Saturday, 23 May 2015

दयालुता की कोई कीमत नहीं होती -

दयालुता की कोई कीमत नहीं होती  -
एक बार छोटा लड़का अपने स्कूल की फीस जुटाने हेतु घर-घर जाकर सामान बेचता था। आज उसके सामान की कुछ ख़ास बिक्री भी नहीं हुई थी और खाने को कुछ खरीदने के लिए पैसे भी नहीं थे। इसलिए उसने तय किया की अगले जिस भी घर का दरवाज़ा वो खटखटाएगा वहां कुछ खाने को मांग लेगा। ये सोचते हुए उसने दस्तक दी पर एक सुन्दर और सभ्य महिला को जब सामने पाया तो संकोचवश सिर्फ पीने का पानी ही मांग पाया।
परन्तु महिला ने बच्चे के कमजोर चेहरे से भाव पढ़ लिए थे और वह पानी के स्थान पर बड़े गिलास में भरकर दूध लायी।
बच्चे ने बड़े ही शांति से दूध पिया और धीमे स्वर में महिला से पूछा की उसे दूध के लिए कितने पैसे देने होंगे।
महिला मुस्कुराई और बच्चे के सर पर हाथ रखते हुए बोली, "दयालुता की कोई कीमत नहीं होती।" बच्चे ने धन्यवाद किया और आगे चल दिया। अब वह अपने अंदर एक शक्ति महसूस कर रहा था, जो शायद सिर्फ दूध की नहीं अपितु इंसानियत में विश्वास की भी थी।
सालों बीत गए और महिला बूढी हो चली थी और उसे एक विचित्र सी बीमारी ने घेर लिया, जिसके इलाज़ के लिए उसे बड़े शहर के बड़े हस्पताल में भेज दिया गया।
जब डाक्टर उसे देखने आया तो उसकी हालत देखते ही उसने ठान लिया की चाहे जो भी हो वह उसे ठीक करके ही चैन लेगा।

कई हफ्तों की मेहनत के बाद महिला की जान बचा ली गयी और वह स्वस्थ हो गयी। हस्पताल से छुट्टी के समय उसे बस एक ही चिंता थी कि शायद इलाज़ का बिल चुकाते हुए उसकी पूरी उम्र निकल जाएगी या फिर उसे अपना सब कुछ बेच देना होगा।
इसी चिंता में धीरे-धीरे छोटे कदमों से वह बिल का ब्यौरा लेने पहुंची। वहां उसे बिल थम दिया गया जिसका भुगतान हो चुका था और नीचे लिखा था,
एक गिलास दूध के द्वारा भुगतान कर दिया गया है। पर "दयालुता की कोई कीमत नहीं होती।"

आज महिला भी कुछ वैसी ही शक्ति अपने बूढ़े शरीर में महसूस कर रही थी जो शायद सिर्फ इलाज़ से नहीं मिली थी अपितु इंसानियत मे�

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