Wednesday, 22 February 2017

True of Sea Salt | Don't use Sea Salt.

सेंधा नमक : भारत से कैसे गायब कर दिया गया
सेंधा नमक वात, पित्त और कफ को दूर करता है
सेंधा नमक :-
आप सोच रहे होंगे की ये सेंधा नमक बनता कैसे है ?? आइये आज हम आपको बताते हैं कि नमक मुख्य कितने प्रकार होते हैं !!
एक होता है समुद्री नमक दूसरा होता है सेंधा नमक (rock slat) !!
सेंधा नमक बनता नहीं है पहले से ही बना बनाया है !! पूरे उत्तर भारतीय उपमहाद्वीप में खनिज पत्थर के नमक को 'सेंधा नमक' या 'सैन्धव नमक', लाहोरी नमक आदि आदि नाम से जाना जाता है ! जिसका मतलब है 'सिंध या सिन्धु के इलाक़े से आया हुआ'। वहाँ नमक के बड़े बड़े पहाड़ है सुरंगे है !! वहाँ से ये नमक आता है ! मोटे मोटे टुकड़ो मे होता है आजकल पीसा हुआ भी आने लगा है यह ह्रदय के लिये उत्तम, दीपन और पाचन मे मददरूप, त्रिदोष शामक, शीतवीर्य अर्थात ठंडी तासीर वाला, पचने मे हल्का है । इससे पाचक रस बढ़्ते हैं। तों अंत आप ये समुद्री नमक के चक्कर से बाहर निकले ! काला नमक ,सेंधा नमक प्रयोग करे !! क्यूंकि ये प्रकर्ति का बनाया है ईश्वर का बनाया हुआ है !! और सदैव याद रखे इंसान जरूर शैतान हो सकता है लेकिन भगवान कभी शैतान नहीं होता !!
आयोडीन के नाम पर हम जो नमक खाते हैं उसमें कोर्इ तत्व नहीं होता। आयोडीन और फ्रीफ्लो नमक बनाते समय नमक से सारे तत्व निकाल लिए जाते हैं और उनकी बिक्री अलग से करके बाजार में सिर्फ सोडियम वाला नमक ही उपलब्ध होता है जो आयोडीन की कमी के नाम पर पूरे देश में बेचा जाता है, जबकि आयोडीन की कमी सिर्फ पर्वतीय क्षेत्रों में ही पार्इ जाती है इसलिए आयोडीन युक्त नमक केवल उन्ही क्षेत्रों के लिए जरुरी है।
भारत मे 1930 से पहले कोई भी समुद्री नमक नहीं खाता था विदेशी कंपनीया भारत मे नमक के व्यापार मे आज़ादी के पहले से उतरी हुई है ,उनके कहने पर ही भारत के अँग्रेजी प्रशासन द्वारा भारत की भोली भली जनता को आयोडिन मिलाकर समुद्री नमक खिलाया जा रहा है
हुआ ये कि जब ग्लोबलाईसेशन के बाद बहुत सी विदेशी कंपनियो(अनपूर्णा,कैपटन कुक ) ने नमक बेचना शुरू किया तब ये सारा खेल शुरू हुआ ! अब समझिए खेल क्या था ?? खेल ये था कि विदेशी कंपनियो को नमक बेचना है और बहुत मोटा लाभ कमाना है और लूट मचानी है तो पूरे भारत मे एक नई बात फैलाई गई कि आओडीन युक्त नामक खाओ ,आओडीन युक्त नमक खाओ ! आप सबको आओडीन की कमी हो गई है ! ये सेहत के लिए बहुत अच्छा है आदि आदि बातें पूरे देश मे प्रायोजित ढंग से फैलाई गई !! और जो नमक किसी जमाने मे 2 से 3 रूपये किलो मे बिकता था ! उसकी जगह आओडीन नमक के नाम पर सीधा भाव पहुँच गया 8 रूपये प्रति किलो ! और आज तो 20 रूपये को भी पार कर गया है !
दुनिया के 56 देशों ने अतिरिक्त आओडीन युक्त नमक 40 साल पहले ban कर दिया अमेरिका मे नहीं है जर्मनी मे नहीं है फ्रांस मे नहीं ,डेन्मार्क मे नहीं , यही बेचा जा रहा है डेन्मार्क की सरकार ने 1956 मे आओडीन युक्त नमक बैन कर दिया क्यों ?? उनकी सरकार ने कहा हमने मे आओडीन युक्त नमक खिलाया !(1940 से 1956 तक ) अधिकांश लोग नपुंसक हो गए ! जनसंख्या इतनी कम हो गई कि देश के खत्म होने का खतरा हो गया ! उनके वैज्ञानिको ने कहा कि आओडीन युक्त नमक बंद करवाओ तो उन्होने बैन लगाया ! और शुरू के दिनो मे जब हमारे देश मे ये आओडीन का खेल शुरू हुआ इस देश के बेशर्म नेताओ ने कानून बना दिया कि बिना आओडीन युक्त नमक बिक नहीं सकता भारत मे !! वो कुछ समय पूर्व किसी ने कोर्ट मे मुकदमा दाखिल किया और ये बैन हटाया गया
आज से कुछ वर्ष पहले कोई भी समुद्री नमक नहीं खाता था सब सेंधा नमक ही खाते थे !
सेंधा नमक के उपयोग से रक्तचाप और बहुत ही गंभीर बीमारियों पर नियन्त्रण रहता है ।! क्योंकि ये अम्लीय नहीं ये क्षारीय है (alkaline ) !! क्षारीय चीज जब अमल मे मिलती है तो वो न्यूटल हो जाता है ! और रक्त अमलता खत्म होते ही शरीर के 48 रोग ठीक हो जाते हैं ! ये नामक शरीर मे पूरी तरह से घुलनशील है ! और सेंधा नमक की शुद्धता के कारण आप एक और बात से पहचान सकते हैं कि उपवास ,व्रत मे सब सेंधा नमक ही खाते है ! तो आप सोचिए जो समुंदरी नमक आपके उपवास को अपवित्र कर सकता है वो आपके शरीर के लिए कैसे लाभकारी हो सकता है ?? सेंधा नमक शरीर मे 97 पोषक तत्वो की कमी को पूरा करता है ! इन पोषक तत्वो की कमी ना पूरी होने के कारण ही लकवे (paralysis ) का अटैक आने का सबसे बढ़ा जोखिम होता है सेंधा नमक के बारे में आयुर्वेद में बोला गया है कि यह आपको इसलिये खाना चाहिए क्योंकि सेंधा नमक वात, पित्त और कफ को दूर करता है। यह पाचन में सहायक होता है और साथ ही इसमें पोटैशियम और मैग्नीशियम पाया जाता है जो हृदय के लिए लाभकारी होता है। यही नहीं आयुर्वेदिक औषधियों में जैसे लवण भाष्कर, पाचन चूर्ण आदि में भी प्रयोग किया जाता है।
समुद्री नमक :-
ये जो समुद्री नमक है आयुर्वेद के अनुसार ये तो अपने आप मे ही बहुत खतरनाक है ! क्योंकि कंपनियाँ इसमे अतिरिक्त आओडीन डाल रही है !! अब आओडीन भी दो तरह का होता है एक तो भगवान का बनाया हुआ जो पहले से नमक मे होता है ! दूसरा होता है industrial iodine ! ये बहुत ही खतरनाक है ! तो समुद्री नमक जो पहले से ही खतरनाक है उसमे कंपनिया अतिरिक्त industrial iodine डाल को पूरे देश को बेच रही है ! जिससे बहुत सी गंभीर बीमरिया हम लोगो को आ रही है ! ये नमक मानव द्वारा फ़ैक्टरियों मे निर्मित है !
आम तौर से उपयोग मे लाये जाने वाले समुद्री नमक से उच्च रक्तचाप (high BP ) ,डाइबिटीज़, आदि गंभीर बीमारियो का भी कारण बनता है । इसका एक कारण ये है कि ये नमक अम्लीय (acidic) होता है ! जिससे रक्त अम्लता बढ़ती है और रक्त अमलता बढ्ने से ये सब 48 रोग आते है ! ये नमक पानी कभी पूरी तरह नहीं घुलता हीरे (diamond ) की तरह चमकता रहता है इसी प्रकार शरीर के अंदर जाकर भी नहीं घुलता और अंत इसी प्रकार किडनी से भी नहीं निकल पाता और पथरी का भी कारण बनता है ! और ये नमक नपुंसकता और लकवा (paralysis ) का बहुत बड़ा कारण है समुद्री नमक से सिर्फ शरीर को 4 पोषक तत्व मिलते है ! और बीमारिया जरूर साथ मे मिल जाती है !
रिफाइण्ड नमक में 98% सोडियम क्लोराइड ही है शरीर इसे विजातीय पदार्थ के रुप में रखता है। यह शरीर में घुलता नही है। इस नमक में आयोडीन को बनाये रखने के लिए Tricalcium Phosphate, Magnesium Carbonate, Sodium Alumino Silicate जैसे रसायन मिलाये जाते हैं जो सीमेंट बनाने में भी इस्तेमाल होते है। विज्ञान के अनुसार यह रसायन शरीर में रक्त वाहिनियों को कड़ा बनाते हैं जिससे ब्लाक्स बनने की संभावना और आक्सीजन जाने मे परेशानी होती है, जोड़ो का दर्द और गढिया, प्रोस्टेट आदि होती है। आयोडीन नमक से पानी की जरुरत ज्यादा होती है। 1 ग्राम नमक अपने से 23 गुना अधिक पानी खींचता है। यह पानी कोशिकाओ के पानी को कम करता है। इसी कारण हमें प्यास ज्यादा लगती है।
निवेदन :-
पांच हजार साल पुरानी आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में भी भोजन में सेंधा नमक के ही इस्तेमाल की सलाह दी गई है। भोजन में नमक व मसाले का प्रयोग भारत, नेपाल, चीन, बंगलादेश और पाकिस्तान में अधिक होता है। आजकल बाजार में ज्यादातर समुद्री जल से तैयार नमक ही मिलता है। जबकि 1960 के दशक में देश में लाहौरी नमक मिलता था। यहां तक कि राशन की दुकानों पर भी इसी नमक का वितरण किया जाता था। स्वाद के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होता था। समुद्री नमक के बजाय सेंधा नमक का प्रयोग होना चाहिए।
आप इस अतिरिक्त आओडीन युक्त समुद्री नमक खाना छोड़िए और उसकी जगह सेंधा नमक खाइये !! सिर्फ आयोडीन के चक्कर में समुद्री नमक खाना समझदारी नहीं है, क्योंकि जैसा हमने ऊपर बताया आओडीन हर नमक मे होता है सेंधा नमक मे भी आओडीन होता है बस फर्क इतना है इस सेंधा नमक मे प्राकृतिक के द्वारा भगवान द्वारा बनाया आओडीन होता है इसके इलावा आओडीन हमें आलू, अरवी के साथ-साथ हरी सब्जियों से भी मिल जाता है।

Tuesday, 7 February 2017

🚩क्यूँ ना घमँड करूँ अपने वीर पूर्वजों पर ??🚩

🚩क्यूँ ना घमँड करूँ अपने वीर पूर्वजों पर ??🚩
🚩1.बप्पा रावल,- अरबो को हराया ओर हिन्दुऔ को बचाए रखा..
🚩2 . भीम देव दवितय , मोहम्मद गौरी को 1178 मे हराया और 2 साल तक जेल मे रखा..
🚩3.पृथ्वीराज चौहान - गौरी को 17 बार हराया और हिन्दुओ की साख बचाई..
🚩4.हमीरदेव - खिलजी को 1296 में काटा और हिन्दुओं की ताकत का लोहा मनवाया ..
🚩5.मानसिहं तोमर 1516 तक इबराहीम लोदी को कई बार हराया..
🚩6. वीर शिवाजी- ओरंगजेब को हराया ओर मुल्लों को बुरी तरह काटा..
🚩7. राणा सांगा - बाबर को भीख दी और धोका मिला ओर युद्ध मे 80 घाव के बाद भी लड़े लोधी को हराया..
🚩8. राणा कुम्भा- अपनी जिदगीँ मे 17 युद्ध लडे,एक भी नही हारे..
🚩9. रानी दुर्गावती-एक औरत नें अकबर को 3 बार हराया..
🚩10.कान्हड देव 1300 मे अलाउद्दीन खिलजी को हराया और सोमनाथ का शिवलिगं को वापिस लिया..
🚩11. विरम देव जिसकी वीरता पे खिलजी की बेटी फिरोजा फिदा हो गई थी..
🚩12 . चन्द्रगुप्त मौर्य- क्षत्रिय कुल का सबसे पहला राजा जिसने सिकंदर को हराया..
🚩13 . महाराणा प्रताप- इनके बारे में तो मुसलमानो से पुछ लेना -जय महाराणा..
14. गुरु गोविंद सिंह जी - जिन्होंने हिन्दू धर्म के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया पर धर्म नहीं जाने दिया
🚩🚩सभी हिन्दू भाई-बहन अपने पूर्वजों का इतिहास और सच्चाई अपने अपने बच्चों व परिवार वालो को बताएं,,🚩🚩
🚩जय भवानी🚩
🚩हिन्दू यूवा शक्ति🚩
🚩जय वीर शिवा जी🚩
आओ सभी हिन्दू भाई-बहन मिलकर देश के लिए एक होने का प्रण ले।

Sunday, 5 February 2017

एक किसान की मन की बात

_एक बार ज़रूर पढ़े_

*एक किसान की मन की बात*:-
😞😞😞😞😞😞😞😞😞
कहते हैं..

इन्सान सपना देखता है
तो वो ज़रूर पूरा होता है.
मगर
किसान के सपने
कभी पूरे नहीं होते।

बड़े अरमान और कड़ी मेहनत से फसल तैयार करता है, और जब तैयार हुई फसल को बेचने मंडी जाता है।

बड़ा खुश होते हुए जाता है...

बच्चों से कहता है...
आज तुम्हारे लिये नये कपड़े लाऊंगा फल और मिठाई भी लाऊंगा।।

पत्नी से कहता है..
तुम्हारी साड़ी भी कितनी पुरानी हो गई है फटने भी लगी है आज एक साड़ी नई लेता आऊंगा।।
😞😞😞😞😞
पत्नी:–"अरे नही जी..!"
"ये तो अभी ठीक है..!"
"आप तो अपने लिये
जूते ही लेते आना कितने पुराने हो गये हैं और फट भी तो गये हैं..!"

जब
किसान मंडी पहुँचता है।

ये उसकी मजबूरी है..
वो अपने माल की कीमत खुद नहीं लगा पाता।

व्यापारी
उसके माल की कीमत
अपने हिसाब से तय करते हैं...

एक
साबुन की टिकिया पर भी उसकी कीमत लिखी होती है.।

एक
माचिस की डिब्बी पर भी उसकी कीमत लिखी होती है.।

लेकिन किसान
अपने माल की कीमत खु़द नहीं कर पाता .।

खैर..
माल बिक जाता है,
लेकिन कीमत
उसकी सोच अनुरूप नहीं मिल पाती.।

माल तौलाई के बाद
जब पेमेन्ट मिलता है..
वो सोचता है..
इसमें से दवाई वाले को देना है, खाद वाले को देना है, मज़दूर को देना है ,

अरे हाँ,
बिजली का बिल
भी तो जमा करना है.
सारा हिसाब
लगाने के बाद कुछ बचता ही नहीं.।।

वो मायूस हो
घर लौट आता है।।

बच्चे उसे बाहर ही इन्तज़ार करते हुए मिल जाते हैं...

"पिताजी..! पिताजी..!" कहते हुये उससे लिपट जाते हैं और पूछते हैं:-
"हमारे नये कपडे़ नहीं ला़ये..?"

पिता:–"वो क्या है बेटा..,
कि बाजार में अच्छे कपडे़ मिले ही नहीं,
दुकानदार कह रहा था,
इस बार दिवाली पर अच्छे कपडे़ आयेंगे तब ले लेंगे..!"

पत्नी समझ जाती है, फसल
कम भाव में बिकी है,
वो बच्चों को समझा कर बाहर भेज देती है.।

पति:–"अरे हाँ..!"
"तुम्हारी साड़ी भी नहीं ला पाया..!"

पत्नी:–"कोई बात नहीं जी, हम बाद में ले लेंगे लेकिन आप अपने जूते तो ले आते..!"

पति:– "अरे वो तो मैं भूल ही गया..!"

पत्नी भी पति के साथ सालों से है पति का मायूस चेहरा और बात करने के तरीके से ही उसकी परेशानी समझ जाती है
लेकिन फिर भी पति को दिलासा देती है .।

और अपनी नम आँखों को साड़ी के पल्लू से छिपाती रसोई की ओर चली जाती है.।

फिर अगले दिन..
सुबह पूरा परिवार एक नयी उम्मीद ,
एक नई आशा एक नये सपने के साथ नई फसल की तैयारी के लिये जुट जाता है.।
….

ये कहानी...
हर छोटे और मध्यम किसान की ज़िन्दगी में हर साल दोहराई जाती है।।
…..

हम ये नहीं कहते
कि हर बार फसल के
सही दाम नहीं मिलते,

लेकिन...
जब भी कभी दाम बढ़ें, मीडिया वाले कैमरा ले के मंडी पहुच जाते हैं और खबर को दिन में दस दस बार दिखाते हैं.।।

कैमरे के सामने शहरी महिलायें हाथ में बास्केट ले कर अपना मेकअप ठीक करती मुस्कराती हुई कहती हैं...
सब्जी के दाम बहुत बढ़ गये हैं हमारी रसोई का बजट ही बिगड़ गया.।।
………

कभी अपने बास्केट को कोने में रख कर किसी खेत में जा कर किसान की हालत तो देखिये.।

वो किस तरह
फसल को पानी देता है.।।

25 लीटर दवाई से भरी हुई टंकी पीठ पर लाद कर छिङ़काव करता है||

20 किलो खाद की
तगाड़ी उठा कर खेतों में घूम-घूम कर फसल को खाद देता है.||

अघोषित बिजली कटौती के चलते रात-रात भर बिजली चालू होने के इन्तज़ार में जागता है.||

चिलचिलाती धूप में
सिर का पसीना पैर तक बहाता है.|

ज़हरीले जन्तुओं 
का डर होते भी
खेतों में नंगे पैर घूमता है.||
……

जिस दिन
ये वास्तविकता
आप अपनी आँखों से
देख लेंगे, उस दिन आपके
किचन में रखी हुई सब्ज़ी, प्याज़, गेहूँ, चावल, दाल, फल, मसाले, दूध
सब सस्ते लगने लगेंगे.||

Please Send to your all groups

तभी तो आप भी एक मज़दूर और किसान का दर्द समझ  सकेंगे।।

अगर आगे नहीं भेज सकते तो वापस मुझे भेज देना।
*मैं भी किसान का बेटा हुँ*😌😌😌😌😌😌

"*जय जवान जय किसान*"

Please Vote

UP में बणियों का BJP को मिला समर्थन।

👇👇👇👇👇👇

जब हर कोई अपनी बिरादरी वाली पार्टी को वोट दे रहा है..... तो हम क्यों अपनी पार्टी से अलग रहें........

- वाह! भाजपा बनियों की पार्टी है वाह !
"हाँ हाँ क्यों नहीं है भाजपा बनियों की पार्टी !
भाजपा हमारा आधार कार्ड है ..... हमारी UID है ..... हमारा TIN है ..... हमारा PAN है ..... हमारा राशन कार्ड है ...... हमारी वोटर ID है ..... हमारी  E-mail ID है ..... हमारा व्हाट्स अप नंबर है .... हमारी  फेसबुक ID है ...... हमारा ट्वीटर एकाउंट है ......  हमारा पासपोर्ट है ..... हमारा पासवर्ड है भाजपा..... हमारी मूँछों का एंगल है..... हमारी फेसकट है .... हमारा सामाजिक स्तर है ...... हमारा गोत्र है .... हमारी जींस है  

क्या पहचान है हमारी भाजपा से अलग ? सोचो जब भाजपा प्रत्याशी हारेगा तो कौन कौन नहीं हमारे सामने व्यंग्य के बुझे तीर छोड़ेगा ..... कौन सपाई बसपाई कोंगी हमको नहीं चिढ़ाएगा..... बोलो तब किस किसके सामने कहोगे कि हमने अपना गोत्र बदल लिया .... भाजपा को वोट नहीं दिया ..... कौन विश्वास करेगा !

बोलो क्या भाजपा के राज्य मैं किसी नौकरशाह के सामने या सरकारी ऑफिस मैं केवल हमारा सरनेम ही काफी नहीं होता क्या अपना भाजपाई होने का परिचय देने के लिए ! 

और भाजपा किसी मोदी जेटली या अमित शाह की पैतृक संपत्ती है ..... क्या पार्टी के केंडीडेट से हमार वर्षों का साथ नहीं है ..... प्रादेशिक नेताओं से क्या बैर …… और वैसे भी  आज देश के PM और सबसे बड़ी पार्टी के शीर्ष पद पर दो दो जगह बनिए हैं ये क्या काफी नहीं अपना माथा ऊंचा रखने के लिए ..... ठीक है हमने मोदी जी को बनिया समझ के वोट नहीं दिया ना ही देते हैं ..... लेकिन क्या संयोगवश मिले गौरव को यूं ही ठुकरा दोगे ! बोलो किसी भी दूसरी पार्टी ने बनियों को इस गौरव के आसपास भी फटकने दिया है क्या ?

यार छोड़ो अब गुस्सा त्यागो ! पहले 11 मार्च के रिजल्ट के एहसास की कल्पना करो और लग जाओ जोश से ..... यहाँ यूपी मैं मोदी जेटली कहीं नहीं आ रहे राज्य करने को ..... जो भी आयेगा वो भी अपना भविष्य और पार्टी का भूत देख कर ही चलेगा ..... पार्टी के भूत भी हम थे वर्तमान भी और पीढ़ियों दर पीढ़ी भविष्य भी हम रहेंगे .... इस गौरव को जाया मत करो।

Please Vote

नमस्कार साथियों ।

भारत के संविधान ने भारत के सभी नागरिकों को अपने विचारो की अभिवयक्ति का पूरा अधिकार दिया हुआ है ।

इसीलिए अगर आप मौलवियों, औवैसियों और फादरों के मूर्खतापूर्ण बयानों से परेशान हैं तो उनके खिलाफ खूब लिखिए ।

अगर आप भारत से दंगे फसाद, भेदभाव, फ़र्ज़ी मुठभेड़ और साजिशें खत्म करना चाहते हैं ।

तो आप पुलिस, सीबीआई, CID, ख़ुफ़िया विभाग, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में हिंदुओं के लिए 90 % आरक्षण का माहौल बनाइये ।

अगर आप गाँधीजी और इंदिरा जी-राजीव जी की मौत का बदला लेना चाहते हैं, तो कांग्रेस और वामपंथियों के खिलाफ माहौल बनाते रहिये ।

क्योंकि भारत अब संविधान के अनुसार चलता है, अंग्रेजों का जमाना चला गया ।

इसीलिए अपने अधिकारों का इस्तेमाल करके भारत से नेहरुवाद और साम्यवाद का खात्मा करिये ।

डी के सन्त
9868208249
9717062872

Saturday, 4 February 2017

Truth of Shiv Lingam

🙏शिव के लिंग को गुप्तांग समझने वाले तू पढ़।
जाने शिवलिंग का वास्तविक अर्थ क्या है और कैसे इसका गलत अर्थ निकालकर हिन्दुओं को भ्रमित किया गया

कुछ लोग शिवलिंग की पूजा की आलोचना करते है..
छोटे छोटे बच्चो को बताते है कि हिन्दू लोग लिंग और योनी की पूजा करते है..मूर्खों को संस्कृत का ज्ञान नहीं होता है..और छोटे छोटे बच्चो को हिन्दुओ के प्रति नफ़रत पैदा करके उनको आतंकी बना देते है…इसका अर्थ जाने

लिंग=
लिंग का अर्थ संस्कृत में चिन्ह, प्रतीक होता है…
जबकी जनर्नेद्रीय को संस्कृत मे शिशिन कहा जाता है..

शिवलिंग=
>शिवलिंग का अर्थ हुआ शिव का प्रतीक….
>पुरुषलिंग का अर्थ हुआ पुरुष का प्रतीक इसी प्रकार स्त्रीलिंग का अर्थ हुआ स्त्री का प्रतीक और नपुंसकलिंग का अर्थ हुआ ....नपुंसक का प्रतीक —
अब यदि जो लोग पुरुष लिंग को मनुष्य के जनेन्द्रिय समझ कर आलोचना करते है..तो वे बताये "स्त्री लिंग "'के अर्थ के अनुसार स्त्री का लिंग होना चाहिए… और वो खुद अपनी औरतो के लिंग को बताये फिर आलोचना करे—

"शिवलिंग"'क्या है ?
शून्य, आकाश, अनन्त, ब्रह्माण्ड और निराकार परमपुरुष का प्रतीक होने से इसे लिंग कहा गया है। स्कन्दपुराण में कहा है कि आकाश स्वयं लिंग है।शिवलिंग वातावरण सहित घूमती धरती तथा सारे अनन्त ब्रह्माण्ड ( क्योंकि, ब्रह्माण्ड गतिमान है ) का अक्स/धुरी (axis) ही लिंग है।
शिव लिंग का अर्थ अनन्त भी होता है अर्थात जिसका कोई अन्त नहीं है नाही शुरुवात।

शिवलिंग का अर्थ लिंग या योनी नहीं होता ..दरअसल ये गलतफहमी भाषा के रूपांतरण और मलेच्छों द्वारा हमारे पुरातन धर्म ग्रंथों को नष्ट कर दिए जाने तथा अंग्रेजों द्वारा इसकी व्याख्या से उत्पन्न हुआ है।

खैर…..
जैसा कि हम सभी जानते है कि एक ही शब्द के विभिन्न भाषाओँ में अलग-अलग अर्थ निकलते हैं|
उदाहरण के लिए………
यदि हम हिंदी के एक शब्द "सूत्र" को ही ले लें तो…….
सूत्र मतलब डोरी/धागा गणितीय सूत्र कोई भाष्य अथवा लेखन भी हो सकता है। जैसे कि नासदीय सूत्र ब्रह्म सूत्र इत्यादि ।
उसी प्रकार "अर्थ" शब्द का भावार्थ : सम्पति भी हो सकता है और मतलब (मीनिंग) भी ।

ठीक बिल्कुल उसी प्रकार शिवलिंग के सन्दर्भ में लिंग शब्द से अभिप्राय चिह्न, निशानी, गुण, व्यवहार या प्रतीक है।धरती उसका पीठ या आधार है और सब अनन्त शून्य से पैदा हो उसी में लय होने के कारण इसे लिंग कहा है तथा कई अन्य नामो से भी संबोधित किया गया है जैसे : प्रकाश स्तंभ/लिंग, अग्नि स्तंभ/लिंग, उर्जा स्तंभ/लिंग, ब्रह्माण्डीय स्तंभ/लिंग (cosmic pillar/lingam)

ब्रह्माण्ड में दो ही चीजे है : ऊर्जा और प्रदार्थ। हमारा शरीर प्रदार्थ से निर्मित है और आत्मा ऊर्जा है।
इसी प्रकार शिव पदार्थ और शक्ति ऊर्जा का प्रतीक बन कर शिवलिंग कहलाते है।
ब्रह्मांड में उपस्थित समस्त ठोस तथा उर्जा शिवलिंग में निहित है. वास्तव में शिवलिंग हमारे ब्रह्मांड की आकृति है. (The universe is a sign of Shiva Lingam.)

शिवलिंग भगवान शिव और देवी शक्ति (पार्वती) का आदि-आनादी एकल रूप है तथा पुरुष और प्रकृति की समानता का प्रतिक भी अर्थात इस संसार में न केवल पुरुष का और न केवल प्रकृति (स्त्री) का वर्चस्व है अर्थात दोनों सामान है
अब बात करते है योनि शब्द पर —
मनुष्ययोनि "पशुयोनी"पेड़-पौधों की योनि"'पत्थरयोनि"'

योनि का संस्कृत में प्रादुर्भाव ,प्रकटीकरण अर्थ होता है....जीव अपने कर्म के अनुसार विभिन्न योनियों में जन्म लेता है....कुछ धर्म में पुर्जन्म की मान्यता नहीं है....इसीलिए योनि शब्द के संस्कृत अर्थ को नहीं जानते है जबकी हिंदू धर्म मे 84 लाख योनी यानी 84 लाख प्रकार के जन्म है अब तो वैज्ञानिको ने भी मान लिया है कि धरती मे 84 लाख प्रकार के जीव (पेड़, कीट,जानवर,मनुष्य आदि) है….

मनुष्य योनी =पुरुष और स्त्री दोनों को मिलाकर मनुष्य योनि होता है..अकेले स्त्री या अकेले पुरुष के लिए मनुष्य योनि शब्द का प्रयोग संस्कृत में नहीं होता है…

तो कुल मिलकर अर्थ ये है:-

लिंग का तात्पर्य प्रतीक से है, शिवलिंग का मतलब है पवित्रता का प्रतीक | दीपक की प्रतिमा बनाये जाने से इस की शुरुआत हुई, बहुत से हठ योगी दीपशिखा पर ध्यान लगाते हैं | हवा में दीपक की ज्योति टिमटिमा जाती है और स्थिर ध्यान लगाने की प्रक्रिया में अवरोध उत्पन्न करती है इसलिए दीपक की प्रतिमा स्वरूप शिवलिंग का निर्माण किया गया ताकि निर्विघ्न एकाग्र होकर ध्यान लग सके | लेकिन कुछ विकृत मुग़ल काल से कुछ दिमागों ने इस में जननागों की कल्पना कर ली और झूठी कुत्सित कहानियां बना ली और इसके पीछे के रहस्य की जानकारी न होने के कारण अनभिज्ञ भोले हिन्दुओं को भ्रमित किया गया | 

NOTE : सभी शिव-भक्तो से प्रार्थना है अगर जानकारी अच्छी लगे तो भरपूर मात्रा में इस पोस्ट को शेयर करे ताकि सभी शिव् -भक्तो को यह जानकारी मिल सके ।पुष्पेंद् सिंह राजावत।

🙏🙏HAR HAR MAHADEV🙏🙏

Friday, 3 February 2017

Morden Student

प्राचीन काल के विद्यार्थी के पाँच लक्षण-

काकचेष्टा, वको ध्यानम्, श्वाननिद्रा तथैव च
अल्पाहारी, गृहत्यागी विद्यार्थी पंच लक्षणम्

आधुनिक विद्यार्थी के पाँच लक्षण-

फिल्मचेष्टा, इश्कध्यानम्, घोरनिद्रा तथैव च
मुर्गाहारी, बोतलधारी विद्यार्थी पंच लक्षणम्  !!!!!

Monday, 30 January 2017

Sanjay Leela Bhansali

इतना शेयर करो कि आपका हर शेयर संजय लीला भंसाली के मुह पर तमाचे की तरह लगे.. पद्मावती रानी के त्याग का अल्प इतिहास बताते हुए संजय लीला भंसाली को चेतावनी -- कवि अमित शर्मा...

बॉलीवुड में भांड भरे है, नीयत सबकी काली है...
इतिहासों को बदल रहे, संजय लीला भंसाली है...

चालीस युद्ध जितने वाले को ना वीर बताया था...
संजय तुमने बाजीराव को बस आशिक़ दर्शाया था...

सहनशीलता की संजय हर बात पुरानी छोड़ चुके...
देश धर्म की खातिर हम कितनी मस्तानी छोड़ चुके...

अपराध जघन्य है तेरा, दोषी बॉलीवुड सारा है...
इसलिए 'करणी सेना' ने सेट पर जाकर मारा है...

संजय तुमको मर्द मानता, जो अजमेर भी जाते तुम...
दरगाह वाले हाजी का भी नरसंहार दिखाते तुम...

सच्चा कलमकार हूँ संजय, दर्पण तुम्हे दिखता हूँ...
जौहर पदमा रानी का, तुमको आज बताता हूँ...

सुन्दर रूप देख रानी का बैर लिया था खिलजी ने...
चित्तौड़ दुर्ग का कोना कोना घेर लिया था खिलजी ने...

मांस नोचते गिद्धों से, लड़ते वो शाकाहारी थे...
मुट्ठी भर थे राजपूत, लेकिन मुगलो पर भारी थे...

राजपूतो की देख वीरता, खिलजी उसदिन काँप गया...
लड़कर जीत नहीं सकता वो ये सच्चाई भांप गया...

राजा रतन सिंह से बोला, राजा इतना काम करो...
हिंसा में नुकसान सभी का अभी युद्ध विराम करो...

पैगाम हमारा जाकर रानी पद्मावती को बतला दो...
चेहरा विश्व सुंदरी का बस दर्पण में ही दिखला दो...

राजा ने रानी से बोला रानी मान गयी थी जी...
चित्तौड़ नहीं ढहने दूंगी ये रानी ठान गयी थी जी...

अगले दिन चित्तौड़ में खिलजी सेनापति के संग आया...
समकक्ष रूप चंद्रमा सा पद्मावती ने दिखलाया...

रूप देखकर रानी का खिलजी घायल सा लगता था...
दुष्ट दरिंदा पापी वो पागल पागल सा लगता था...

रतन सिंह थे भोले राजा उस खिलजी से   छले गए...
कैद किया खिलजी ने उनको जेलखाने में चले गए...

खिलजी ने सन्देश दिया चित्तौड़ की शान बक्श दूंगा...
मेरी रानी बन जाओ,,,,, राजा की जान बक्श दूंगा...

रानी ने सन्देश लिखा,, मैं तन मन अर्पण करती हूँ...
संग में नौ सौ दासी है और स्वयं समर्पण करती हूँ...

सभी पालकी में रानी ने बस सेना ही बिठाई थी...
सारी पालकी उस दुर्गा ने खिलजी को भिजवाई थी...

सेना भेजकर रानी ने जय जय श्री राम बोल दिया...
अग्नि कुंड तैयार किया था और साका भी खोल दिया...

मिली सुचना सारे सैनिक, मौत के घाट उतार दिए...
और दुष्ट खिलजी ने राजा रतन सिंह भी मार दिए...

मानो अग्नि कुंड की अग्नि उस दिन पानी पानी थी...
सोलह हजार नारियो के संग जलती पदमा रानी थी...

सच्चाई को दिखलाओ,,,, हम सभी सत्य स्वीकारेंगे...
झूठ दिखाओगे संजय,,, तो मुम्बई आकर मरेंगे...

जय जय श्री राम

Sunday, 29 January 2017

Important information

*DO YOU KNOW*?

1. *Your shoes are the first thing people subconsciously notice about you. Wear nice shoes.*

2. *If you sit for more than 11 hours a day, there's a 50% chance you'll die within the next 3 years.*

3. *There are at least 6 people in the world who look exactly like you. There's a 9% chance that you'll meet one of them in your lifetime.*

4. *Sleeping without a pillow reduces back pain and keeps your spine stronger.*

5. *A person's height is determined by their father, and their weight is determined by their mother.*

6. *If a part of your body "falls asleep", you can almost always "wake it up" by shaking your head.*

7. *There are three things the human brain cannot resist noticing - Food, attractive people and danger.*

8. *Right-handed people tend to chew food on their right side.*

9. *Putting dry tea bags in gym bags or smelly shoes will absorb the unpleasant odour.*

10. *According to Albert Einstein, if honey bees were to disappear from earth, humans would be dead within 4 years.*

11. *There are so many kind of apples, that if you ate a new one everyday, it would take over 20 years to try them all.*

12. *You can survive without eating for weeks, but you will only live 11 days without sleeping.*

13. *People who laugh a lot are healthier than those who don't.*

14. *Laziness and inactivity kills just as many people as smoking.*

15. *A human brain has a capacity to store 5 times as much information as Wikipedia*

16. *Our brain uses same amount power as 10-watt light bulb!!*

17. *Our body gives enough heat in 30 mins to boil 1.5 litres of water!!*

18. *Stomach acid (conc. HCl) is strong enough to dissolve razor blades!!*

19. *Take a 10-30 minute walk every day. & while you walk, SMILE. It is the ultimate antidepressant.*

20. *✋Fwd‬ this to everyone ☝on your list...a worthy information for people to be aware of.*👍

Thursday, 26 January 2017

Who is Nathuram Godse

गांधी वध क्यों एक ऐसी पुस्तक है जिससे डरकर
कांग्रेस ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया था गाँधी वध
क्यों ?
क्या थी विभाजन की पीड़ा ?
विभाजन के समय हुआ क्या क्या ?
विभाजन के लिए क्या था विभिन्न राजनैतिक
पार्टियों दृष्टिकोण ?क्या थी पीड़ा पाकिस्तान
से आये हिन्दू शरणार्थियों की ... मदन लाल पाहवा
और विष्णु करकरे की?
क्या थी गोडसे की विवशता ?
क्या गोडसे नही जानते थे की आम आदमी को मरने
में और एक राष्ट्रपिता को मरने में क्या अंतर है ?
क्या होगा परिवार का ?
कैसे कैसे कष्ट सहने पड़ेंगे परिवार और सम्बन्धियों को
और मित्रों को ?
क्या था गांधी वध का वास्तविक कारण ?
क्या हुआ 30 जनवरी की रात्री को ... पुणे के
ब्राह्मणों के साथ ?
क्या था सावरकर और हिन्दू महासभा का चिन्तन ?
क्या हुआ गोडसे के बाद नारायण राव आप्टे का ..
कैसी नृशंस फांसी दी गयी उन्हें l
यह लेख पढने के बाद कृपया बताएं कैसे उतारेगा
भारतीय जनमानस पंडित नाथूराम गोडसे जी का
कर्ज....
आइये इन सब सवालों के उत्तर खोजें ....
पाकिस्तान से दिल्ली की तरफ जो रेलगाड़िया आ
रही थी, उनमे हिन्दू इस प्रकार बैठे थे जैसे माल की
बोरिया एक के ऊपर एक रची जाती हैं.अन्दर
ज्यादातर मरे हुए ही थे, गला कटे हुए lरेलगाड़ी के
छप्पर पर बहुत से लोग बैठे हुए थे, डिब्बों के अन्दर
सिर्फ सांस लेने भर की जगह बाकी थी l
बैलगाड़िया ट्रक्स हिन्दुओं से भरे हुए थे, रेलगाड़ियों
पर लिखा हुआ था,," आज़ादी का तोहफा "
रेलगाड़ी में जो लाशें भरी हुई थी उनकी हालत कुछ
ऐसी थी की उनको उठाना मुश्किल था, दिल्ली
पुलिस को फावड़ें में उन लाशों को भरकर उठाना
पड़ा l ट्रक में भरकर किसी निर्जन स्थान पर ले
जाकर, उन पर पेट्रोल के फवारे मारकर उन लाशों को
जलाना पड़ा इतनी विकट हालत थी उन मृतदेहों
की... भयानक बदबू......
सियालकोट से खबरे आ रही थी की वहां से हिन्दुओं
को निकाला जा रहा हैं, उनके घर, उनकी खेती,
पैसा-अडका, सोना-चाँदी, बर्तन सब मुसलमानों ने
अपने कब्जे में ले लिए थे l मुस्लिम लीग ने सिवाय
कपड़ों के कुछ भी ले जाने पर रोक लगा दी थी.
किसी भी गाडी पर हल्ला करके हाथ को लगे उतनी
महिलाओं- बच्चियों को भगाया गया.बलात्कार
किये बिना एक भी हिन्दू स्त्री वहां से वापस नहीं
आ सकती थी ... बलात्कार किये बिना.....?
जो स्त्रियाँ वहां से जिन्दा वापस आई वो अपनी
वैद्यकीय जांच करवाने से डर रही थी....
डॉक्टर ने पूछा क्यों ???
उन महिलाओं ने जवाब दिया... हम आपको क्या
बताये हमें क्या हुआ हैं ?
हमपर कितने लोगों ने बलात्कार किये हैं हमें भी पता
नहीं हैं...उनके सारे शारीर पर चाकुओं के घाव थे.
"आज़ादी का तोहफा"
जिन स्थानों से लोगों ने जाने से मना कर दिया, उन
स्थानों पर हिन्दू स्त्रियों की नग्न यात्राएं (धिंड)
निकाली गयीं, बाज़ार सजाकर उनकी बोलियाँ
लगायी गयीं और उनको दासियों की तरह खरीदा
बेचा गया l
1947 के बाद दिल्ली में 400000 हिन्दू निर्वासित
आये, और इन हिन्दुओं को जिस हाल में यहाँ आना
पड़ा था, उसके बावजूद पाकिस्तान को पचपन करोड़
रुपये देने ही चाहिए ऐसा महात्मा जी का आग्रह
था...क्योकि एक तिहाई भारत के तुकडे हुए हैं तो
भारत के खजाने का एक तिहाई हिस्सा
पाकिस्तान को मिलना चाहिए था l
विधि मंडल ने विरोध किया, पैसा नहीं देगे....और
फिर बिरला भवन के पटांगन में महात्मा जी अनशन
पर बैठ गए.....पैसे दो, नहीं तो मैं मर जाउगा....एक
तरफ अपने मुहँ से ये कहने वाले महात्मा जी, की
हिंसा उनको पसंद नहीं हैं l
दूसरी तरफ जो हिंसा कर रहे थे उनके लिए अनशन पर
बैठ गए... क्या यह हिंसा नहीं थी .. अहिंसक
आतंकवाद की आड़ में
दिल्ली में हिन्दू निर्वासितों के रहने की कोई
व्यवस्था नहीं थी, इससे ज्यादा बुरी बात ये थी की
दिल्ली में खाली पड़ी मस्जिदों में हिन्दुओं ने शरण
ली तब बिरला भवन से महात्मा जी ने भाषण में कहा
की दिल्ली पुलिस को मेरा आदेश हैं मस्जिद जैसी
चीजों पर हिन्दुओं का कोई ताबा नहीं रहना
चाहिए l निर्वासितों को बाहर निकालकर
मस्जिदे खाली करे..क्योंकि महात्मा जी की दृष्टी
में जान सिर्फ मुसलमानों में थी हिन्दुओं में नहीं...
जनवरी की कडकडाती ठंडी में हिन्दू महिलाओं और
छोटे छोटे बच्चों को हाथ पकड़कर पुलिस ने मस्जिद
के बाहर निकाला, गटर के किनारे रहो लेकिन छत के
निचे नहीं l क्योकि... तुम हिन्दू हो....
4000000 हिन्दू भारत में आये थे,ये सोचकर की ये
भारत हमारा हैं....ये सब निर्वासित गांधीजी से
मिलाने बिरला भवन जाते थे तब गांधीजी माइक पर
से कहते थे क्यों आये यहाँ अपने घर जायदाद बेचकर,
वहीँ पर अहिंसात्मक प्रतिकार करके क्यों नहीं
रहे ??
यही अपराध हुआ तुमसे अभी भी वही वापस
जाओ..और ये महात्मा किस आशा पर पाकिस्तान
को पचपन करोड़ रुपये देने निकले थे ?
कैसा होगा वो मोहनदास करमचन्द गाजी उर्फ़
गंधासुर ... कितना महान ...
जिसने बिना तलवार उठाये ... 35 लाख हिन्दुओं का
नरसंहार करवाया
2 करोड़ से ज्यादा हिन्दुओं का इस्लाम में धर्मांतरण
हुआऔर उसके बाद यह संख्या 10 करोड़ भी पहुंची l
10 लाख से ज्यादा हिन्दू नारियों को खरीदा
बेचा गया l
20 लाख से ज्यादा हिन्दू नारियों को जबरन
मुस्लिम बना कर अपने घरों में रखा गया, तरह तरह की
शारीरिक और मानसिक यातनाओं के बाद ऐसे बहुत
से प्रश्न, वास्तविकताएं और सत्य तथा तथ्य हैं जो
की 1947 के समकालीन लोगों ने अपनी आने वाली
पीढ़ियों से छुपाये, हिन्दू कहते हैं की जो हो गया
उसे भूल जाओ, नए कल की शुरुआत करो ...
परन्तु इस्लाम के लिए तो कोई कल नहीं .. कोई आज
नहीं ...वहां तो दार-उल-हर्ब को दार-उल-इस्लाम में
बदलने का ही लक्ष्य है पल.. प्रति पल
विभाजन के बाद एक और विभाजन का षड्यंत्र ...
=========================
आपने बहुत से देशों में से नए देशों का निर्माण देखा
होगा, U S S R टूटने के बाद बहुत से नए देश बने, जैसे
ताजिकिस्तान, कजाकिस्तान आदि ... परन्तु यह
सब देश जो बने वो एक परिभाषित अविभाजित
सीमा के अंदर बने l
और जब भारत का विभाजन हुआ .. तो क्या कारण
थे की पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान
बनाए गए... क्यों नही एक ही पाकिस्तान बनाया
गया... या तो पश्चिम में बना लेते या फिर पूर्व में l
परन्तु ऐसा नही हुआ .... यहाँ पर उल्लेखनीय है की
मोहनदास करमचन्द ने तो यहाँ तक कहा था की पूरा
पंजाब पाकिस्तान में जाना चाहिए, बहुत कम
लोगों को ज्ञात है की 1947 के समय में पंजाब की
सीमा दिल्ली के नजफगढ़ क्षेत्र तक होती थी ...
यानी की पाकिस्तान का बोर्डर दिल्ली के साथ
होना तय था ... मोहनदास करमचन्द के अनुसार l
नवम्बर 1968 में पंजाब में से दो नये राज्यों का उदय
हुआ .. हिमाचल प्रदेश और हरियाणा l
पाकिस्तान जैसा मुस्लिम राष्ट्र पाने के बाद भी
जिन्ना और मुस्लिम लीग चैन से नहीं बैठे ...
उन्होंने फिर से मांग की ... की हमको पश्चिमी
पाकिस्तान से पूर्वी पाकिस्तान जाने में बहुत
समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं l
1. पानी के रास्ते बहुत लम्बा सफर हो जाता है
क्योंकि श्री लंका के रस्ते से घूम कर जाना पड़ता है l
2. और हवाई जहाज से यात्राएं करने में अभी
पाकिस्तान के मुसलमान सक्षम नही हैं l इसलिए ....
कुछ मांगें रखी गयीं 1. इसलिए हमको भारत के
बीचो बीच एक Corridor बना कर दिया जाए....
2. जो लाहोर से ढाका तक जाता हो ... (NH - 1)
3. जो दिल्ली के पास से जाता हो ...
4. जिसकी चौड़ाई कम से कम 10 मील की हो ...
(10 Miles = 16 KM)
5. इस पूरे Corridor में केवल मुस्लिम लोग ही रहेंगे l
30 जनवरी को गांधी वध यदि न होता, तो
तत्कालीन परिस्थितियों में बच्चा बच्चा यह
जानता था की यदि मोहनदास करमचन्द 3 फरवरी,
1948 को पाकिस्तान पहुँच गया तो इस मांग को
भी ...मान लिया जायेगा l
तात्कालिक परिस्थितियों के अनुसार तो
मोहनदास करमचन्द किसी की बात सुनने की
स्थिति में था न ही समझने में ...और समय भी नहीं
था जिसके कारण हुतात्मा नाथूराम गोडसे जी को
गांधी वध जैसा अत्यधिक साहसी और शौर्यतापूर्ण
निर्णय लेना पडा l
हुतात्मा का अर्थ होता है जिस आत्मा ने अपने
प्राणों की आहुति दी हो .... जिसको की
वीरगति को प्राप्त होना भी कहा जाता है l
यहाँ यह सार्थक चर्चा का विषय होना चाहिए की
हुतात्मा पंडित नाथूराम गोडसे जीने क्या एक बार
भी नहीं सोचा होगा की वो क्या करने जा रहे हैं ?
किसके लिए ये सब कुछ कर रहे हैं ?
उनके इस निर्णय से उनके घर, परिवार, सम्बन्धियों,
उनकी जाती और उनसे जुड़े संगठनो पर क्या असर
पड़ेगा ?
घर परिवार का तो जो हुआ सो हुआ .... जाने कितने
जघन्य प्रकारों से समस्त परिवार और सम्बन्धियों
को प्रताड़ित किया गया l
परन्तु ..... अहिंसा का पाठ पढ़ाने वाले मोहनदास
करमचन्द के कुछ अहिंसक आतंकवादियों ने 30 जनवरी,
1948 की रात को ही पुणे में 6000 ब्राह्मणों को चुन
चुन कर घर से निकाल निकाल कर जिन्दा जलाया l
10000 से ज्यादा ब्राह्मणों के घर और दुकानें जलाए
गए l
सोचने का विषय यह है की उस समय संचार माध्यम
इतने उच्च कोटि के नहीं थे, विकसित नही थे ... फिर
कैसे 3 घंटे के अंदर अंदर इतना सुनियोजित तरीके से
इतना बड़ा नरसंहार कर दिया गया ....
सवाल उठता है की ... क्या उन अहिंसक
आतंकवादियों को पहले से यह ज्ञात था की गांधी
वध होने वाला है ?
जस्टिस खोसला जिन्होंने गांधी वध से सम्बन्धित
केस की पूरी सुनवाई की... 35 तारीखें पडीं l
अदालत ने निरीक्षण करवाया और पाया हुतात्मा
पनदिर नाथूराम गोडसे जी की मानसिक दशा को
तत्कालीन चिकित्सकों ने एक दम सामान्य घोषित
किया l पंडित जी ने अपना अपराध स्वीकार
किया पहली ही सुनवाई में और अगली 34 सुनवाइयों
में कुछ नहीं बोले ... सबसे आखिरी सुनवाई में पंडित
जी ने अपने शब्द कहे ""
गाँधी वध के समय न्यायमूर्ति खोसला से नाथूराम ने
अपना वक्तव्य स्वयं पढ़ कर सुनाने की अनुमति मांगी
थी और उसे यह अनुमति मिली थी | नाथूराम गोडसे
का यह न्यायालयीन वक्तव्य भारत सरकार द्वारा
प्रतिबंधित कर दिया गया था |इस प्रतिबन्ध के
विरुद्ध नाथूराम गोडसे के भाई तथा गाँधी वध के सह
अभियुक्त गोपाल गोडसे ने ६० वर्षों तक वैधानिक
लडाई लड़ी और उसके फलस्वरूप सर्वोच्च न्यायलय ने
इस प्रतिबन्ध को हटा लिया तथा उस वक्तव्य के
प्रकाशन की अनुमति दे दी। नाथूराम गोडसे ने
न्यायलय के समक्ष गाँधी वध के जो १५० कारण
बताये थे उनमें से प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं
1. अमृतसर के जलियाँवाला बाग़ गोली काण्ड
(1919) से समस्त देशवासी आक्रोश में थे तथा चाहते
थे कि इस नरसंहार के खलनायक जनरल डायर पर
अभियोग चलाया जाए। गान्धी ने भारतवासियों
के इस आग्रह को समर्थन देने से मना कर दिया।--
2. भगत सिंह व उसके साथियों के मृत्युदण्ड के निर्णय
से सारा देश क्षुब्ध था व गान्धी की ओर देख रहा
था कि वह हस्तक्षेप कर इन देशभक्तों को मृत्यु से
बचाएं, किन्तु गान्धी ने भगत सिंह की हिंसा को
अनुचित ठहराते हुए जनसामान्य की इस माँग को
अस्वीकार कर दिया। क्या आश्चर्य कि आज भी
भगत सिंह वे अन्य क्रान्तिकारियों को आतंकवादी
कहा जाता है।--
3. 6 मई 1946 को समाजवादी कार्यकर्ताओं को
अपने सम्बोधन में गान्धी ने मुस्लिम लीग की हिंसा
के समक्ष अपनी आहुति देने की प्रेरणा दी।-
4.मोहम्मद अली जिन्ना आदि राष्ट्रवादी मुस्लिम
नेताओं के विरोध को अनदेखा करते हुए 1921 में
गान्धी ने खिलाफ़त आन्दोलन को समर्थन देने की
घोषणा की। तो भी केरल के मोपला में मुसलमानों
द्वारा वहाँ के हिन्दुओं की मारकाट की जिसमें
लगभग 1500 हिन्दु मारे गए व 2000 से अधिक को
मुसलमान बना लिया गया। गान्धी ने इस हिंसा का
विरोध नहीं किया, वरन् खुदा के बहादुर बन्दों की
बहादुरी के रूप में वर्णन किया।--
5.1926 में आर्य समाज द्वारा चलाए गए शुद्धि
आन्दोलन में लगे स्वामी श्रद्धानन्द जी की हत्या
अब्दुल रशीद नामक एक मुस्लिम युवक ने कर दी,
इसकी प्रतिक्रियास्वरूप गान्धी ने अब्दुल रशीद को
अपना भाई कह कर उसके इस कृत्य को उचित ठहराया
व शुद्धि आन्दोलन को अनर्गल राष्ट्र-विरोधी तथा
हिन्दु-मुस्लिम एकता के लिए अहितकारी घोषित
किया।-
6.गान्धी ने अनेक अवसरों पर छत्रपति शिवाजी,
महाराणा प्रताप व गुरू गोविन्द सिंह जी को
पथभ्रष्ट देशभक्त कहा।--
7.गान्धी ने जहाँ एक ओर काश्मीर के हिन्दु राजा
हरि सिंह को काश्मीर मुस्लिम बहुल होने से शासन
छोड़ने व काशी जाकर प्रायश्चित करने का परामर्श
दिया, वहीं दूसरी ओर हैदराबाद के निज़ाम के शासन
का हिन्दु बहुल हैदराबाद में समर्थन किया।--
8. यह गान्धी ही था जिसने मोहम्मद अली जिन्ना
को कायदे-आज़म की उपाधि दी।-
9. कॉंग्रेस के ध्वज निर्धारण के लिए बनी समिति
(1931) ने सर्वसम्मति से चरखा अंकित भगवा वस्त्र पर
निर्णय लिया किन्तु गाँधी कि जिद के कारण उसे
तिरंगा कर दिया गया।-
10. कॉंग्रेस के त्रिपुरा अधिवेशन में नेताजी सुभाष
चन्द्र बोस को बहुमत से कॉंग्रेस अध्यक्ष चुन लिया
गया किन्तु गान्धी पट्टभि सीतारमय्या का समर्थन
कर रहा था, अत: सुभाष बाबू ने निरन्तर विरोध व
असहयोग के कारण पदत्याग कर दिया।-
11. लाहोर कॉंग्रेस में वल्लभभाई पटेल का बहुमत से
चुनाव सम्पन्न हुआ किन्तु गान्धी की जिद के कारण
यह पद जवाहरलाल नेहरु को दिया गया।-
12. 14-15 जून, 1947 को दिल्ली में आयोजित
अखिल भारतीय कॉंग्रेस समिति की बैठक में भारत
विभाजन का प्रस्ताव अस्वीकृत होने वाला था,
किन्तु गान्धी ने वहाँ पहुंच प्रस्ताव का समर्थन
करवाया। यह भी तब जबकि उन्होंने स्वयं ही यह
कहा था कि देश का विभाजन उनकी लाश पर
होगा।-
13. मोहम्मद अली जिन्ना ने गान्धी से विभाजन के
समय हिन्दु मुस्लिम जनसँख्या की सम्पूर्ण अदला
बदली का आग्रह किया था जिसे गान्धी ने
अस्वीकार कर दिया।--
14. जवाहरलाल की अध्यक्षता में मन्त्रीमण्डल ने
सोमनाथ मन्दिर का सरकारी व्यय पर पुनर्निर्माण
का प्रस्ताव पारित किया, किन्तु गान्धी जो कि
मन्त्रीमण्डल के सदस्य भी नहीं थे ने सोमनाथ मन्दिर
पर सरकारी व्यय के प्रस्ताव को निरस्त करवाया
और 13 जनवरी 1948 को आमरण अनशन के माध्यम से
सरकार पर दिल्ली की मस्जिदों का सरकारी खर्चे
से पुनर्निर्माण कराने के लिए दबाव डाला।-
15. पाकिस्तान से आए विस्थापित हिन्दुओं ने
दिल्ली की खाली मस्जिदों में जब अस्थाई शरण
ली तो गान्धी ने उन उजड़े हिन्दुओं को जिनमें वृद्ध,
स्त्रियाँ व बालक अधिक थे मस्जिदों से से खदेड़
बाहर ठिठुरते शीत में रात बिताने पर मजबूर किया
गया।-
16. 22 अक्तूबर 1947 को पाकिस्तान ने काश्मीर पर
आक्रमण कर दिया, उससे पूर्व माउँटबैटन ने भारत
सरकार से पाकिस्तान सरकार को 55 करोड़ रुपए की
राशि देने का परामर्श दिया था। केन्द्रीय
मन्त्रीमण्डल ने आक्रमण के दृष्टिगत यह राशि देने को
टालने का निर्णय लिया किन्तु गान्धी ने उसी समय
यह राशि तुरन्त दिलवाने के लिए आमरण अनशन
किया- फलस्वरूप यह राशि पाकिस्तान को भारत
के हितों के विपरीत दे दी गयी।
उपरोक्त परिस्थितियों में नथूराम गोडसे नामक एक
देशभक्त सच्चे भारतीय युवक ने गान्धी का वध कर
दिया।
न्य़यालय में चले अभियोग के परिणामस्वरूप गोडसे
को मृत्युदण्ड मिला किन्तु गोडसे ने न्यायालय में
अपने कृत्य का जो स्पष्टीकरण दिया उससे
प्रभावित होकर उस अभियोग के न्यायधीश श्री जे.
डी. खोसला ने अपनी एक पुस्तक में लिखा-
"नथूराम का अभिभाषण दर्शकों के लिए एक
आकर्षक दृश्य था। खचाखच भरा न्यायालय इतना
भावाकुल हुआ कि लोगों की आहें और सिसकियाँ
सुनने में आती थींऔर उनके गीले नेत्र और गिरने वाले
आँसू दृष्टिगोचर होते थे। न्यायालय में उपस्थित उन
प्रेक्षकों को यदि न्यायदान का कार्य सौंपा
जाता तो मुझे तनिक भी संदेह नहीं कि उन्होंने
अधिकाधिक सँख्या में यह घोषित किया होता
कि नथूराम निर्दोष है।"
तो भी नथूराम ने भारतीय न्यायव्यवस्था के अनुसार
एक व्यक्ति की हत्या के अपराध का दण्ड मृत्युदण्ड
के रूप में सहज ही स्वीकार किया। परन्तु भारतमाता
के विरुद्ध जो अपराध गान्धी ने किए, उनका दण्ड
भारतमाता व उसकी सन्तानों को भुगतना पड़ रहा
है। यह स्थिति कब बदलेगी?
प्रश्न यह भी उठता है की पंडित नाथूराम गोडसे जी
ने तो गाँधी वध किया उन्हें पैशाचिक कानूनों के
द्वारा मृत्यु दंड दिया गया परन्तु नाना जी आप्टे ने
तो गोली नहीं मारी थी ... उन्हें क्यों मृत्युदंड
दिया गया ?
नाथूराम गोडसे को सह अभियुक्त नाना आप्टे के
साथ १५ नवम्बर १९४९ को पंजाब के अम्बाला की
जेल में मृत्यु दंड दे दिया गया। उन्होंने अपने अंतिम
शब्दों में कहा था...
यदि अपने देश के प्रति भक्तिभाव रखना कोई पाप
है तो मैंने वो पाप किया है और यदि यह पुन्य हिया
तो उसके द्वारा अर्जित पुन्य पद पर मैं अपना नम्र
अधिकार व्यक्त करता हूँ
– पंडित नाथूराम गोडसे
आशा है कि लोग पंडित नाथूराम को समझे व् जानें।
प्रणाम हुतात्मा को।
भारत माता की जय
"तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहें!"
*अगर आप नाथूराम गोडसे का पूरा बयान पढ़ना
चाहते है तो उनके द्वारा लिखित "गाँधी वध क्यों?"
अगर आप नाथूराम गोडसे के समर्थक है तो इस पोस्ट
को और तक भी पहुँचाए। ताकि ज्यादा से ज्यादा
लोगो तक सच्चाई पहुँचे। निश्चित ही एक दिन सत्य
की विजय होगी।🚩🚩🚩🚩