये तो कभी heart attack न आए ! 

और अगर आ गया है ! 

तो दुबारा न आए !!

सबसे ज्यादा आपके घर मे क्षारीय चीज है वह है लौकी !!

जिसे दुधी भी कहते है !!

 English मे इसे कहते है bottle gourd !!! 

जिसे आप सब्जी के रूप मे खाते है ! 

इससे ज्यादा कोई क्षारीय चीज ही नहीं है ! 

तो आप रोज लौकी का रस निकाल-निकाल कर पियो !! 

या कच्ची लौकी खायो !! 

रामदेव को आपने कई बार कहते सुना होगा लौकी का जूस पीयो, लौकी का जूस पीयों ! 

3 लाख से ज्यादा लोगो को उन्होने ठीक कर दिया लौकी का जूस पिला पिला कर !! 

और उसमे हजारो डाक्टर है ! 

जिनको खुद heart attack होने वाला था !! 

वो वहाँ जाते है लौकी का रस पी पी कर आते है !! 

3 महीने 4 महीने लौकी का रस पीकर वापिस आते है आकर फिर clinic पर बैठ जाते है ! 

वो बताते नहीं हम कहाँ गए थे !

वो कहते है हम न्युयार्क गए थे

हम जर्मनी गए थे आपरेशन करवाने ! 

वो राम देव के यहाँ गए थे ! 

और 3 महीने लौकी का रस पीकर आए है ! 

आकर फिर clinic मे आपरेशन करने लग गए है ! 

और वो आपको नहीं बताते कि आप भी लौकी का रस पियो !! 

तो मित्रो जो ये रामदेव बताते है वे भी वागवट जी के आधार पर ही बताते है !! 

वागवतट जी कहते है रक्त  की अम्लता कम करने की सबसे  ज्यादा ताकत लौकी मे ही है ! 

तो आप लौकी के रस का सेवन करे !! 

कितना सेवन करे ????????? 

रोज 200 से 300 मिलीग्राम पियो !! 

कब पिये ?? 

सुबह खाली पेट (toilet जाने के बाद ) पी सकते है !! 

या नाश्ते के आधे घंटे के बाद पी सकते है !!

 इस लौकी के रस को आप और ज्यादा क्षारीय बना सकते है !

इसमे 7 से 10 पत्ते के तुलसी के डाल लो 

*तुलसी बहुत क्षारीय है !!*

इसके साथ आप पुदीने से 7 से 10 पत्ते मिला सकते है ! 

*पुदीना बहुत क्षारीय है !*

इसके साथ आप काला नमक या सेंधा नमक जरूर डाले ! 

ये भी बहुत क्षारीय है !! 

लेकिन याद रखे नमक काला या सेंधा ही डाले ! 

वो दूसरा आयोडीन युक्त नमक कभी न डाले !! 

ये आओडीन युक्त नमक अम्लीय है !!!! 

तो मित्रों आप इस लौकी के जूस का सेवन जरूर करे !! 

2 से 3 महीने आपकी सारी heart की blockage ठीक कर देगा !! 

21 वे दिन ही आपको बहुत ज्यादा असर दिखना शुरू हो जाएगा !!!

कोई आपरेशन की आपको जरूरत नहीं पड़ेगी !! 

घर मे ही हमारे भारत के आयुर्वेद से इसका इलाज हो जाएगा !! 

और आपका अनमोल शरीर और लाखो रुपए आपरेशन के बच जाएँगे !! 






आपने पूरी पोस्ट पढ़ी आपका बहुत बहुत धन्यवाद !!

- यदि आपको लगता है कि मेने ठीक कहा है तो आप ये जानकारी सभी तक पहुचाए