Saturday, 9 May 2015

लडकिया कब सोच बदलेंगी???


लडकिया कब सोच बदलेंगी???

पुरुषो को सोच बदलने की नसीहत देने वाली और अर्धनग्न घूमने वाली लडकिया आखिर खुद की संकीर्ण सोच कब बदलेंगी???

अर्धनग्न घूमने वाली लडकिया पुरुषो को सोच बदलने की नसीहत दे देती है…ये कहती है की हमारा शरीर है हम कुछ भी पहने… पुरुषो को समस्या है तो आँख बंद कर ले…..लडकिया ये अक्सर कहती पायी जाती है की “पुरुष ये सोचते है की जो लड़की छोटे कपडे पहनती है वो लड़को को आगे होकर आकर्षित करने की कोशिश करती है” जबकि ऐसा कुछ नहीं है..लड़को की सोच गन्दी है

यही बात अब पुरुष भी कहना चाहते है की लडकिया भी अपनी सोच बदले…
जब कोई लड़का सीटी बजाता है या आँख मारता है तो लडकिया सोचती है कि वो उन्हें आँख मार रहा है या सिटी बजा रहा है…जबकि ऐसा कुछ नहीं होता..लड़कियो की सोच ही गन्दी होती है…

दूसरी बात ये की अगर किसी लड़की को सीटी की आवाज़ पसंद नहीं है तो वो अपने कान बंद कर ले…अगर किसी लड़की को आँख मारने वाली हरकत पसंद नहीं तो वो उस तरफ न देखे…

क्योंकी मुंह और आँख दोनों लड़के के है। वो जैसा चाहे उनका इस्तेमाल करे…कई बार लड़के रास्ते में सीटी बजाते हुए चलते है..अब इसका मतलब ये तो नहीं की वो लड़का किसी लड़की को देखकर सीटी बजा रहा है…

हम स्वतंत्र भारत के स्वतंत्र नागरिक हैं। अपनी ज़िन्दगी अपने तरीके से जीना हमारा हक़ है। क्या लड़के इसलिए सीटी न बजाये क्योंकी उनके आस पास कोई लड़की खडी है और वो सीटी की आवाज़ सुनकर भड़क जाएगी..वो ये सोचेगी की ये मुझे छेड़ रहा है… कितने ओछे मापदंड है इन लड़कियो के…

फिर तो लड़कियो को भी लड़को के सामने अर्धनग्न होकर नहीं घूमना चाहिए वर्ना लड़के भी यही सोचेंगे की लड़की उन्हें छेड़ रही है…

कई लड़के अक्सर अकेले में भी सीटी बजाते है और बात बात पर आँख भी मारते है..लेकिन इसका ये मतलब कतई नहीं होता की वो लड़की छेड़ रहे है… ये तो इन स्त्री समुदाय की ओछी सोच है जिसने सीटी मारने को और आँख मारने को खुद के छेड़ने से जोड़ लिया…वरना अर्धनग्न घूमने वाली लड़कियो को ये समाज चरित्रहीन समझता है फिर भी लडकिया लोगो को कहती है कि –कपडे नहीं सोच बदलो….. उसी तरह इन संकीर्ण मानसिकता वाली लड़कियो को भी सीटी या आँख नहीं…बल्कि खुद की गन्दी सोच बदलनी चाहिए…

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