Wednesday, 13 May 2015

महाभारत का युद्ध रोकने के अंतिम प्रयास हेतू स्वयं श्री कृष्ण शांती प्रस्ताव लेकर ह्स्तीनापुर पहूँचे..


महाभारत का युद्ध रोकने के अंतिम प्रयास हेतू स्वयं श्री कृष्ण शांती प्रस्ताव लेकर ह्स्तीनापुर पहूँचे..

कुटिल शकूनी ने कृष्ण को भोजन पर आमंत्रीत करने की योजना बनाई..
स्वयं दुर्योधन ने उनको निमंत्रण दिया..
कृष्ण तो फिर कृष्ण है..
निमंत्र्णअस्वीकार कर दिया और जा पहूँचे विदूर के घर..
विदुरानी कृष्ण पर अपार स्नेह रखती थी..
अचानक कृष्ण को देख भावुक हो गई.कृष्ण ने जब कहा की भूख लगी है तो तुरतं केले ले आई..
और बेसुधी मे गूदा तो फेक देती और छिलका खिला देती..
माधव भी बिना कुछ कहे प्रेम से खाते रहे..
बात फैली..
द्र्योधन जो कृष्ण से बैर भाव रखता था ताना मार के बोला..
केशव मैने तो छप्पन भोग बनवाये थे पर आपको तो छिलके ही पंसद आये..
माधव मुस्करा के बोले कोई किसी के यहाँ सिर्फ तीन वजह से खाता है.
1.भाव मे
2.अभाव मे
3.प्रभाव मे

भाव तुझमे है नहीं..
अभाव मुझे है नहीं और प्रभाव तेरा मै मानता नहीं..
अब तू ही बता कैसे तुम्हारा नीमंत्रण स्वीकार करता..
मै वहीं गया जहाँ मुझे जाना चाहिये था.मै भोजन नहीं भाव का भूखा हूँ और हमेशा रहूँगा.
दुर्योधन के पास कोई जवाब ना था !

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