Sunday, 30 April 2017

Dont fight

😝😝😂😂
एक मुर्गी ने भारत-पाकिस्तान
के बोर्डर पर अंडा दिया...🐔
.
दोनो देशो के बीच इस बात को
लेकर झगङा हो गया
कि अंडा किसका है,😡😡

पाकिस्तानी कहते अंडा
हमारा है
तो भारतीय इस पर अपना हक
जता रहे थे...😎😎✊
.
बाद मे फैसला किया गया कि
जिस भी देश के आदमी दुसरी देश
की फौज को ज्यादा जूते मारेगा
अंडा उसी का होगा...😊😀😃
.
पहले भारतीयो की बारी आई
तो भारतीयो ने 400
पाकिस्तानी फौजियौं को जूते लगाये
😘😍☺😊
.
पाकिस्तानी बोले आपने सिर्फ
400 को किया अब हमारी
बारी है...
तो एक भारतीय जवान
बोला :-😜
.
.
"अबे ये पकड़ अंडा.... छोटी
छोटी बातों पे बहस नहीं करते। 😜😂😂😂😂😂😂

Congress politics in India

.      यदि आप "दक्षिण कोरिया"
की सीमा अवैध रूप से पार करते हैं तो,
आपको 12 वर्ष के लिये सश्रम कारागार में
डाल दिया जायेगा.... !!

         अगर आप "ईरान" की सीमा अवैध रूप से
पार करते हैं तो आपको अनिश्चितकाल तक
हिरासत में ले लिया जायेगा....!!

    अगर आप "अफ़गानिस्तान"
की सीमा अवैध रूप से पार करते हैं
तो आपको देखते ही गोली मार
दी जायेगी जायेगी....!!

    यदि आप "चीनी" सीमा अवैध रूप से पार
करते हैं तो, आपका अपहरण कर
लिया जायेगा और आप फिर
कभी नहीं मिलोगे.... !!

      यदि आप "क्यूबा" की सीमा अवैध रूप से
पार करते है तो... आपको एक राजनीतिक
षडयंत्र के जुर्म में जेल में डाल
दिया जायेगा....!!

     यदि आप "ब्रिटिश" बॉर्डर अवैध रूप से
पार करते हैं तो, आपको गिरफ्तार
किया जायेगा, मुकदमा चलेगा, जेल
भेजा जायेगा और अपने सजा पूरी करने के
बाद निर्वासित....!!
और
        यदि आप पड़ौसी देश से हैं और आप "भारतीय"
सीमा को अवैध रूप से पार करते पाए गए,
तो आपको  मिलेगा     
१ एक राशन कार्ड 
२ एक पासपोर्ट,
३ एक ड्राइवर का लाइसेंस,
४ मतदाता पहचान कार्ड,
५ क्रेडिट कार्ड,
६ सरकार रियायती किराए पर आवास,
७ ऋण एक घर खरीदने के लिए,
८ मुफ्त शिक्षा,
९  मुफ्त स्वास्थ्य देखभाल,
१० नई दिल्ली में एक लाबीस्ट,
११ एक टेलीविजन. 
१२ और विशेषज्ञ मानव अधिकार
कार्यकर्ताओं के एक समूह के साथ
धर्मनिरपेक्षता की डफली बजाने
का अधिकार.....
१३ और बाकी  आप जो कहें..... Indians
को मारने की आजादी, बंम फोङने
की आजादी।...

++++++
जन-जागरण लाना है तो पोस्ट को Share करना,

Bahubali 2

बाहुबली

 तीन घंटे की फिल्म में यदि 30 बार रोंगटे खड़े हो जाएं, तो लगता है कि निर्देशक ने फिल्म नहीं, इतिहास बनाया है। फिल्म देखते समय आदमी सोचने लगता है कि निर्देशक ने भारतीय इतिहास का कितना गहन अध्ययन किया है। अगर भव्यता की बात करें तो बाहुबली भारतीय सिनेमा की अबतक की सबसे भव्य फिल्म 'मुगलेआजम' को बहुत पीछे छोड़ देती है। तीन घंटे की फिल्म देखते समय आप तीन सेकेण्ड के लिए भी परदे से आँख नही हटा सकते।
पिछले दो साल के सबसे चर्चित सवाल "कंटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा" का उत्तर ले कर आयी फिल्म प्रारम्भ में ही दर्शक को ऐसा बांध देती है कि वह पल भर के लिए भी परदे से नजर नही हटा पाता। नायक के रणकौशल को देख कर आपके मुह से अनायास ही निकल पड़ता है- वाह! यही था हमारा इतिहास। ऐसे ही रहे होंगे समुद्रगुप्त, स्कन्दगुप्त, ऐसे ही रहे होंगे प्रताप और शिवा, ऐसा ही रहा होगा बाजीराव। एक साथ धनुष से चार चार बाण चलाते बाहुबली और देवसेना का शौर्य आपको झूमने पर विवश कर देता है। तक्षक और पुष्यमित्र की कहानियां लिखते समय मेरे दिमाग में जो अद्भुत योद्धा घूमते रहते हैं, वे इस फिल्म में साक्षात् दीखते हैं। युद्ध के समय हवा में उड़ते सैनिकों का कौशल अकल्पनीय भले लगे, पर अतार्किक नही लगते बल्कि उसे देख कर आपको पुराणों में बर्णित अद्भुत युद्धकला पर विश्वास हो जाता है।
युगों बाद भारतीय सिनेमा के परदे पर कोई संस्कृत बोलता योद्धा दिखा है। युगों बाद परदे पर अपने रक्त से रुद्राभिषेक करता योद्धा दिखा है। युगों बाद भारतीय सिनेमा में भारत दिखा है।
आपने विश्व सिनेमा में स्त्री सौंदर्य के अनेकों प्रतिमान देखे होंगे, पर आप देवसेना के रूप में अनुष्का को देखिये, मैं दावे के साथ कहती हूँ आप कह उठेंगे- ऐसा कभी नही देखा। स्त्री को सदैव भोग्य के रूप में दिखाने वाले भारतीय फिल्मोद्योग के इतिहास की यह पहली फिल्म है जिसमे स्त्री अपनी पूरी गरिमा के साथ खड़ी दिखती है। यह पहली फिल्म है जिसमे प्रेम के दृश्योँ में भी स्त्री पुरुष का खिलौना नही दिखती। यहां महेश भट्ट जैसे देह व्यपारियों द्वारा परोसा जाने वाला प्रेम नहीं, बल्कि असित कुमार मिश्र की कहानियों वाला प्रेम दिखता है। यह पहली फिल्म है जिसने एक स्त्री की गरिमा के साथ न्याय किया है। यह पहली फिल्म है जिसने एक राजकुमारी की गरिमा के साथ न्याय किया है। देवसेना को उसके गौरव और मर्यादा की रक्षा के वचन के साथ महिष्मति ले आता बाहुबली जब पानी में उतर कर अपने कंधों और बाहुओं से रास्ता बनाता है और उसके कंधों पर चल कर देवसेना नाव पर चढ़ती है, तो बाहुबली एक पूर्ण पुरुष लगता है और दर्शक को अपने पुरुष होने पर गर्व होता है। देवसेना जब पुरे गर्व के साथ महिष्मति की सत्ता से टकराती है तो उसके गर्व को देख कर गर्व होता है।
प्रभास के रूप में फिल्मोद्योग को एक ऐसा नायक मिला है जो सचमुच महानायक लगता है, और राजमौली तो भारत के सर्वश्रेष्ठ फ़िल्मकार साबित हो ही चुके। और अनुष्का, उसे यह एक फिल्म ही अबतक की सभी अभिनेत्रियों की रानी बना चुकी है।
बाहुबली में यदि कुछ कमजोर है, तो वह है संगीत। पर इसमें राजमौली का कोई दोष नहीं, फ़िल्मी दुनिया में आज कोई ऐसा संगीतकार बचा ही नहीं जो इस फिल्म लायक संगीत बना पाता। मैं सोच रही हूँ कि काश! नौशाद या रवि जी रहे होते। पर सबके बावजूद मैं इस फिल्म को 100 में 100 नम्बर दूंगी

बाहुबली सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि प्राचीन भारत की गौरव गाथा है। आपको समय निकाल कर बड़े परदे पर यह फिल्म देखनी ही चाहिए।
कंटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा, यह फिल्म देख कर जी जानिए।

Election in india

अगला लोकसभा चुनाव केवल 2 पार्टियाँ लड़ेंगी।

एक भारतीय जनता पार्टी 

जिसका चुनाव चिन्ह होगा - कमल ।

और दूसरी मोदी रोको पार्टी

जिसका चुनाव चिन्ह होगा - 
"हाथ में झाडू पकडे साईकिल पर बैठा लालटेन लटकाये पंजा हिलता हुआ हाथी ! 

😂😂😂

How to join indian army

*मर्द हो तो पढ़ना और दुसरो को भी भेजना*


```फौजी बनना कोई मजाक नहीं है ।
गाँव का कोई लड़का जब सेना का जवान बनने का सपना देखता है, तो उसकी सुबह रोज़ 4 बजे होती है ।
उठते ही वह गांव की पगडंडियों पर दौड़
लगाता है, उम्र यही कोई 16-17 साल
की होती है ।
चेहरे पर मासूमियत होती है, और कंधे पर होती है घर की ज़िम्मेदारी ।
मध्यम वर्ग का वह लड़का, जो सेना में जाने की तैयारी में दिन-रात एक कर देता है, उसके इस एक सपने से घर में बैठी जवान बहन, बूढ़ी मां और समय के साथ कमज़ोर होते पिता की ढ़ेरों
उम्मीदें ही नहीं जुड़ी होती हैं, बल्कि
जुड़ा होता है एक सच्चे हिन्दुस्तानी
होने का फ़र्ज़ ।
फ़ौजी बनना कोई मज़ाक नहीं है ।
फौज़ी इस देश की शान है, मान है, और
हमारा अभिमान है । देश सेवा के लिए
फौजी हमेशा तत्पर रहते हैं ।
इन्हें न प्रांत से मतलब है और न ही धर्म से, इन्हें तो मतलब है, बस अपने देश से ।
ऐसे इल्जाम मत लगाओ इन पर, ये सर कटा सकते हैं मगर माँ भारती के दामन पर कोई दाग नहीं लगने देंगे ।
नमन है सभी सैनिकों को ।।

कैसे विकास हो उस देश का ..?
            👇
जहां डेढ लाख सैलरी हर महीना पाने वाले सांसदो की सैलरी Income Tax Free ........ 
             👇
             और  
              👇
  24 घंटे मौत की छांव मे रहने वाले सिपाही को बीस हजार सैलरी पर भी Income Tax देना पडता है ...!

👉  सांसदो को परिवार के साथ रहते हुए भी हर साल पचास हजार Phone Call Free ....
        👇
  घर सें हजारों km दूर बैठे सैनिक को एक Call भी Free नहीं ..? 

👉  एक सांसद को फर्नीचर के लिए 75000 हजार रु
                 👇
  बार्डर पर सैनिक को ड्यूटी के दौरान बारिस से बचने के लिए टूटी हुई छप्पर ...

👉  सांसद को हर साल 34 हवाई टिकट मुफ्त ..!
                 👇
  सैनिक ड्यूटी जाते हुए भी अपने पैसे से टिकट लेता है ....!

👉  सांसद को वाहन के लिए 400000/-  का intetest Free लोन  

👉    एक सैनिक को घर के लिए लोन भी 12.55% दर से मिलता है ....

👆👆👆और ये सब वहां हो रहा है जहां पूरा देश इस सैनिक की वजह सें अपने परिवार के साथ चैन सें सोता है ..!
                     
🇮🇳  

एक बेटी ने
अपनी मां से पूछा :-

👉  मां रेडियो पे सुना ईंडिया जीत गई ..!

जो खेल रहे थे उन्हे एक करोड़
रुपिया मिला ..!
                  👇
मां बोली : –  हाँ बेटी ..!
                  👇
😊 सरकार कहती है वो देश के लिए खेल रहे थे इसलिए ..!
                👇
👉  बेटी आसमान में हैलीकॉप्टर से लटकते जवान को देख के बोली :-  
         मां क्या इन्हे भी मिलेगा एक करोड़ ..?
          👇
😊  मां बोली – ना बेटी ना ..?
            👇
हमारे यहां बल्ले से खेलने वाले को ईनाम मिलता है ..! 

  जान से खेलने वाले को नही ..!!  👈

👆👆👆👆👆
    उपरोक्त विचार यदि हृदय को स्पर्श करे तो निवेदन है इसे दूसरे ग्रुपों में अग्रेषित करें ..!```

Friday, 28 April 2017

Police condition in India

पल्लवी त्रिवेदी म.प्र. पुलिस में अपर पुलिस अधीक्षक हैं। आजकल AIG hdqrtr के पद पर हैं । उनका ये लेख पढ़ने योग्य है -



आज कुछ बातें मेरे विभाग के बारे में .... पुलिस को कोसिये ज़रूर कोसिये मगर इसे भी पढ़िए और कोसते समय दिमाग में रखिये !

1 - आपका या आम जनता का सीधा वास्ता पुलिस के सबसे निचले कर्मचारियों खासकर सिपाही और हवलदार से पड़ता है! उसमे भी सबसे ज्यादा ट्रैफिक के दौरान ! जब वो आपको रोकता है तो सबसे पहले रसीद काटने की बात करता है , वो आप है जो उसे रसीद न काटने के लिए पैसे ऑफर करते हैं ! जिसे आप दोनों ख़ुशी ख़ुशी स्वीकार करते हैं , क्योंकि इसमें दोनों को सुविधा है! अब से सिर्फ इतना करना शुरू कीजिये कि ट्रैफिक का चालान होने की नौबत आने पर ख़ुशी ख़ुशी चालान भरिये ! न किसी नेता से उस सिपाही को फोन कराइए और न उसे सौ का नोट दिखाइये !


2 - हमारा सिपाही और हवलदार चौबीस घंटे ड्यूटी करता है , उसकी कम तनख्वाह का एक हिस्सा उसकी मोटरसाइकल में पेट्रोल डलवाने में और कागजों की फोटोकॉपी कराने में जाता है , जो उसके सरकारी काम का हिस्सा हैं ! ज़ाहिर है ये पैसा वह कहाँ से प्राप्त करता होगा ! 

दिन भर वह चकरघिन्नी बना कभी जुलूस निपटाता है , कभी मंत्री जी के कार्यक्रम में खडा रहता है , कभी वारंटी पकड़ रहा होता है , कभी डॉक्टर को बमुश्किल पकड़कर शव का पोस्ट मार्टम करवा रहा होता है और कभी भागी हुई लडकी की तलाश में गाँव गाँव घूम रहा होता है और सारे गाँव वालों का विरोध झेल रहा होता है ! ( ये सारे काम एक ही दिन के हैं ) और रात को थाने पर बैठे चोर से चोरी उगलवा रहा होता है! उससे कितने मधुर व्यवहार की अपेक्षा रीजनेबल होगी , तय कर लीजिये! 

3 - वो त्यौहार मनाना नहीं जानता , कभी टीचर पेरेंट मीटिंग में भाग नहीं लेता , उसके सरकारी घर में आप एक दिन भी नहीं गुज़ार सकते! उसे नहीं मालूम होता , उसका बच्चा पढाई में कैसा है , कहीं गलत संगत में तो नहीं पड़ गया है ? उसकी तोंद निकल गयी है , उसका बी .पी . हाई है , डायबिटीज़ भी है ! उसे फुर्सत नहीं कि वह एक्सर्साइज़ या डायटिंग कर सके

हाँ , वो भ्रष्ट है क्योंकि भ्रष्टाचार हमारा राष्ट्रीय चरित्र है ! जिस प्रकार न्यायपालिका , कलेक्ट्रेट , एम् .पी .ई. बी., पी.डव्लू .डी., स्वास्थ्य सेवाएँ , नगर पालिका , हमारे नेता भ्रष्ट हैं , उसी प्रकार वो भी भ्रष्ट है! जिस दिन हमारा समाज भ्रष्टाचार मुक्त हो जाएगा , हमारी पुलिस से भी भ्रष्टाचार ख़त्म हो जायेगा! 

5 - आप विदेशों से हमारी पुलिस की तुलना करते हैं तो कुछ बातें जान लीजिये फिर तुलना कीजिये! 
a - विदेशों में पुलिस जनता की मित्र है , हमारे यहाँ बच्चे को सुलाने के लिए या उसकी शरारतों को रोकने के लिए भी पुलिस का नाम लेकर डराया जाता है ! आप जैसी पुलिस चाहते हैं , वैसी पुलिस आपके सामने हाज़िर है!

b - सारे विकसित देशों में कोई भी पुलिस कर्मचारी आठ घंटे से ज्यादा काम नहीं करता , और हमारे यहाँ छह घंटे सो ले , वही एक लक्ज़री है !

c - उन देशों में पुलिस का काम घर घर जाकर निगरानी करना नहीं है , हर व्यक्ति के घर में अपना सिक्युरिटी सिस्टम है , अलार्म बजने पर पुलिस पहुँचती है ! अपने घर की रक्षा घर का मालिक स्वयं करता है! हमारे यहाँ पंद्रह मोहल्लों पर दो पुलिस वाले हैं , जिनसे अपेक्षा है कि वे किसी घर में चोरी न होने दें!

d - जो लोग पानी पी पी कर पुलिस को कोसते हैं , वही सबसे पहले कॉन्स्टेबल या सब इंस्पेक्टर का फार्म भरते हैं !जनता की सेवा के लिए नहीं पावर और पैसे के लिए !ये हमारा समाज है ! हम और आप हैं !

e - जो भ्रष्टाचार पुलिस के बड़े अधिकारियों में है बावजूद मोटी तनख्वाह और तमाम सुविधाओं के , उसके लिए विभाग ज़िम्मेदार नहीं है ! वे जिस भी विभाग में होते ,भ्रष्ट ही होते ! 

फिर भी मान लिया कि पुलिस कोई काम नहीं करती तो क्यों न ऐसा करें कि एक दिन के लिए देश के सारे थाने बंद कर दिए जाएँ और ट्रैफिक से भी पुलिस हटा दी जाए! इस प्रयोग के बाद अगर पुलिस की आवश्यकता न हो तो विभाग ही ख़तम कर दिया जाए! 

या मेरा दूसरा सुझाव है कि हम सबको एक एक हफ्ते किसी पुलिस वाले के साथ उसकी परछाई बनकर रहना चाहिए! शायद हमारे विचार कुछ बदलें !

अंत में ,हमारे देश में जिसको जहां मौका मिलता है वहीं भ्रष्टाचार शुरू हो जाता है ! चाहे एक सीधे सादे टीचर को मध्यान्ह भोजन का प्रभारी बना दिया जाये या अस्पताल की कैंटीन का चार्ज किसी भोले भाले डॉक्टर को दे दिया जाए! यहाँ तक कि प्रायवेट कम्पनी में जॉब करने वाले भी कम बजट के होटल में ठहरकर बड़े होटल का बिल प्रस्तुत करते हैं ! 
और ऐसा भी नहीं कि गरीबो के केस सॉल्व नहीं होते ..बस उन्हें प्रकाशित करने में मीडिया की कोई रूचि नहीं होती और वे आप तक पहुँचते नहीं ! हम जानते हैं कि  कैसे एक अनजान भिखारी के अंधे क़त्ल के केस को हल करने हमारा एक हवालदार विशाखापट्नम से लेकर कन्याकुमारी  तक जाता है ! और कातिल को पकड़कर थाने लाता है ! ये जनता को कभी नहीं दिखाई देगा ! ये हमारी फाइलों में दर्ज है ! जब एक बलात्कार की शिकार चौदह साल की लड़की अपने नवजात बच्चे को गला घोंटकर मार देती है और प्रसूति वार्ड से सीधे हवालात आ जाती है तब जो सिपाही उसके लिए कम्बल खरीदकर लाया है और जो हवालदार उसके लिए जापे के बाद खाए जाने वाले लड्डू दो घंटे में अपने घर से बनवाकर लाया है , यह किसी फ़ाइल में दर्ज नहीं है !

याद रखिये कि जब आप अति सामान्यीकरण करते हुए सारे पुलिस वालों को गाली देते हैं तब मैं और मेरे जैसे मेरे कई साथी पुलिस वाले आहत होते हैं ! हम ईमानदार भी हैं , मानवीय भी और व्यावसायिक रूप से दक्ष भी ! 


और इस पर भी आपको अगर ये लगता है कि मैं पुलिस में भ्रष्टाचार और खराब व्यवहार की हिमायती हूँ तो आप सर्वथा गलत है ! आप जो देखते हैं वह तो सत्य है ही , मैं सिर्फ आपको वो दिखा रही हूँ जो आप नहीं देख पाते हैं ! इसके बाद भी हम लगातार अपने विभाग की छवि सुधारने के लिए प्रयासरत हैं !हम भी चाहते हैं कि  तमाम तनावों के बावजूद पुलिस बहुत मानवीय बने क्योंकि चाहे जितना भी गाली दीजिये पुलिस आज भी दुखियों के लिए आस की एक किरण है और ये भी जानती हूँ कि ये असंभव नहीं है ! आप कोशिश कीजिये कि समाज सुन्दर बने ! हम पुलिस को सुन्दर बनाने के लिए प्रयासरत हैं ! 
जय हिन्द

Mast joke

एक मध्य प्रदेश के पति-पत्नी की पहली रात का वार्तालाप....


पति- तुमाओ नाम का है ?
पत्नी- हमाओ नाम चम्पाकली है
पति- वैसे का कहत ?
पत्नी- वैसे सब हमें चम्पो चम्पो कहत
पति- अच्छा !
पत्नी- और तुमाओ नाओं का है ?
पति- हमाओ नाओं तौ करोडेमल है पर सब हमें घसीटे घसीटे कहत
पति- काए तुम विदा में इत्ती चिल्लाय चिल्लाय के काय रो रै हती ?
पत्नी- वो तो सब बिटियन को रोने पडत है सो हमउ रो रए हते और का 
पति- (शक के साथ)और तुम जो बेर बेर मेरो मोती मेरो मोती करके काय रो रइ हतीं ?
पत्नी- वो.....वोतो हमाये कुत्ता को नाम है
पति-बड़ो अछो तुमाओ कुत्ता जब हम कुंवर कलेऊ कर रयते तो वो हमें देख देख के भौक रओ तो ?
पत्नी- (हंसते हुए) काय ने भौंकतौ तुम वाके कटोरा में जो खा रै हते।

😜😝🤣🤣🤣🤣🤣

Modi effect

डियर कांग्रेस ,आप,सपा,बसपा, और अन्य ....

आपको बताऊं...भाजपा को हराना है तो सिर्फ ब्रांड मोदी से निपटना काफी नहीं है आपके लिए...आपको सबसे पहले तो एक आरएसएस जैसा मजबूत  नींव तैयार करना पड़ेगा..बिना स्वार्थ के काम करने वाले ऐसे समर्पित स्वयंसेवक जो आज केरल में लाल आतंक के बाद भी सबसे ज्यादा शाखाएं यानी गुजरात से भी ज्यादा शाखाएं केरल में लगातें हैं...आज जबसे आरएसएस ने अपना वेश बदला है तबसे युवाओं का आकर्षण इस कदर बढ़ रहा कि बनारस में जब रामनवमी का पथसंचलन निकला तो इस बार सारे रिकॉर्ड टूट गए..देश के बाकी हिस्सों में भी यही हाल था..
लेकिन आप ये नहीं कर पाएंगे.. बड़ी मुश्किल है..इसलिए आरएसएस को छोड़िये.. 

आपको उससे पहले एक अमित शाह पैदा करना पड़ेगा..जो आज चार राज्यों में सरकार बनाने के बाद भी चैन से नहीं बैठा है..जिसने कल अपने साढ़े तीन लाख पूर्णकालिक कार्यकर्त्ताओं को बंगाल,उड़ीसा और आंध्र में भेज दिया है कि "जाइये और संगठन का काम देखिए"....घर-घर जाइये लोगों के घर ही रात बिताइए..उनको अपनी बात समझाइये..

कल नक्सलबाड़ी गांव में अमित शाह ने अपने सबसे पुराने महिला कार्यकर्ता के घर केले के पत्ते पर जमीन पर बैठकर भोजन किया...आप सोच सकतें हैं कि इसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव किसी पार्टी के कार्यकर्ता और उसके आस-पास के माहौल पर क्या पड़ता है ?
अमित शाह ने  न सिर्फ भोजन किया बल्कि अपने बूथ कार्यकर्ता जो महज तीस की संख्या में थे..जी महज तीस.. उनको जीतने का मंत्र दिया कि ममता जी बौखला गयीं...आपने आज तक कभी अपने बूथ कार्यकर्ताओं से संवाद किया है...?

ये आप नया नहीं समझें..दिल्ली-बिहार हारने के बाद व्यापक परिवर्तन करते हुए  यूपी चुनाव के पहले भी अमित शाह ने यही सब  किया था...

आपने क्या किया ?..सिवाय मोदी को कोसने के अलावा..अरे ! आपको अभी सिर्फ आरएसएस और अमित शाह नहीं पैदा करना है बल्कि पर्दे के पीछे रहकर काम करने वाले सुनील बंसल,ओम माथुर, विनय सहस्रबुद्धे,श्याम जाजू जैसे सैकड़ों नेता पैदा करना है...जो मंच पर नहीं,टीवी चैनल में नहीं,अखबार में नहीं..सिर्फ पर्दे के पीछे रहकर पार्टी और संगठन के लिये काम करतें हैं..

और आप क्या कर रहें हैं अभी तक ?..आप तो अभी सदमें से उबर भी नहीं पाए कि इन्होंने मोदी के आलावा एक जबरदस्त टीआरपी गेनर योगी पैदा कर दिया...अब टीवी खोलिये तो दो ही लोग दिखते हैं..एक योगी और एक मोदी..आप बस अपनी खीझ और गुस्से से निकले बयानों के कारण ही टीवी पर दिखाई देतें हैं..बाकी सब गायब...

मैं पूछता हूँ कि आप और आपके नेता जी लोग चार राज्यों के चुनाव के बाद  क्या कर रहे हैं...? बस ईवीएम..ईवीएम..मोदी..मोदी..मोदी..

अरे ! भाई हिम्मत से हार स्वीकार करिये..कांग्रेस पार्टी आज तक एक ठीक-ठाक समीक्षा बैठक न कर सकी..आपके जो राष्ट्रीय नेता हैं वही राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने जा रहे हैं.वहीं आपके स्टार प्रचारक हैं..वही आपके मार्गदर्शक हैं...आपने अपनी पार्टी को प्राइवेट लिमिटेड बना दिया है...कांग्रेस मने गांधी परिवार..सपा मने अखिलेश,आप मने केजरीवाल..बसपा में बहन जी...चाटुकारों और जमीन से कटे नेताओं को आप सबने अपने  सर पर बिठाकर रखा है..औऱ जो आपसे सवाल पूछता है उसे आप निकाल बाहर करतें हैं..

मुझे भाजपा के mcd जीत जाने की खुशी नही है...न ही उनको बधाई दूँगा..क्योंकि आप लिख के रख लीजिए कहीं..वो अब कर्नाटक भी जीतेंगे और हिमांचल भी..उड़ीसा भी जीतेंगे और बंगाल भी...

मुझे इसकी खुशी नहीं...क्योंकि ये लोकतंत्र के लिए शुभ नहीं मानता मैं..कम से कम कांटे की टक्कर तो होनी ही चाहिए..जिसको देना आपके बस की बात तब तक नहीं है जब कि आपकी पार्टी प्राइवेट लिमिटेड से लोकतांत्रिक पार्टी नहीं बन जाती...

मैं आज भाजपा की सराहना बस इसलिए करूँगा  की उन्होंने अपनी जीत पर जश्न न मनाने और जीत को सुकमा शहीदों को समर्पित करने  का जो संवेदनशील फैसला किया है वो बहुत ही सराहनीय है..


बाकी युगपुरुष जी  पर इस्पेशली शाम को..)

Thursday, 27 April 2017

Sadhvi Pragya

👆👆👆
#साध्वी_प्रज्ञा   #धन्यवाद_नरेन्द्रमोदी

मित्रों कुछ साल पूर्व मैंने मुंबई हमलों की बरसी पर लिखे एक लेख मे "हेमंत करकरे" को यह लिखते हुए श्रधांजलि दी थी कि  "हेमंत करकरे जैसे कांग्रेसी दलाल को श्रद्धांजलि देने का तो मेरा कोई मन नहीं है मगर उनकी मृत्यु दुश्मन की गोलियों से हुई है अतः वो वीरगति प्राप्त हुए और उनको भी 26/11 की बरसी पर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।।"
लेकिन इस लाइन पर कई लोगों ने मेरी आलोचना की थी बहुत कुछ महान आत्मा के लोगों ने तो इसे अपने अहम का प्रश्न बना लिया था और गाली गलौज पर उतर आए मजबूरन उन्हें मुझे ब्लॉक करना पड़ा।

आज जब साध्वी प्रज्ञा रिहा हो गई है और उन्होंने अपने मुंह से हेमंत करकरे के ऊपर प्रश्न उठा दिया तो शायद उन महान आत्माओं को उत्तर मिल गया होगा और मेरी बात को प्रमाणिकता भी। हर कोई जानता है कि कांग्रेस के जमाने में जब IM द्वारा हो रहे लगातार बम विस्फोटों में मुसलमानों का नाम आया और मुस्लिम आतंकवाद की एक लहर सी चल पड़ी थी, उस समय कांग्रेस ने इस से ध्यान हटाने के लिए हिंदू आतंकवाद का कार्ड खेला... निर्दोष साधु-संतों को फर्जी केसों में फंसा कर "हिंदू आतंकवाद" शब्द को मीडिया के माध्यम से प्रचारित किया गया, जिससे कि कांग्रेस राज में हो रहे इस्लामिक आतंकवाद से ध्यान हटाया जा सके । इस संदर्भ में पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे का "सैफरन टेररिज्म" वाला बयान प्रमुखता से मीडिया में छाया रहा।

मैं राजनैतिक और घुमावदार शब्दावली उपयोग नहीं करता। हमने मोदी सरकार को वोट दिया था उस समय साध्वी प्रज्ञा ठाकुर भी एक प्रमुख मुद्दा थी और आदरणीय इंद्रेश जी ने दिल्ली में बाकायदा एक कार्यक्रम कराया था, जिसमें साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के बहनोई जो कि उनका केस लड़ रहे थे एवं कांग्रेस के समय एनआईए द्वारा अवैध रूप से उठाए गए कुछ अन्य हिंदू भाइयों की माता, पिता,बहने,पत्नियां और परिवार वाले उपस्थित थे। मैं स्वयं भी दिल्ली में हुए उस आयोजन में उपस्थित था..आज मैं बिना लाग-लपेट यह बात कर सकता हूं कि, कांग्रेस की सरकार रहती तो साध्वी प्रज्ञा ठाकुर अपनी बची हुई जिंदगी भी उसी जेल में घुट घुट के सड़के मर जाती।कांग्रेस में ऐसे ऐसे फर्जी केस साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के ऊपर लगाए थे कि मोदी सरकार आने के बाद भी 3 साल लग गए उन्हें जेल से बाहर निकालने में ...
जो लोग हिंदू हिंदू हिंदुत्व का नाम लेकर मोदी को दिन-रात कोसते रहते हैं,वह इस बात को ध्यान रखें कि यह मोदी ही है जिसके कारण साध्वी प्रज्ञा ठाकुर जेल से बाहर है और इसके लिए मैं मोदी और मोदी सरकार का कोटिशः धन्यवाद करता हूं.

अगर किसी को साध्वी प्रज्ञा ठाकुर पर होने वाले अत्याचार भूल गए हो तो उसकी एक छोटी सी बानगी आप को बता देता हूँ, हेमंत करकरे और उनके निर्देश पर एटीएस ने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को 8 दिन तक अवैध रूप से अपनी कस्टडी में रखा । एक साध्वी का भगवा वस्त्र उतार लिया गया, साध्वी के मुंह में जबरिया मांस ठूसा  गया,साध्वी को निर्वस्त्र करके चमड़े की बेल्ट से मारा गया और तो और साध्वी को तोड़ने के लिए उनको जबरिया ब्लू फिल्म दिखाई गई साध्वी के शिष्य के सामने हेमंत करकरे के निर्देश पर साध्वी को नंगा करने का आदेश दिया गया जिससे कि वो टूट जाए और एनआईए के पक्ष में हिंदू आतंकवाद वाली थियरी के पक्ष में बयान दें।

मित्रों यह कांग्रेस का असली चरित्र। छोटी-छोटी बातों पर मोदी को कोसते हैं तब हमें यह भी याद रखना चाहिए की आज आप जितना भी समेट पाए हैं उसके पीछे अगर कोई एक वजह तो मोदी है। साध्वी प्रज्ञा ठाकुर की रिहाई हमारी भावनाओं से जुड़ा हुआ मुद्दा था,हमारे अस्तित्व से जुड़ा हुआ मुद्दा था,हमारे स्वाभिमान से जुड़ा हुआ मुद्दा था और नरेंद्र मोदी जी को कोटिशः धन्यवाद जो उन्होंने एक निर्देश साध्वी को नया दिलाने की प्रक्रिया में सहयोग किया... जय श्री राम...आप सभी को बधाइयां..

आशुतोष की कलम से

Wednesday, 26 April 2017

History of India

गुलाम वंश*
1=1193 मुहम्मद  गौरी
2=1206 कुतुबुद्दीन ऐबक 
3=1210 आराम शाह
4=1211 इल्तुतमिश
5=1236 रुकनुद्दीन फिरोज शाह
6=1236 रज़िया सुल्तान
7=1240 मुईज़ुद्दीन बहराम शाह
8=1242 अल्लाउदीन मसूद शाह
9=1246 नासिरुद्दीन महमूद  
10=1266 गियासुदीन बल्बन
11=1286 कै खुशरो
12=1287 मुइज़ुदिन कैकुबाद
13=1290 शमुद्दीन कैमुर्स
1290 गुलाम वंश समाप्त्
(शासन काल-97 वर्ष लगभग )

*👉खिलजी वंश*
1=1290 जलालुदद्दीन फ़िरोज़ खिलजी 
2=1296 
अल्लाउदीन खिलजी 
4=1316 सहाबुद्दीन उमर शाह
5=1316 कुतुबुद्दीन मुबारक शाह
6=1320 नासिरुदीन खुसरो  शाह
7=1320 खिलजी वंश स्माप्त
(शासन काल-30 वर्ष लगभग )

*👉तुगलक  वंश*
1=1320 गयासुद्दीन तुगलक  प्रथम 
2=1325 मुहम्मद बिन तुगलक दूसरा   
3=1351 फ़िरोज़ शाह तुगलक 
4=1388 गयासुद्दीन तुगलक  दूसरा
5=1389 अबु बकर शाह
6=1389 मुहम्मद  तुगलक  तीसरा
7=1394 सिकंदर शाह पहला
8=1394 नासिरुदीन शाह दुसरा
9=1395 नसरत शाह
10=1399 नासिरुदीन महमद शाह दूसरा दुबारा सता पर
11=1413 दोलतशाह
1414 तुगलक  वंश समाप्त
(शासन काल-94वर्ष लगभग )

*👉सैय्यद  वंश*
1=1414 खिज्र खान
2=1421 मुइज़ुदिन मुबारक शाह दूसरा
3=1434 मुहमद शाह चौथा
4=1445 अल्लाउदीन आलम शाह
1451 सईद वंश समाप्त
(शासन काल-37वर्ष लगभग )

*👉लोदी वंश*
1=1451 बहलोल लोदी
2=1489 सिकंदर लोदी दूसरा
3=1517 इब्राहिम लोदी
1526 लोदी वंश समाप्त
(शासन काल-75 वर्ष लगभग )

*👉मुगल वंश*
1=1526 ज़ाहिरुदीन बाबर
2=1530 हुमायूं 
1539 मुगल वंश मध्यांतर

*👉सूरी वंश*
1=1539 शेर शाह सूरी
2=1545 इस्लाम शाह सूरी
3=1552 महमूद  शाह सूरी
4=1553 इब्राहिम सूरी
5=1554 फिरहुज़् शाह सूरी
6=1554 मुबारक खान सूरी
7=1555 सिकंदर सूरी
सूरी वंश समाप्त,(शासन काल-16 वर्ष लगभग )

*मुगल वंश पुनःप्रारंभ*
1=1555 हुमायू दुबारा गाद्दी पर
2=1556 जलालुदीन अकबर
3=1605 जहांगीर सलीम
4=1628 शाहजहाँ
5=1659 औरंगज़ेब
6=1707 शाह आलम पहला
7=1712 जहादर शाह
8=1713 फारूखशियर
9=1719 रईफुदु राजत
10=1719 रईफुद दौला
11=1719 नेकुशीयार
12=1719 महमूद शाह
13=1748 अहमद शाह
14=1754 आलमगीर
15=1759 शाह आलम
16=1806 अकबर शाह
17=1837 बहादुर शाह जफर
1857 मुगल वंश समाप्त
(शासन काल-315 वर्ष लगभग )

*👉ब्रिटिश राज (वाइसरॉय)*
1=1858 लॉर्ड केनिंग
2=1862 लॉर्ड जेम्स ब्रूस एल्गिन
3=1864 लॉर्ड जहॉन लोरेन्श
4=1869 लॉर्ड रिचार्ड मेयो
5=1872 लॉर्ड नोर्थबुक
6=1876 लॉर्ड एडवर्ड लुटेनलॉर्ड
7=1880 लॉर्ड ज्योर्ज रिपन
8=1884 लॉर्ड डफरिन
9=1888 लॉर्ड हन्नी लैंसडोन
10=1894 लॉर्ड विक्टर ब्रूस एल्गिन
11=1899 लॉर्ड ज्योर्ज कर्झन
12=1905 लॉर्ड गिल्बर्ट मिन्टो
13=1910 लॉर्ड चार्ल्स हार्डिंज
14=1916 लॉर्ड फ्रेडरिक सेल्मसफोर्ड
15=1921 लॉर्ड रुक्स आईजेक रिडींग
16=1926 लॉर्ड एडवर्ड इरविन
17=1931 लॉर्ड फ्रिमेन वेलिंग्दन
18=1936 लॉर्ड एलेक्जंद लिन्लिथगो
19=1943 लॉर्ड आर्किबाल्ड वेवेल
20=1947 लॉर्ड माउन्टबेटन
ब्रिटिस राज समाप्त

*🇮🇳आजाद भारत,प्राइम मिनिस्टर🇮🇳*
1=1947 जवाहरलाल नेहरू
2=1964 गुलजारीलाल नंदा
3=1964 लालबहादुर शास्त्री
4=1966 गुलजारीलाल नंदा
5=1966 इन्दिरा गांधी
6=1977 मोरारजी देसाई
7=1979 चरणसिंह
8=1980 इन्दिरा गांधी
9=1984 राजीव गांधी
10=1989 विश्वनाथ प्रतापसिंह
11=1990 चंद्रशेखर
12=1991 पी.वी.नरसिंह राव
13=अटल बिहारी वाजपेयी
14=1996 ऐच.डी.देवगौड़ा
15=1997 आई.के.गुजराल
16=1998 अटल बिहारी वाजपेयी
17=2004 डॉ.मनमोहनसिंह
*18=2014 से  नरेन्द्र मोदी*

764 सालों  बाद मुस्लिमों तथा अंग्रेज़ों के ग़ुलामी से आज़ादी मिली है। ये हिन्दुओं का देश है। यहाँ बहुसंख्यक होते हुए भी हिन्दू अपने ही देश ग़ुलाम बन के रहे और आज लोग कह रहे है। हिन्दू साम्प्रदायिक हो गए ,,,,,,,,.....
 सदियों बाद नरेन्द्र मोदी तथा  महाराज बाबा योगी आदित्यनाथ जी के रूप में हिन्दू की सरकार आयी है। सभीभारतियों को इनपर गर्व करना चाहिए।

Tuesday, 25 April 2017

Ajan

शुक्र मनाओ अभी आपकी नींद अजान से खुल रही है...

उनकी जनसंख्या 40% होने दो -नींद धमाके से न खुले तो कहना...

#कटु_सत्य

Monday, 24 April 2017

Breaking news

💥ब्रेकिंग न्यूज 
ट्रैफिक पुलिस से भिड़े राहुल गांधी 💥
कहा कि जब मोदी जी ने तीन दिन पहले ही लाल बत्ती हटाने के निर्देश दे दिये है तो फिर चौराहे पर लाल बत्ती लगाकर भोली भाली जनता को क्यू परेशान किया जा रहा है 
💥केजरीवाल ने किया समर्थन 
😂😂😂😂😂😃😃😃

फूफा पर निबन्ध लिखिए।

प्र०: *फूफा पर निबन्ध लिखिए।*
 
उत्तर: - *फूफा*:
बूआ के पति को फूफा कहते हैं।
फूफाओं का बड़ा रोना रहता है शादी ब्याह में।
किसी शादी में जब भी आप किसी ऐसे अधेड़ शख़्स को देखें जो पुराना, उधड़ती सिलाई वाला सूट पहने, मुँह बनाये, तना-तना सा घूम रहा हो। जिसके आसपास दो-तीन ऊबे हुए से लोग मनुहार की मुद्रा में हों तो बेखटके मान लीजिये कि यही बंदा दूल्हे का फूफा है !
ऐसे मांगलिक अवसर पर यदि फूफा मुँह न फुला ले तो लोग उसके फूफा होने पर ही संदेह करने लगते हैं।
अपनी हैसियत जताने का आखिरी मौका होता है यह उसके लिये और कोई भी हिंदुस्तानी फूफा इसे गँवाता नहीं !

*फूफा करता कैसे है यह सब ?*

उत्तर-----वह किसी न किसी बात पर अनमना होगा। चिड़चिड़ाएगा। तीखी बयानबाज़ी करेगा। किसी बेतुकी सी बात पर अपनी बेइज़्ज़ती होने की घोषणा करता हुआ किसी ऐसी जानी-पहचानी जगह के लिये निकल लेगा, जहाँ से उसे मनाकर वापस लाया जा सके ! 

अगला वाजिब सवाल यह है कि *फूफा ऐसा करता ही क्यों है ?*
उत्तर---दरअसल फूफा जो होता है, वह व्यतीत होता हुआ जीजा होता है। वह यह मानने को तैयार नहीं होता है कि उसके अच्छे दिन बीत चुके और उसकी सम्मान की राजगद्दी पर किसी नये छोकरे ने जीजा होकर क़ब्ज़ा जमा लिया है। फूफा, फूफा नहीं होना चाहता। वह जीजा ही बने रहना चाहता है और शादी-ब्याह जैसे नाज़ुक मौके पर उसका मुँह फुलाना, जीजा बने रहने की नाकाम कोशिश भर होती है।
    फूफा को यह ग़लतफ़हमी होती है कि उसकी नाराज़गी को बहुत गंभीरता से लिया जायेगा। पर अमूमन एेसा होता नहीं। लड़के का बाप उसे बतौर जीजा ढोते-ढोते ऑलरेडी थका हुआ होता है। ऊपर से लड़के के ब्याह के सौ लफड़े।      

इसलिये वह एकाध बार ख़ुद कोशिश करता है और थक-हारकर अपने इस बुढ़ाते जीजा को अपने किसी नकारे भाईबंद के हवाले कर दूसरे ज़्यादा ज़रूरी कामों में जुट जाता है।
बाकी लोग फूफा के ऐंठने को शादी के दूसरे रिवाजों की ही तरह लेते हैं। वे यह मानते हैं कि यह यही सब करने ही आया था और वह अगर यही नहीं करेगा तो क्या करेगा !
ज़ाहिर है कि वे भी उसे क़तई तवज्जो नहीं देते।
फूफा यदि थोड़ा-बहुत भी समझदार हुआ तो बात को ज़्यादा लम्बा नहीं खींचता। वह माहौल भाँप जाता है। मामला हाथ से निकल जाये, उसके पहले ही मान जाता है। बीबी की तरेरी हुई आँखें उसे समझा देती हैं कि बात को और आगे बढ़ाना ठीक नहीं। लिहाजा, वह बहिष्कार समाप्त कर ब्याह की मुख्य धारा में लौट आता है। हालांकि, वह हँसता-बोलता फिर भी नहीं और तना-तना सा बना रहता है। उसकी एकाध उम्रदराज सालियां और उसकी ख़ुद की बीबी ज़रूर थोड़ी-बहुत उसके आगे-पीछे लगी रहती हैं। पर जल्दी ही वे भी उसे भगवान भरोसे छोड़-छाड़ दूसरों से रिश्तेदारी निभाने में व्यस्त हो जाती हैं।
फूफा बहादुर शाह ज़फ़र की गति को प्राप्त होता है। अपना राज हाथ से निकलता देख कुढ़ता है, पर किसी से कुछ कह नहीं पाता। मनमसोस कर रोटी खाता है और दूसरों से बहुत पहले शादी का पंडाल छोड़ खर्राटे लेने अपने कमरे में लौट आता है। फूफा चूँकि और कुछ कर नहीं सकता, इसलिये वह यही करता है।
इन हालात को देखते हुए मेरी आप सबसे यह अपील है कि फूफाओं पर हँसिये मत। आप आजीवन जीजा नहीं बने रह सकते। आज नहीं तो कल आपको भी फूफा होकर मार्गदर्शक मंडल का हिस्सा हो ही जाना है। अाज के फूफाओं की आप इज़्ज़त करेंगे, तभी अपने फूफा वाले दिनों में लोगों से आप भी इज़्ज़त पा सकेंगे।

ध्यान रखें

Sunday, 23 April 2017

माल्यार्पण करना

कक्षा दसवीं की परीक्षा मे प्रश्न पूछा गया -
"माल्यार्पण करना " का अर्थ बताओ

होनहार छात्र ने लिखा -

सरकारी बैँकोँ द्वारा
 गरीब जनता की 
गाढी कमाई 
       माल्या को अर्पण
 करने को ही माल्यार्पण कहते है।

और बच्चा सीधे MBA finance के लिये सेलेक्ट हो गया।

 😂😀😜😢😳

फ़िल्म_अभिनेत्री_मीना_कुमारी_का_हलाला_वाकया

इस पोस्ट का टाइटल हैं #फ़िल्म_अभिनेत्री_मीना_कुमारी_का_हलाला_वाकया
मीना कुमारी उर्फ महज़बीं बानो की नानी रविन्द्र नाथ टैगोर के छोटे भाई की बेटी थी , यानी हिन्दू ।
मीना कुमारी की माँ ने अली बख्स नाम के तबला बजाने वाले से शादी कर ली थी और नाम रखा था इकबाल बानो , बाद में अली बख्श ने अपनी नौकरानी से शादी करके इकबाल बानो के लिए सौतन भी ले आये थे ।
खैर
मीना कुमारी पति कमाल अमरोही मीना कुमारी से 27 साल बड़े थे और ये उसकी तीसरी शादी थी और कमाल के पहले से ही 8 बच्चे थे ।
जब कमाल अमरोही को एक बार गुस्सा आया तो उन कमाल ने वही तलाक तलाक तलाक का फरमान दे दिया , लेकिन गुस्सा शांत होने पर दुबारा निकाह करने की बात हुई तब मौलवियों ने हलाला का फरमान दे दिया ।।
पहले तो हलाला से मना किया मीना ने लेकिन बाद में उनका एक दिन का निकाह ज़ीनत अमान के बाप से कराया गया ।

तब

मीना कुमारी ने कहा था कि यदि मजहब के तहत हलाला जायज है तो फिर मुझमे और वेश्या में क्या अंतर हुआ ??


इसके बाद भी ज़िन्दगी में तकलीफ काम नही हुई यहां तक उनकी लाश भी कोई उठाने वाला नही था कोई भी मुसलमान उनकी मय्यत पर नही गया एक पारसी ने उनके अस्पताल का बिल भरकर उनको खाक ए सपुर्द किया ।
एक हिन्दू औरत का मुसलमान बनने का कितना बडी सज़ा और क्या हो सकती हैं ।

New fatva

सोनू निगम के लाउड स्पीकर के वयान के बाद..
आ गया फतवा...
सोनू निगम की कार का कोई पंक्चर नहीं बनाएगा।😜

Friday, 21 April 2017

Indian army in Kashmir

जंगल में शेर शेरनी शिकार के लिये दूर तक गये अपने बच्चों को अकेला छोडकर।
देर तक नही लौटे तो बच्चे भूख से छटपटाने लगे उसी समय एक बकरी आई उसे दया आई और उन बच्चों को दूध पिलाया फिर बच्चे मस्ती करने लगे तभी शेर शेरनी आये बकरी को देख लाल पीले होकर हमला करता उससे पहले बच्चों ने कहा इसने हमें दूध पिलाकर बड़ा उपकार किया है नही तो हम मर जाते।
अब शेर खुश हुआ और कृतज्ञता के भाव से बोला हम तुम्हारा उपकार कभी नही भूलेंगे जाओ आजादी के साथ जंगल मे घूमो फिरो मौज करो।
अब बकरी जंगल में निर्भयता के साथ रहने लगी यहाँ तक कि शेर के पीठ पर बैठकर भी कभी कभी पेडो के पत्ते खाती थी।
यह दृश्य चील ने देखा तो हैरानी से बकरी को पूछा तब उसे पता चला कि उपकार का कितना महत्व है।
चील ने यह सोचकर कि एक प्रयोग मैं भी करता हूँ चूहों के छोटे छोटे बच्चे दलदल मे फंसे थे निकलने का प्रयास करते पर कोशिश बेकार ।
चील ने उनको पकड पकड कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया बच्चे भीगे थे सर्दी से कांप रहे थे तब चील ने अपने पंखों में छुपाया, बच्चों को बेहद राहत मिली
काफी समय बाद चील उडकर जाने लगी तो हैरान हो उठी चूहों के बच्चों ने उसके पंख कुतर डाले थे।
चील ने यह घटना बकरी को सुनाई तुमने भी उपकार किया और मैंने भी फिर यह फल अलग क्यों? ?
बकरी हंसी फिर गंभीरता से कहा
उपकार भी शेर जैसो पर किया जाए चूहों पर नही।
चूहों (कायर) हमेशा उपकार को स्मरण नही रखेंगे वो तो भूलना बहादुरी समझते है और शेर (बहादुर ) उपकार कभी नही भूलेंगे ।
सनद रहे की पिछले वर्ष कश्मीरियों को सेना ने बाढ़ में डूबने से बचाया था और आज वो ही एहसान फरामोश सेना पे पत्थर और ग्रेनेड फेंक रहे हे ।
बहुत ही विचारणीय है👆 🙏

Bharat k atankvadi

कुलभूषण जाधव के लिए रात के 3 बजे पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट खुलवा दे" .....ये 40 हरामखोर 

रिज़ल्ट आया "नही भाई ऐसे हरामखोर और राष्ट्र द्रोही सिर्फ भारत में ही रहते है.......

🇮🇳एक सोचने वाली बात....

याकुब मेमन की फाँसी रुकवाने हिन्दुस्तान के जिन  
चालीस  हस्तियोंनें राष्ट्रपति को चिठ्ठी लिखी, उनके नाम ..!!

01 - वृंदा करात
02 - प्रकाश करात
03 - शत्रुघ्न सिन्हा
04 - राम जेठमलानी
05 - महेश भट्ट

06 - शाहरुख खान
07 - आमीर खान
08 - सैफ अली खान
09 - नसीरुद्दीन शाह
10 - सलमान खान

11 - अरविंद केजरीवाल
12 - तिस्ता सितलवाड
13 - दिग्विजय सिंग
14 - लालू यादव
15 - नितीश कुमार

16 - अबु आजमी
17 - प्रशांत भुषण
18 - अससुद्दीन ओवैसी
19 - अखिलेश यादव
20 - आज़म खान

21 - सचीन पायलट
22- राहुल रॉय
23 - जरनैल सिंग
24 - अलका लांबा
25 - आशुतोष

26 - सागरिका घोष
27 - करिना खान
28 - सानिया मिर्जा
29 - अकबरूद्दिन ओवैसी
30 - शाजीया इल्मी

31- अहमद बुखारी
32 - अभय दुबे
33 - रवीश कुमार
34 - पुण्यप्रसून बाजपेयी
35 - ममता बॅनर्जी

36 - सिद्धारमैया
37 - आशीष खेतान
38 - अग्निवेश
39 - संजय सिंह
40 - शकील अहमद

भारत सरकार से अपील है की  आतंकवादियों द्वारा किये गये हमले से लड़ने के लिए ,
जिन 40 मशहूर हस्तियों ने अपने AC कमरों में बैठकर, आतंकी याकूब मेमन पर दया दिखाने की चिट्ठी लिखी है, उन सभी महान आत्माओं को वहां भेजा जाए, आतंकवादियों को प्यार से समझाने-बुझाने और मनाने के लिए, क्योंकि, आज अगर सेना ने अपनी जान जोखिम में डालकर, इन्हें गिरफ्तार कर भी लिया तो दस, पंदरह साल बाद, मीडिया और कुछ देशद्रोही, इन्हें भी बचाने की मुहिम छेड़ देंगे ।।

ये इतना फॉरवर्ड करो की, इन 40 लोगोंका जीना हराम हो जाये....

जय हिंद ।  जय भारत ।
🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳

How to be happy

दुखी रहने के  कारण.
==============
1. देरी से उठना, देरी से जगना. 2. लेन-देन
का हिसाब नहीं रखना.
3. कभी किसी के लिए कुछ
नहीं करना. 4. स्वयं की बात
को ही सत्य बताना.
5. किसी का विश्वास नहीं करना. 6.
बिना कारण झूठ बोलना.
7. कोई भी काम समय पर नहीं करना. 8.
बिना मांगे सलाह देना.
9. बीते हुए सुख को बार - बार याद करना. 10.
हमेशा अपने लिए सोचना.
" दिमाग ठंडा हो, दिल में रहम हो, जुबान नरम हो, आँखों में शर्म
हो तो फिर सब कुछ तुम्हारा है "
 *उठियें*
जल्दी घर के सारें, घर में होंगे पौबारा।

*कीजियें*
मालिश तीन बार, बुध, शुक्रवार और सोमवार।

*नहाइए*
पहले सिर, हाथ पाँव फिर।

*खाइयें*
दाल, रोटी, चटनी कितनी भी हो कमाई अपनी।

*पीजिये*
दूध खड़े होकर, दवा पानी बैठ कर।

*खिलाइये*
आयें को रोटी, चाहें पतली हो या मोटी।

*पिलाइए*
प्यासे को पानी, चाहे हो जावे कुछ हानि।

*छोडियें*
अमचूर की खटाई, रोज की मिठाई।

*करियें*
आयें का मान, जाते का सम्मान।

*जाईये*
दुःख में पहले, सुख में पीछे।


*भगाइए*
मन के डर को, बुड्डे वर को।

*धोइये*
दिल की कालिख को, कुटुम्ब के दाग को।

*सोचिएं*
एकांत में, करो सबके सामने।

*बोलिएं*
कम से कम, कर दिखाओ ज्यादा।

*चलियें*
तो अगाड़ी, ध्यान रहे पिछाड़ी।

*सुनियें*
सबो की, करियें मन की।

*बोलियें*
जबान संभल कर, थोडा बहुत पहचान कर।

*सुनियें*
पहले पराएं की, पीछे अपने की।

*रखियें*
याद कर्ज के चुकाने की, मर्ज के मिटाने की।

*भुलियें*
अपनी बडाई को और दूसरों की बुराई को।

*छिपाइएं*
उमर और कमाई, चाहे पूछे सगा भाई।

*लिजियें*
जिम्मेदारी उतनी, सम्भाल सके जितनी।

*धरियें*
चीज जगह पर, जो मिल जावें वक्त पर।

*उठाइये*
सोते हुए को नहीं,  गिरे हुयें को।

*लाइयें*
घर में चीज उतनी, काम आवे जितनी।

*गाइये*
*सुख में राम को और दुःख मे सीताराम  को।*
सभी को राम ,2

My father is best

✏धयान से पढ़ना आँखों में पानी आ जाएगा.

बड़े गुस्से से मैं घर से चला आया ..

इतना गुस्सा था की गलती से पापा के ही जूते पहन के निकल गया 
मैं आज बस घर छोड़ दूंगा, और तभी लौटूंगा जब बहुत बड़ा आदमी बन जाऊंगा ...

जब मोटर साइकिल नहीं दिलवा सकते थे, तो क्यूँ इंजीनियर बनाने के सपने देखतें है .....
आज मैं पापा का पर्स भी उठा लाया था .... जिसे किसी को हाथ तक न लगाने देते थे ...

मुझे पता है इस पर्स मैं जरुर पैसो के हिसाब की डायरी होगी ....
पता तो चले कितना माल छुपाया है .....
माँ से भी ...

इसीलिए हाथ नहीं लगाने देते किसी को..

जैसे ही मैं कच्चे रास्ते से सड़क पर आया, मुझे लगा जूतों में कुछ चुभ रहा है ....
मैंने जूता निकाल कर देखा .....
मेरी एडी से थोडा सा खून रिस आया था ...
जूते की कोई कील निकली हुयी थी, दर्द तो हुआ पर गुस्सा बहुत था ..

और मुझे जाना ही था घर छोड़कर ...

जैसे ही कुछ दूर चला ....
मुझे पांवो में गिला गिला लगा, सड़क पर पानी बिखरा पड़ा था ....
पाँव उठा के देखा तो जूते का तला टुटा था .....

जैसे तेसे लंगडाकर बस स्टॉप पहुंचा, पता चला एक घंटे तक कोई बस नहीं थी .....

मैंने सोचा क्यों न पर्स की तलाशी ली जाये ....

मैंने पर्स खोला, एक पर्ची दिखाई दी, लिखा था..
लैपटॉप के लिए 40 हजार उधार लिए
पर लैपटॉप तो घर मैं मेरे पास है ?

दूसरा एक मुड़ा हुआ पन्ना देखा, उसमे उनके ऑफिस की किसी हॉबी डे का लिखा था 
उन्होंने हॉबी लिखी अच्छे जूते पहनना ......
ओह....अच्छे जुते पहनना ???
पर उनके जुते तो ...........!!!!

माँ पिछले चार महीने से हर पहली को कहती है नए जुते ले लो ...
और वे हर बार कहते "अभी तो 6 महीने जूते और चलेंगे .."
मैं अब समझा कितने चलेंगे

......तीसरी पर्ची ..........
पुराना स्कूटर दीजिये एक्सचेंज में नयी मोटर साइकिल ले जाइये ...
पढ़ते ही दिमाग घूम गया.....
पापा का स्कूटर .............
ओह्ह्ह्ह

मैं घर की और भागा........
अब पांवो में वो कील नही चुभ रही थी ....

मैं घर पहुंचा .....
न पापा थे न स्कूटर ..............
ओह्ह्ह नही
मैं समझ गया कहाँ गए ....

मैं दौड़ा .....
और
एजेंसी पर पहुंचा......
पापा वहीँ थे ...............

मैंने उनको गले से लगा लिया, और आंसुओ से उनका कन्धा भिगो दिया ..

.....नहीं...पापा नहीं........ मुझे नहीं चाहिए मोटर साइकिल...

बस आप नए जुते ले लो और मुझे अब बड़ा आदमी बनना है..

वो भी आपके तरीके से ...।।

"माँ" एक ऐसी बैंक है जहाँ आप हर भावना और दुख जमा कर सकते है...

और

"पापा" एक ऐसा क्रेडिट कार्ड है जिनके पास बैलेंस न होते हुए भी हमारे सपने पूरे करने की कोशिश करते है.......Always Love Your Parents💕
अगर दिल के किसी कोने को छू जाये तो फोरवर्ड जरूर करना .  अगर ज़्यादा अच्छा लगे तो मुझे बी सेंड करना आप का अपना दोस्त 
〰〰〰〰〰〰〰

Baba Sahab Ambedkar

.

भगवा ध्वज के लिए जो भी संभव होगा, मैं करूँगा- बाबासाहब आंबेडकर"

पढ़कर चक्कर आ गए ना??

 ऐसा ही होता है, जब कान के नीचे कोई सच्चाई का तमाचा लगाता है...

बाबासाहब आंबेडकर समग्र भाषण :- खण्ड छः. (पत्रिका - गरुड़, दिनाँक 13जुलाई 1947)

. घटना 10 जुलाई 1947 की है - संविधान सभा द्वारा नियुक्त की गई राष्ट्रध्वज समिति के एक सदस्य बाबासाहब आंबेडकर मुम्बई से दिल्ली जाने के लिए निकले थे. विमानतल पर उन्हें विदा करने हिन्दू महासभा और Schedule Caste Federation के प्रमुख कार्यकर्ता उपस्थित थे. इन लोगों में सीके बोले, एएस भिडे, अनंतराव चित्रे, सुरेन्द्रनाथ टीपनीस, वामनराव चव्हाण इत्यादि लोग मौजूद थे. विमानतल पर विशाल भगवा ध्वज फहराया गया. हिन्दू महासभा के श्री बोले ने आंबेडकर के हाथों में भगवा ध्वज थमाते हुए कहा कि आप राष्ट्रध्वज समिति के सदस्य हैं, यह भगवा ध्वज पूरे देश पर लहराना चाहिए.
आंबेडकर मजाक में बोले, "मेरे जैसे महार के बेटे को आगे करके, क्या आप लोग पीछे रह जाएँगे. आप भी मेरे साथ दिल्ली चलिए, वहाँ जोरदार प्रदर्शन कीजिए... भगवा ध्वज के लिए मेरे द्वारा जो भी संभव होगा मैं प्रयास करूँगा ही..". लेकिन दुर्भाग्यवश राष्ट्रध्वज समिति में अंततः नेहरू की ही चली और तिरंगा मान्य किया गया...
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कहने का तात्पर्य यह है कि अम्बेडकरवादी लोगों के दिलो-दिमाग को वामपंथ और मिशनरी ने "हाईजैक" कर लिया है, ये लोग कभी भी धारा 370 पर, विभाजन के समय मुस्लिमों के क्रूर व्यवहार पर, गाँधी की नीतियों पर तथा भगवा ध्वज पर बाबासाहेब आंबेडकर के विचार आपके सामने आने ही नहीं देंगे... क्योंकि इनकी राजनीति और रोटी घृणा पर चलती है.
लेकिन आप तो जीवंत हैं ना?? तो बात कीजिए, बात आगे बढाईये, अपने दलित भाईयों को सच बताईये...

साभार श्री सुरेश चिपलूनकर जी
 फेसबुक पेज

Thursday, 20 April 2017

Be vegetarian

*(मांस का मूल्य ) लघु कथा*

*मगध के सम्राट् श्रेणिक ने एक बार अपनी राज्य-सभा में पूछा कि- "देश की खाद्य समस्या को सुलझाने के लिए सबसे सस्ती वस्तु क्या है? "*

*मंत्री-परिषद् तथा अन्य सदस्य सोचमें पड़ गये। चावल, गेहूं, आदि पदार्थ तो बहुत श्रम बाद मिलते हैं और वह भी तब, जबकि प्रकृति का प्रकोप न हो। ऐसी हालत में अन्न तो सस्ता हो नहीं सकता। शिकार का शौक पालने वाले एक अधिकारी ने सोचा कि मांस ही ऐसी चीज है, जिसे बिना कुछ खर्च किये प्राप्त किया जा सकता है।*

*उसने मुस्कराते हुए कहा-"राजन्! सबसे सस्ता खाद्य पदार्थ तो मांस है। इसे पाने में पैसा नहीं लगता और पौष्टिक वस्तु खाने को मिल जाती है।"*

*सबने इसका समर्थन किया, लेकिन मगध का प्रधान मंत्री अभय कुमार चुप रहा।*

*श्रेणिक ने उससे कहा, "तुम चुप क्यों हो? बोलो, तुम्हारा इस बारे में क्या मत है?"*

*प्रधान मंत्री ने कहा, "यह कथन कि मांस सबसे सस्ता है, एकदम गलत है। मैं अपने विचार आपके समक्ष कल रखूंगा।"*

*रात होने पर प्रधानमंत्री सीधे उस सामन्त के महल पर पहुंचे, जिसने सबसे पहले अपना प्रस्ताव रखा था।*

*अभय ने द्वार खटखटाया।*

*सामन्त ने द्वार खोला। इतनी रात गये प्रधान मंत्री को देखकर वह घबरा गया। उनका स्वागत करते हुए उसने आने का कारण पूछा।*

*प्रधान मंत्री ने कहा -*
*"संध्या को महाराज श्रेणिक बीमार हो गए हैं। उनकी हालत खराब है। राजवैद्य ने उपाय बताया है कि किसी बड़े आदमी के हृदय का दो तोला मांस मिल जाय तो राजा के प्राण बच सकते हैं। आप महाराज के विश्ववास-पात्र सामन्त हैं। इसलिए मैं आपके पास आपके हृदय का दो तोला मांस लेने आया हूं। इसके लिए आप जो भी मूल्य लेना चाहें, ले सकते हैं। कहें तो लाख स्वर्ण मुद्राएं दे सकता हूं।"*

*यह सुनते ही सामान्त के चेहरे का रंग फीका पड़ गया। वह सोचने लगा कि जब जीवन ही नहीं रहेगा, तब लाख स्वर्ण मुद्राएं भी किस काम आएगी!*

*उसने प्रधान मंत्री के पैर पकड़ कर माफी चाही और अपनी तिजौरी से एक लाख स्वर्ण मुद्राएं देकर कहा कि इस धन से वह किसी और सामन्त के हृदय का मांस खरीद लें।*

*मुद्राएं लेकर प्रधानमंत्री बारी-बारी से सभी सामन्तों के द्वार पर पहुंचे और सबसे राजा के लिए हृदय का दो तोला मांस मांगा, लेकिन कोई भी राजी न हुआ। सबने अपने बचाव के लिए प्रधानमंत्री को एक लाख, दो लाख और किसी ने पांच लाख स्वर्ण मुद्राएं दे दी। इस प्रकार एक करोड़ से ऊपर स्वर्ण मुद्राओं का संग्रह कर प्रधान मंत्री सवेरा होने से पहले अपने महल पहुंच गए और समय पर राजसभा में प्रधान मंत्री ने राजा के समक्ष एक करोड़ स्वर्ण मुद्राएं रख दीं।*

*श्रेणिक ने पूछा, "ये मुद्राएं किसलिए हैं?"*

*प्रधानमंत्री ने सारा हाल कह सुनाया और बोले -*
*" दो तोला मांस खरीदने के लिए इतनी धनराशी इक्कट्ठी हो गई किन्तु फिर भी दो तोला मांस नहीं मिला। अपनी जान बचाने के लिए सामन्तों ने ये मुद्राएं दी हैं। अब आप सोच सकते हैं कि मांस कितना सस्ता है?"*

*जीवन का मूल्य अनन्त है। हम यह न भूलें कि जिस तरह हमें अपनी जान प्यारी होती है, उसी तरह सभी जीवों को अपनी जान प्यारी होती है ।*

*जियो और जीने दो हर किसी को  स्वेछा से जीने का अधिकार !!*,
?🐇?🐏🐐🐓🐋🐃🐂🐖🐕🐆🐪
प्राणी मात्र की रक्षा हमारा धर्म है..!! .

शाकाहार अपनाओ… 

धन्यवाद!!

Muslim fatva

जब भी मुसलमानों की भावनाएँ काफिरों से आहत होती हैं, तुरन्त उसको जान से मारने का फतवा जारी हो जाता है।
फतवा जान से मारने की एक ऐसी खुली धमकी है जिसका कानून भी सम्मान करता है। कानून भी समझता है कि काफ़िर का मारा जाना न्यायहित में अत्यंत आवश्यक है। भले हो वो देश काफिरों का ही क्यों न हो। ऐसे समय एक लोकतांत्रिक देश तुरन्त इस्लामिक स्टेट का रूप ले लेता है और कानून के मिलार्ड बिल्कुल उस तरह के तमाशबीन नज़र आते हैं जो किसी लड़की को संगसार की सज़ा मिलने पर दर्शक बन जाते हैं। भारत में अब तक असंख्य फतवे जारी हो चुके हैं पर हमारे मिलार्डों को इससे कभी ऑब्जेक्शन नहीं हुआ, क्योंकि ये एक शांतिप्रिय समुदाय द्वारा जारी फतवा होता है।
एक लोकतंत्र की सबसे बड़ी नाकामी यही है कि देश के संविधान के ऊपर फतवा राज चल रहा है। हमारे देश का बुद्धिजीवी वर्ग तीन तलाक के मामलों में घुसा हुआ है, मुस्लिम धर्म गुरुओं की इस तरह खुशामद की जा रही है जैसे भीख माँगा जा रहा हो। कॉमन सिविल कोड का मुद्दा भूलकर भी नहीं उठाया जाता की मुस्लिम वर्ग कहीं नाराज़ न हो जाये।
अगर लोकतंत्र को सही अर्थों में लागू करना है तो मिलार्डों को सबसे पहले फतवा देने वाले को ही कूटना चाहिए क्योंकि ये शरीयत नहीं खुल्लम खुल्ला गुंडागर्दी है और गुंड़ों का इलाज़ करना कानून का नैतिक दायित्व।

Hindu ka dukh

बाहर से आकर मुगल लुटेरे हम पर राज किये,हमारे आराध्य का मन्दिर तोड़ कर मस्जिद बना दिया गया,हमारे देश को मजहब के नाम पर कई टुकड़े कर दिये,फिर भी हमारा पिछा नहीं छोड़ा आज भी उन्हें ही सब कुछ चाहिये,उन्हें सब्सिटी चाहिये आरक्षण चाहीये,मदरसे चाहीये कब्रिस्तान चाहीये,मस्जिदों पर लाउडिस्पीकर चाहीये,सड़क पर नमाज चाहीये,अभी भी भारत की बरबादी और घर से अफजल जैसे आतंकी और पत्थरबाज निकाल रहे हैं,,हम सौ करोड़ वो पच्चीस करोड़ फिर भी सरकारें उनके पक्ष में,अदालतें उनके पक्ष में राजनेता उनके पक्ष में और तो और उन्होंने अपने पक्ष में हमारे बिच से गद्दार भी पैदा कर लिया,,
हम आवाज भी उठाते हैं तो,सरकार कोर्ट सेक्युलर गद्दार,सब हमें दबाने पर तुल जाते हैं,,,क्यों,,,क्यों की प्रतिकार करने हम टुकड़ों में सामने आते हैं,,बाकी घर बैठ कर हम पर तालियां बजाते हैं,,,,,,

Wednesday, 19 April 2017

शरीर में रौंगटे खड़े कर देने वाली कविता

"_*🔴शरीर में रौंगटे खड़े कर देने वाली कविता*_

_*🔴🎷🌺 *माँ की इच्छा* 🌺🎷🔵*_

_महीने बीत जाते हैं ,_
_साल गुजर जाता है ,_
_वृद्धाश्रम की सीढ़ियों पर ,_
_मैं तेरी राह देखती हूँ।_

_आँचल भीग जाता है ,_
_मन खाली खाली रहता है ,_
_तू कभी नहीं आता ,_
_तेरा मनि आर्डर आता है।_

_इस बार पैसे न भेज ,_
_तू खुद आ जा ,_
_बेटा मुझे अपने साथ ,_
_अपने 🏡घर लेकर जा।_

_तेरे पापा थे जब तक ,_
_समय ठीक रहा कटते ,_
_खुली आँखों से चले गए ,_
_तुझे याद करते करते।_

_अंत तक तुझको हर दिन ,_
_बढ़िया बेटा कहते थे ,_
_तेरे साहबपन का ,_
_गुमान बहुत वो करते थे।_

_मेरे ह्रदय में अपनी फोटो ,_
_आकर तू देख जा ,_
_बेटा मुझे अपने साथ ,_
_अपने 🏡घर लेकर जा।_

_अकाल के समय ,_
_जन्म तेरा हुआ था ,_
_तेरे दूध के लिए ,_
_हमने चाय पीना छोड़ा था।_

_वर्षों तक एक कपडे को ,_
_धो धो कर पहना हमने ,_
_पापा ने चिथड़े पहने ,_
_पर तुझे स्कूल भेजा हमने।_

_चाहे तो ये सारी बातें ,_
_आसानी से तू भूल जा ,_
_बेटा मुझे अपने साथ ,_
_अपने 🏡घर लेकर जा।_

_घर के बर्तन मैं माँजूंगी ,_
_झाडू पोछा मैं करूंगी ,_
_खाना दोनों वक्त का ,_
_सबके लिए बना दूँगी।_

_नाती नातिन की देखभाल ,_
_अच्छी तरह करूंगी मैं ,_
_घबरा मत, उनकी दादी हूँ ,_
_ऐंसा नहीं कहूँगी मैं।_

_तेरे 🏡घर की नौकरानी ,_
_ही समझ मुझे ले जा ,_
_बेटा मुझे अपने साथ ,_
_अपने 🏡घर लेकर जा।_

_आँखें मेरी थक गईं ,_
_प्राण अधर में अटका है ,_
_तेरे बिना जीवन जीना ,_
_अब मुश्किल लगता है।_

_कैसे मैं तुझे भुला दूँ ,_
_तुझसे तो मैं माँ हुई ,_
_बता ऐ मेरे कुलभूषण ,_
_अनाथ मैं कैसे हुई ?_

_अब आ जा तू.._
_एक बार तो माँ कह जा ,_
_हो सके तो जाते जाते_
_वृद्धाश्रम गिराता जा।_
_बेटा मुझे अपने साथ_
_अपने 🏡घर लेकर जा_

_*अगर आप को सही लगा हो तो आप के पास जो भी ग्रुप है उन सभी ग्रुप में कृपया 1 बार जरूर भेजे !*_
👌 _*शायद आपकी कोशिश से कोई " माँ " अपने 🏡 घर चली जाये ...*_ ☝याद रखना....☝🏽
माँ बाप उमर से नहीं..
" फिकर से बूड़े होते है..
कड़वा है मगर सच है " ...🙏🙏🏽🙏🏽🙏🏽
👌जब बच्

Indian army in Kashmir

🔻
24 घंटे के लिए सेना को कश्मीर मे आजादी दे दी जाए
मीडिया, इंटरनेट पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया जाए फिर देखना यह गद्दार कभी आजादी नही मांगेंगे

👊🏿🚩🐅सिंहगर्जना 🐅🚩👊🏿

Poor Pakistan

RBI नई नोटों पर इतना और लिख देते की

*"कश्मीर भारत का है"*

तो पडोसी देश नकली नोट ही नही छापता। 
😂 😂 😂 😂 😂 😂 😂

पर हमसे कोई पूछता कहाँ है🤔

 कसम से talent तो बहुत है लेकिन आज तक घमंड नही किया

Indian army in Kashmir

🔻
सेना के दो थप्पड़ से ही जो गाडी में मूत दिए उन्हें आजादी चाहिए

ओर बोलते हैं छिन कर लेगें आजादी 😀

👊🏿🚩🐅सिंहगर्जना 🐅🚩👊🏿

Maa

गढ़ती घट-कुटुम्ब को अविरत, भावों में बह लेती है।
मन ही मन ना जाने कितने, दारुण-दुख सह लेती है।
त्याग तपस्या की तू देवी, तुझसे उऋण नहीं हूँगा।
व्यथा-कथा निज मन की 'माँ', निज मन से ही कह लेती है।
=======================================
- चन्द्र भूषण

Sonu nigam say stop Ajan

मौलवी ने फतवा जारी किया था 'जो सोनू निगम को गंजा करेगा उसको १० लाख का ईनाम मिलेगा' 😂😂
.
सोनू निगम ने अपने एक मुस्लिम जानकार को बुलाकर खुद का सिर मुंडवा लिया है, अब बस फतवे वाले मौलवी के दस लाख के चैक का इन्तजार है
.
और इस तरह सर मुंडवा के सोनू निगम फतवे की अम्मी-आपा करने वाले पहले व्यक्ति बने 😜
- सोनू निगम खुद ही गंजा हो गया और उसके ऊपर 10 लाख का फतवा देने वाला नंगा, गर्मी में तो सब गंजे होते हैं मौलाना फर्जी में बेवकूफ बन गया।
- 10 लाख इक्कठे करने के लिए मौलाना को ताउम्र पंक्चर बनाना पड़ेगा। 😂😂

Tuesday, 18 April 2017

Talak in India Bharat

👌👌👌👌👌👌👌👌👌

।।।। जरूर  पढ़ें ।।।


श्री संजय सिन्हा , एक पत्रकार की कलम से ......

तब मैं जनसत्ता में नौकरी करता था। एक दिन खबर आई कि एक आदमी ने झगड़े के बाद अपनी पत्नी की हत्या कर दी। 
मैंने खब़र में हेडिंग लगाई कि पति ने अपनी बीवी को मार डाला। खबर छप भी गई। किसी को आपत्ति नहीं थी। पर शाम को दफ्तर से घर के लिए निकलते हुए प्रधान संपादक प्रभाष जोशी जी सीढ़ी के पास मिल गए। मैंने उन्हें नमस्कार किया तो कहने लगे कि संजय जी, पति की बीवी नहीं होती।

"पति की बीवी नहीं होती?" मैं चौंका था !!!!!

"बीवी तो शौहर की होती है, मियां की होती है। पति की तो पत्नी होती है।" 

भाषा के मामले में प्रभाष जी के सामने मेरा टिकना मुमकिन नहीं था। हालांकि मैं कहना चाह रहा था कि भाव तो साफ है न ? बीवी कहें या पत्नी या फिर वाईंफ, सब एक ही तो हैं। लेकिन मेरे कहने से पहले ही उन्होंने मुझसे कहा कि भाव अपनी जगह है, शब्द अपनी जगह। कुछ शब्द कुछ जगहों के लिए बने ही नहीं होते, ऐसे में शब्दों का घालमेल गड़बड़ी पैदा करता है। 

प्रभाष जी आमतौर पर उपसंपादकों से लंबी बातें नहीं किया करते थे। लेकिन उस दिन उन्होंने मुझे टोका था और तब से मेरे मन में ये बात बैठ गई थी कि शब्द बहुत सोच समझ कर गढ़े गए होते हैं। 

खैर, आज मैं भाषा की कक्षा लगाने नहीं आया। आज मैं रिश्तों के एक अलग अध्याय को जीने के लिए आपके पास आया हूं। लेकिन इसके लिए आपको मेरे साथ निधि के पास चलना होगा। 

निधि मेरी दोस्त है। कल उसने मुझे फोन करके अपने घर बुलाया था। फोन पर उसकी आवाज़ से मेरे मन में खटका हो चुका था कि कुछ न कुछ गड़बड़ है। मैं शाम को उसके घर पहुंचा। उसने चाय बनाई और मुझसे बात करने लगी। पहले तो इधर-उधर की बातें हुईं, फिर उसने कहना शुरू कर दिया कि नितिन से उसकी नहीं बन रही और उसने उसे तलाक देने का फैसला कर लिया है। 

मैंने पूछा कि नितिन कहां है, तो उसने कहा कि अभी कहीं गए हैं, बता कर नहीं गए। उसने कहा कि बात-बात पर झगड़ा होता है और अब ये झगड़ा बहुत बढ़ गया है। ऐसे में अब एक ही रास्ता बचा है कि अलग हो जाएं, तलाक ले लें। 

मैं चुपचाप बैठा रहा। 

निधि जब काफी देर बोल चुकी तो मैंने उससे कहा कि तुम नितिन को फोन करो और घर बुलाओ, कहो कि संजय सिन्हा आए हैं।

निधि ने कहा कि उनकी तो आपस मे बातचीत नहीं होती, फिर वो फोन कैसे करे ? 

अज़ीब संकट था। निधि को मैं बहुत पहले से जानता हूं। मैं जानता हूं कि नितिन से शादी करने के लिए उसने घर में कितना संघर्ष किया था। बहुत मुश्किल से दोनों के घर वाले राज़ी हुए थे, फिर धूमधाम से शादी हुई थी। ढेर सारी रस्म पूरी की गईं थीं। ऐसा लगता था कि ये जोड़ी ऊपर से बन कर आई है। पर शादी के कुछ ही साल बाद दोनों के बीच झगड़े होने लगे। दोनों एक-दूसरे को खरी-खोटी सुनाने लगे। और आज उसी का नतीज़ा था कि संजय सिन्हा निधि के सामने बैठे थे, उनके बीच के टूटते रिश्तों को बचाने के लिए। 

खैर, निधि ने फोन नहीं किया। मैंने ही फोन किया और पूछा कि तुम कहां हो ? मैं तुम्हारे घर पर हूं, आ जाओ। नितिन पहले तो आनाकानी करता रहा, पर वो जल्दी ही मान गया और घर चला आया। 

अब दोनों के चेहरों पर तनातनी साफ नज़र आ रही थी। ऐसा लग रहा था कि कभी दो जिस्म-एक जान कहे जाने वाले ये पति-पत्नी आंखों ही आंखों में एक दूसरे की जान ले लेंगे। दोनों के बीच कई दिनों से बातचीत नहीं हुई थी। 

नितिन मेरे सामने बैठा था। मैंने उससे कहा कि सुना है कि तुम निधि से तलाक लेना चाहते हो? 

उसने कहा, "हां, बिल्कुल सही सुना है। अब हम साथ नहीं रह सकते।"

मैंने कहा कि तुम चाहो तो अलग रह सकते हो। पर तलाक नहीं ले सकते। 

"क्यों?"

"क्योंकि तुमने निकाह तो किया ही नहीं है।"

"अरे यार, हमने शादी तो की है।"

"हां, शादी की है। शादी में पति-पत्नी के बीच इस तरह अलग होने का कोई प्रावधान नहीं है। अगर तुमने मैरिज़ की होती तो तुम डाइवोर्स ले सकते थे। अगर तुमने निकाह किया होता तो तुम तलाक ले सकते थे। लेकिन क्योंकि तुमने शादी की है, इसका मतलब ये हुआ कि हिंदू धर्म और हिंदी में कहीं भी पति-पत्नी के एक हो जाने के बाद अलग होने का कोई प्रावधान है ही नहीं।"

मैंने इतनी-सी बात पूरी गंभीरता से कही थी, पर दोनों हंस पड़े थे। दोनों को साथ-साथ हंसते देख कर मुझे बहुत खुशी हुई थी। मैंने समझ लिया था कि रिश्तों पर पड़ी बर्फ अब पिघलने लगी है। वो हंसे, लेकिन मैं गंभीर बना रहा। 

मैंने फिर निधि से पूछा कि ये तुम्हारे कौन हैं?

निधि ने नज़रे झुका कर कहा कि मेरे पति हैं। 

मैंने यही सवाल नितिन से किया कि ये तुम्हारी कौन हैं ? 

उसने भी नज़रें इधर-उधर घुमाते हुए कहा कि मेरी बीवी हैं। 

मैंने तुरंत टोका। ये तुम्हारी बीवी नहीं हैं। ये तुम्हारी बीवी इसलिए नहीं हैं क्योंकि तुम इनके शौहर नहीं हो। तुम इनके शौहर नहीं, क्योंकि तुमने इसके साथ निकाह नहीं किया। तुमने शादी की है। शादी के बाद ये तुम्हारी पत्नी हुईं। हमारे यहां जोड़ी ऊपर से बन कर आती है। तुम भले सोचो कि शादी तुमने की है, पर ये सत्य नहीं है। तुम शादी का एलबम निकाल कर लाओ, मैं सबकुछ अभी इसी वक्त साबित कर दूंगा। 

बात अलग दिशा में चल पड़ी थी। मेरे एक-दो बार कहने के बाद निधि शादी का एलबम निकाल लाई। अब तक माहौल थोड़ा ठंडा हो चुका था। एलबम लाते हुए उसने कहा कि कॉफी बना कर लाती हूं। 

मैंने कहा कि अभी बैठो, इन तस्वीरों को देखो। कई तस्वीरों को देखते हुए मेरी निगाह एक तस्वीर पर गई जहां निधि और नितिन शादी के जोड़े में बैठे थे और पांव पूजन की रस्म चल रही थी। मैंने वो तस्वीर एलबम से निकाली और उनसे कहा कि इस तस्वीर को गौर से देखो। 

उन्होंने तस्वीर देखी और साथ-साथ पूछ बैठे कि इसमें खास क्या है? 

मैंने कहा कि ये पैर पूजन की रस्म है। तुम दोनों इन सभी लोगों से छोटे हो, जो तुम्हारे पांव छू रहे हैं। 

"हां तो?" 

"ये एक रस्म है। ऐसी रस्म संसार के किसी धर्म में नहीं होती जहां छोटों के पांव बड़े छूते हों। लेकिन हमारे यहां शादी को ईश्वरीय विधान माना गया है, इसलिए ऐसा माना जाता है कि शादी के दिन पति-पत्नी दोनों विष्णु और लक्ष्मी के रूप हो जाते हैं। दोनों के भीतर ईश्वर का निवास हो जाता है।

अब तुम दोनों खुद सोचो कि क्या हज़ारों-लाखों साल से विष्णु और लक्ष्मी कभी अलग हुए हैं? दोनों के बीच कभी झिकझिक हुई भी हो तो क्या कभी तुम सोच सकते हो कि दोनों अलग हो जाएंगे? नहीं होंगे।

हमारे यहां इस रिश्ते में ये प्रावधान है ही नहीं। तलाक शब्द हमारा नहीं है। डाइवोर्स शब्द भी हमारा नहीं है। 

दोनों से मैंने ये भी पूछा कि बताओ कि हिंदी में तलाक को क्या कहते हैं?
 
दोनों मेरी ओर देखने लगे। उनके पास कोई जवाब था ही नहीं। फिर मैंने ही कहा कि दरअसल हिंदी में तलाक का कोई विकल्प नहीं। हमारे यहां तो ऐसा माना जाता है कि एक बार एक हो गए तो कई जन्मों के लिए एक हो गए। तो प्लीज़ जो हो ही नहीं सकता, उसे करने की कोशिश भी मत करो। 

या फिर पहले एक दूसरे से निकाह कर लो, फिर तलाक ले लेना।"

अब तक रिश्तों पर जमी बर्फ काफी पिघल चुकी थी। 

निधि चुपचाप मेरी बातें सुन रही थी।

 फिर उसने कहा कि 
भैया, मैं कॉफी लेकर आती हूं। 

वो कॉफी लाने गई, मैंने नितिन से बातें शुरू कर दीं। बहुत जल्दी पता चल गया कि बहुत ही छोटी-छोटी बातें हैं, बहुत ही छोटी-छोटी इच्छाएं हैं, जिनकी वज़ह से झगड़े हो रहे हैं। 

खैर, कॉफी आई। मैंने एक चम्मच चीनी अपने कप में डाली। नितिन के कप में चीनी डाल ही रहा था कि निधि ने रोक लिया, "भैया इन्हें शुगर है। चीनी नहीं लेंगे।"

लो जी, घंटा भर पहले ये इनसे अलग होने की सोच रही थीं और अब इनके स्वास्थ्य की सोच रही हैं। 

मैं हंस पड़ा। मुझे हंसते देख निधि थोड़ा झेंपी। कॉफी पी कर मैंने कहा कि अब तुम लोग अगले हफ़्ते निकाह कर लो, फिर तलाक में मैं तुम दोनों की मदद करूंगा। 

जब तक निकाह नहीं कर लेते तब तक "हम्मा-हम्मा-हम्मा, एक हो गए हम और तुम" वाला गाना गाओ, मैं चला। मैं जानता हूं कि अब तक दोनों एक हो गए होंगे। दोनों ने ही 'हम्मा-हम्मा' साथ-साथ गाया होगा।

।हिन्दू संस्कृति को शत शत प्रणाम।

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
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What is Karam? How it works?

*What is Karam?                  How it works?*

*अनजाने कर्म का फल* 

एक राजा ब्राह्मणों को लंगर में महल के आँगन में भोजन करा रहा था ।
राजा का रसोईया खुले आँगन में भोजन पका रहा था ।
उसी समय एक चील अपने पंजे में एक जिंदा साँप को लेकर राजा के महल के उपर से गुजरी ।
तब पँजों में दबे साँप ने अपनी आत्म-रक्षा में चील से बचने के लिए अपने फन से ज़हर निकाला । 
तब रसोईया जो लंगर ब्राह्मणो के लिए पका रहा था, उस लंगर में साँप के मुख से निकली जहर की कुछ बूँदें खाने में गिर गई ।
किसी को कुछ पता नहीं चला ।
फल-स्वरूप वह ब्राह्मण जो भोजन करने आये थे उन सब की जहरीला खाना खाते ही मौत हो गयी ।
अब जब राजा को सारे ब्राह्मणों की मृत्यु का पता चला तो ब्रह्म-हत्या होने से उसे बहुत दुख हुआ ।
ऐसे में अब ऊपर बैठे यमराज के लिए भी यह फैसला लेना मुश्किल हो गया कि इस पाप-कर्म का फल किसके खाते में जायेगा .... ???
(1) राजा .... जिसको पता ही नहीं था कि खाना जहरीला हो गया है ....
या
(2 ) रसोईया .... जिसको पता ही नहीं था कि खाना बनाते समय वह जहरीला हो गया है ....
या
(3) वह चील .... जो जहरीला साँप लिए राजा के उपर से गुजरी ....
या
(4) वह साँप .... जिसने अपनी आत्म-रक्षा में ज़हर निकाला ....

बहुत दिनों तक यह मामला यमराज की फाईल में अटका रहा ....

फिर कुछ समय बाद कुछ ब्राह्मण राजा से मिलने उस राज्य मे आए और उन्होंने किसी महिला से महल का रास्ता पूछा ।
उस महिला ने महल का रास्ता तो बता दिया पर रास्ता बताने के साथ-साथ ब्राह्मणों से ये भी कह दिया कि "देखो भाई ....जरा ध्यान रखना .... वह राजा आप जैसे ब्राह्मणों को खाने में जहर देकर मार देता है ।"

बस जैसे ही उस महिला ने ये शब्द कहे, उसी समय यमराज ने फैसला ले लिया कि उन मृत ब्राह्मणों की मृत्यु के पाप का फल इस महिला के खाते में जाएगा और इसे उस पाप का फल भुगतना होगा ।

यमराज के दूतों ने पूछा - प्रभु ऐसा क्यों ??
जब कि उन मृत ब्राह्मणों की हत्या में उस महिला की कोई भूमिका भी नहीं थी ।
तब यमराज ने कहा - कि भाई देखो, जब कोई व्यक्ति पाप करता हैं तब उसे बड़ा आनन्द मिलता हैं । पर उन मृत ब्राह्मणों की हत्या से ना तो राजा को आनंद मिला .... ना ही उस रसोइया को आनंद मिला .... ना ही उस साँप को आनंद मिला .... और ना ही उस चील को आनंद मिला ।
पर उस पाप-कर्म की घटना का बुराई करने के भाव से बखान कर उस महिला को जरूर आनन्द मिला । इसलिये राजा के उस अनजाने पाप-कर्म का फल अब इस महिला के खाते में जायेगा ।

बस इसी घटना के तहत *आज तक जब भी कोई व्यक्ति जब किसी दूसरे के पाप-कर्म का बखान बुरे भाव से करता हैं तब उस व्यक्ति के पापों का हिस्सा उस बुराई करने वाले के खाते में भी डाल दिया जाता हैं !*

अक्सर हम जीवन में सोचते हैं कि  *हमने जीवन में ऐसा कोई पाप नहीं किया, फिर भी हमारे जीवन में इतना कष्ट क्यों आया....??*

ये कष्ट और कहीं से नहीं, बल्कि लोगों की बुराई करने के कारण उनके पाप-कर्मो से आया होता हैं जो बुराई करते ही हमारे खाते में ट्रांसफर हो जाता हैं ..🌷🙏🌷..

 *A very deep philosophy of Karma*

Sunday, 16 April 2017

Congress in India

किताबों को खंगालने से हमें यह पता चला कि 'बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय' के संस्थापक पंडित मदनमोहन मालवीय जी नें 14 फ़रवरी 1931 को लार्ड इरविन के सामने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की फांसी रोकने के लिए मर्सी पिटीसन दायर की थी ताकि उन्हें फांसी न दी जाये और कुछ सजा भी कम की जाएl लार्ड इरविन ने तब मालवीय जी से कहा कि आप कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष है इसलिए आपको इस पिटीसन के साथ नेहरु, गाँधी और कांग्रेस के कम से कम 20 अन्य सदस्यों के पत्र भी लाने होंगेl
जब मालवीय जी ने भगत सिंह की फांसी रुकवाने के बारे में नेहरु और गाँधी से बात की तो उन्होंने इस बात पर चुप्पी साध ली और अपनी सहमति नहीं दीl इसके अतिरिक्त गाँधी और नेहरु की असहमति के कारण ही कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी अपनी सहमति नहीं दीl रिटायर होने के बाद लार्ड इरविन ने स्वयं लन्दन में कहा था कि "यदि नेहरु और गाँधी एक बार भी भगत सिंह की फांसी रुकवाने की अपील करते तो हम निश्चित ही उनकी फांसी रद्द कर देते, लेकिन पता नहीं क्यों मुझे ऐसा महसूस हुआ कि गाँधी और नेहरु को इस बात की हमसे भी ज्यादा जल्दी थी कि भगत सिंह को फांसी दी जाएl"
प्रोफ़ेसर कपिल कुमार की किताब के अनुसार "गाँधी और लार्ड इरविन के बीच जब समझौता हुआ उस समय इरविन इतना आश्चर्य में था कि गाँधी और नेहरु में से किसी ने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को छोड़ने के बारे में चर्चा तक नहीं कीl" इरविन ने अपने दोस्तों से कहा कि 'हम यह मानकर चल रहे थे कि गाँधी और नेहरु भगत सिंह की रिहाई के लिए अड़ जायेंगे और हम उनकी यह बात मान लेंगेl
भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी लगाने की इतनी जल्दी तो अंग्रेजों को भी नही थी जितनी कि गाँधी और नेहरु को थी क्योंकि भगत सिंह तेजी से भारत के लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहे थे जो कि गाँधी और नेहरु को बिलकुल रास नहीं आ रहा थाl यही कारण था कि वो चाहते थे कि जल्द से जल्द भगत सिंह को फांसी दे दी जाये, यह बात स्वयं इरविन ने कही हैl इसके अतिरिक्त लाहौर जेल के जेलर ने स्वयं गाँधी को पत्र लिखकर पूछा था कि 'इन लड़कों को फांसी देने से देश का माहौल तो नहीं बिगड़ेगा?' तब गाँधी ने उस पत्र का लिखित जवाब दिया था कि 'आप अपना काम करें कुछ नहीं होगाl' इस सब के बाद भी यादि कोई कांग्रेस को देशभक्त कहे तो निश्चित ही हमें उसपर गुस्सा भी आएगा और उसकी बुद्धिमत्ता पर रहम भी l 💯

Isis ka sach

हाल ही में Dialogue India पत्रिका और नवोदय टाइमस अखबार में वरिष्‍ठ पत्रकार विनीत नारायण का एक लेख प्रकाशित हुआ है। समाजशास्‍त्री डॉ. पीटर हैमंड ने दुनिया भर में मुसलमानों की प्रवृत्ति पर गहरे शोध के बाद एक पुस्‍तक लिखी है- 'स्‍लेवरी, टेररिज्‍म एंड इस्‍लाम- द हिस्‍टोरिकल रूट्स एंड कंटेम्‍परी थ्रेट'। मैं एक समाजशास्‍त्र का विद्यार्थी हूं, इसलिए कह सकता हूं कि सेक्‍यूलर नामक प्रजाति अपना पूर्वग्रह छोड़कर और मुसलमान अपनी धार्मिक भावनाओं को छोड़कर दुनिया भर के आंकड़ों पर गौर करें, देखें कि आखिर ऐसा क्‍या है कि उनकी जनसंख्‍या बढ़ते ही वह मारकाट, हिंसा और दूसरे धर्म के मानने वालों के नरसंहार पर उतर आते हैं। इस पुस्‍तक के शोध का निषकर्ष है:

* जब तक मुसलमानों की जनसंख्‍या किसी देश-प्रदेश में 2 फीसदी रहती है, वह शांतिप्रिय, कानूनपसंद अल्‍पसंख्‍यक बनकर रहते हैं, जैसे अमेरिका जहां मुसलमानों की जनसंख्‍या (0.6) फीसदी है।

* जब मुसलमानों की जनसंख्‍या 2 से 5 फीसदी होती है तक वह अपना धर्म प्रचार शुरू कर देते हैं जैसे डेनमार्क जर्मनी आदि

* जब मुसलमानों की जनसंख्‍या 5 फीसदी से ऊपर जाती है वह अन्‍य धार्मिक समूहों, सरकार व बाजार पर 'छोटी छोटी बात जैसे- हलाल' मांस दुकानों में रखने आदि का दबाव बनाने लगते हैं। जैसे फ्रांस, फिलीपीन्‍स, स्‍वीडन, स्विटजरलैंड आदि

* ज्‍यों ही मुसलमानों की जनंसख्‍या 5 से 8 फीसदी तक पहुंचती है वह अपने लिए अलग शरियत कानून की मांग करने लगते हैं। बात बात पर उनकी धार्मिक भावनाएं आहत होने लगती हैं। दरअसल उनका अंतिम लक्ष्‍य यही है कि पूरा संसार शरियत कानून पर ही चले और इसी लक्ष्‍य के लिए पूरा मुस्लिम जगह प्रयासरत है।

* जब मुसलमानों की जनसंख्‍या 10 फीसदी से अधिक हो जाती है तो वह धार्मिक आजादी आदि के नाम पर तोडफोड, दंगा फसाद, शुरू कर देते हैं। जैसे डेनमार्क, इजराइल, गुयाना आदि

* ज्‍यों ही मुसलामनों की जनसंख्‍या 20 फीसदी के पार पहुंचती है, जेहाद शुरू हो जाता है। दूसरे धर्मों के मानने वालों की हत्‍याएं शुरू हो जाती है। समान नागरिक कानून का विरोध किया जाता है, अपने लिए अलग सुविधाओं की मांग की जाने लगती है। इस्‍लामी आतंकवाद व अलगाववाद आदि की घटनाएं तेजी से होने लगती है। जैसे भारत, इथोपिया आदि

* ज्‍यों ही मुसलमान किसी देश, प्रदेश या क्षेत्र में 40 फीसदी के पास पहुंचते हैं दूसरे धर्म के मानने वालों का नरसंहार शुरू कर देते है। सामूहिक हत्‍याएं होने लगती हैं जैसे लेबानान, बोस्निया आदि

* जब मुसलमान कहीं भी 60 फीसदी से अधिक होते हैं 'जातीय सफाया' शुरू हो जाता है। दूसरे धर्मावलंबियों का पूरी तरह से सफाया या उसका इस्‍लाम में धर्मांतरण ही 'आखिल इस्‍लामी' लक्ष्‍य है। जाजिया कर लगाना, दूसरे धर्मों के पूजा स्‍थल का पूरी तरह से नाश करना आदि होने लगता है। जैसे भारत के कश्‍मीर से कश्‍मीरी पंडितों का सफाया।

* मुसलमानों के 80 फीसदी पर पहुंचते ही कोई देश सेक्‍युलर नहीं रह सकता। उसे इस्‍लामी बना दिया जाता है। 56 इस्‍लामी देशों में से एक भी मुल्‍क ऐसा नहीं है जिसका राजधर्म इस्‍लाम न हो। ऐसे राज्‍य में सत्‍ता और शासन प्रयोजित जातीय व धार्मिक सफाई अभियान शुरू हो जाता है। पैसे पाकिस्‍तान व बंग्‍लादेश से हिंदुओं का पूरी तरह से सफाया हो गया। मिस्र, गाजापटटी, ईरान, जोर्डन, मोरक्‍को, संयुक्‍त अरब अमिरात में आज खोजे से भी अन्‍य धर्मावलंबी नहीं मिलते।

भारत के सेक्‍युलर प्रजाति यह झूठ फैलाती आयी है कि भारत में इस्‍लाम तलवार नहीं सूफी आंदोलन के जोर पर फैला। वर्तमान में देखिए, सूफी आंदोलन तो कहीं नहीं दिखेगा, लेकिन तलवार का जोर आज भी हिज्‍बुल, आईएसआईएस, तालीबान, लश्‍कर के रूप में और पाकिस्‍तान, बंग्‍लादेश एवं अन्‍य मुस्लिम देशों के शासकों के रूप में हर तरफ दिखता है। इस्‍लाम वास्‍तव में कोई धर्म नहीं, एक राजनैतिक व सामाजिक विचारधारा है, जिसका आखिरी लक्ष्‍य पूरी दुनिया को शरियत कानून के अंतर्गत लाकर 'अखिल इस्‍लामी विश्‍व की स्‍थापना करना है। 

Saturday, 15 April 2017

Kashmir ka hal

मुख्यमंत्री का ट्रांसफर हो सकता है क्या?
बस पूँछ रहा हूँ....
योगीजी को एक दिन के लिये काश्मीर के मुख्यमंत्री के रूप मे देखने की तीव्र इच्छा है।😜

Teacher are always best

क्लास रूम में प्रोफेसर ने एक सीरियस टॉपिक पर चर्चा
प्रारंभ की।
.
जैसे ही वे ब्लैकबोर्ड पर कुछ लिखने के लिए पलटे तो तभी
एक शरारती छात्र ने सीटी बजाई।
.
प्रोफेसर ने पलटकर सारी क्लास को घूरते हुए "सीटी
किसने मारी" पूछा,
लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया।
.
प्रोफेसर ने शांति से अपना सामान समेटा और आज की
क्लास समाप्त बोलकर, बाहर की तरफ बढ़े।
.
स्टूडेंट्स खुश हो गए कि, चलो अब फ्री हैं।
.
अचानक प्रोफेसर रुके, वापस अपनी टेबल पर पहुँचे और
बोले---" चलो, मैं तुम्हें एक कहानी सुनाता हूँ ,
इससे हमारे बचे हुए समय का उपयोग भी हो जाएगा। "
.
सभी स्टूडेंट्स उत्सुकता और इंटरेस्ट के साथ कहानी सुनने
लगे।
.
प्रोफेसर बोले---" कल रात मुझे नींद नहीं आ रही
थी तो मैंने सोचा कि, कार में पेट्रोल भरवाकर ले आता हूँ
जिससे सुबह मेरा समय बच जाएगा।
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पेट्रोल पम्प से टैंक फुल कराकर मैं आधी रात को
सूनसान पड़ी सड़कों पर ड्राइव का आनंद लेने लगा।
.
अचानक एक चौराहे के कार्नर पर मुझे एक बहुत खूबसूरत
लड़की शानदार ड्रेस पहने हुए अकेली खड़ी नजर आई।
.
मैंने कार रोकी और उससे पूछा कि,
क्या मैं उसकी कोई सहायता कर सकता हूँ तो उसने कहा
कि,
उसे उसके घर ड्रॉप कर दें तो बड़ी मेहरबानी होगी।
.
मैंने सोचा नींद तो वैसे भी नहीं आ रही है ,
चलो, इसे इसके घर छोड़ देता हूँ।
.
वो मेरी बगल की सीट पर बैठी।
रास्ते में हमने बहुत बातें कीं।
वो बहुत इंटेलिजेंट थी, ढेरों
टॉपिक्स पर उसका कमाण्ड था।
.
जब कार उसके बताए एड्रेस पर पहुँची तो उतरने से
पहले वो बोली कि,
वो मेरे नेचर और व्यवहार से बेहद प्रभावित हुई है और
मुझसे प्यार करने लगी है।
.
मैं खुद भी उसे पसंद करने लगा था।
मैंने उसे बताया कि, " मैं यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हूँ। "
.
वो बहुत खुश हुई
फिर उसने मुझसे मेरा मोबाइल नंबर लिया और
अपना नंबर दिया।
.
अंत में उसने बताया की, उसका भाई भी
यूनिवर्सिटी में ही पढ़ता है और उसने मुझसे
रिक्वेस्ट की कि,
मैं उसके भाई का ख़याल रखूँ।
.
मैंने कहा कि, " तुम्हारे भाई के लिए कुछ भी करने पर
मुझे बेहद खुशी होगी।
क्या नाम है तुम्हारे भाई
का...?? "
.
इस पर लड़की ने कहा कि, " बिना नाम बताए भी
आप उसे पहचान सकते हैं क्योंकि वो सीटी बहुत
ज्यादा और बहुत बढ़िया बजाता है। "
.
जैसे ही प्रोफेसर ने सीटी वाली बात की तो,
तुरंत क्लास के सभी स्टूडेंट्स उस छात्र की तरफ
देखने लगे, जिसने प्रोफ़ेसर की पीठ पर सीटी
बजाई थी।
.
प्रोफेसर उस लड़के की तरफ घूमे और उसे घूरते हुए बोले-
" बेटा, मैंने अपनी पी एच डी की डिग्री,
मटर छीलकर हासिल नहीं की है,
हरामखोर निकल क्लास से बाहर...!!😂😂😂😂😂😂😂

Private Job

बड़ी मेहनत के बाद मैंने प्राईवेट नौकरी पायी है,नौकरी में आया तो जाना, यहाँ एक तरफ कुआँ तो दूसरी तरफ खाई है।
जहाँ कदम कदम पर ज़िल्लत, और घड़ी घड़ी पर ताने हैं यहाँ मुझे अपनी ज़िन्दगी के कई साल बिताने हैं।
अपनी गलती ना हो लेकिन क्षमा याचना हेतु हाथ फैलाने हैं
फ़िर भी बात-बात पे डेबिट और Punishment ही पाने हैं.जानता हूँ ये 'अग्निपथ' है, फिर भी मैं चलने वाला हूँ,क्योंकि मैं प्राईवेट नौकरी वाला हूँ।
जहाँ एक तरफ मुझे boss की, और दूसरी तरफ family वालो की भी सुननी है, यानी मुझे दो में से एक नहीं, बल्कि दोनों राह चुननी हैं।
ड्यूटी अगर लेट हुयी तो boss चिल्लाते हैं गलती चाहे किसी भी की भी हो सजा तो हम ही पाते हैं.दो नावों पे सवार हूँ फिर भी सफ़र पूरा करने वाला हूँ,क्योंकि मैं प्राईवेट नौकरी वाला हूँ।
आसान नहीं है सबको एक साथ खुश रख पाना,परिवार के साथ वक़्त बिताना, और *Office*में job बचाना।परिवार के साथ बमुश्किल कुछ वक़्त ही बिता पाता हूँ,घर जैसे कोई मुसाफिर खाना हो, वहां तो बस आता और जाता हूँ। फिर भी हर मोड़ पर मैं अपनी ज़िम्मेदारी पूरी करने वाला हूँ, क्योंकि मैं प्राईवेट नौकरी वाला हूँ Promotion, incriment की बात पर, हमें सालो लटकाया जाताहै, हक़ की बात करने पर ठेंगा दिखलाया जाता है।
ये एक लड़ाई है, इसमें सबको साथ लेकर चलने वाला हूँ,क्योंकि मै प्राईवेट नौकरी वाला हूँ।
छुट्टी मिली ना घर जा सके, Duty में ही ईद-दिवाली-क्रिसमस मनाने का अजब कमाल है। टिफ़िन से टिफ़िन जब मिलते हैं, तो एक नया ही ज़ायका बन जाता है, खुद के बनाये खाने में, और घर के खाने में फ़र्क़ साफ़ नज़र आता है।
मजबूरी ने इतना कुछ सिखाया, आगे भी बहुत कुछ सीखने वाला हूँ, क्योंकि मैं प्राईवेट नौकरी वाला हूँ।कईलोग समझते है कि बड़ा मजा करते है, प्राईवेट नौकरी मेंअब उन्हें कौन समझाए कि प्राईवेट कर्मी के लिए boss के पास सिर्फ वादे है, Boss चाहे मनमानी करे, स्टाफ के लिए बड़े सख्त कायदे हैं।सबको मैं बदल नहीं सकता, इसलिए अब ख़ुद को बदलने वाला हूँ, क्योंकि मैं प्राईवेट नौकरी वाला हूँ। 

(ये कविता मेरे समस्त प्राईवेट कर्मियो को समर्पित है।*_

Baba Sahab Ambedkar ji ki jivani

आज अम्बेडकर जी की 126 वी जयंती हैं। सभी को बधाई।
लेकिन इस मौके पर हम उस महान राजा को कैसे भूल सकते हैं जिन्होंने अम्बेडकर की प्रतिभा को पहचान उन्हे अपने खर्चे पर विदेश भेजा।
उसे पढ़ाया-लिखाया और इस काबिल बनाया की आज उनकी जयंती मना सके।
राजा ने डॉ. अंबेडकर को अपने खर्चे पर पढ़ाई के लिए विदेश भेजा था। पूरा देश जानता है कि भारतीय संविधान की रचना करने में डॉ. भीमराव अंबेडकर का योगदान सबसे अहम रहा। आपने विभिन्न देशों के कानूनों को जानकर, समझकर देश के संविधान के लिए जो अथक प्रयास किये उसके लिए हर कोई उनको सम्मान की नजर से देखता है। 
लेकिन कम ही लोग जानते होंगे कि उनकी शिक्षा कैसे हुई ? उनका प्रारम्भिक जीवन कैसा रहा ? 
आज हम आपको डॉ. भीमराव अंबेडकर की जिंदगी से जुड़े वो अनछुए पहलू बताएंगे जिनसे आप अंजान हैं। जो दलित नेता डॉ. अंबेडकर को अपना आदर्श बताकर राजनीति करते हैं, वो उनकी जिंदगी को गलत तरीके से लोगों के सामने पेश करते हैं ताकि वो राजनीतिक मुनाफा कमा सकें। दलित नेता वोट बैंक के लिए हमेशा से लोगों को डॉ. अंबेडकर के जीवन से जुड़ी गलत जानकारियां देकर भ्रमित करते रहे। डॉ.अंबेडकर की सफलता और पढ़ाई के पीछे एक ऐसी सच्चाई है जो वोट बैंक की खातिर दलित नेताओं ने छुपा रखी है।दलित नेता डॉ. अंबेडकर ने कैसे तालीम हासिल की और तालीम के लिए किसने उनकी मदद की वो कभी नहीं बताते। वो तो खुद को मजलूमों का सहारा बताकर डॉ. अंबेडकर के जीवन को गलत तरीके से पेश करते रहे हैं। जानकारी के मुताबिक बड़ोदरा रियासत के महाराज सयाजी गायकवाड़ को एक चिठ्ठी मिली जिसमे लिखा था की मैं एक दलित हूं और आगे की पढाई के लिए लंदन और अमेरिका जाना चाहता हूँ लेकिन मेरी आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं है कि मैं अपने बल-बूते विदेशो में पढ़ने जा सकूं। डॉ. अंबेडकर ने ये चिट्ठी तब लिखी थी जब डॉ. अंबेडकर अपनी शिक्षा के लिए धन जुटाना चाहते थे। उन्होंने चिट्ठी में लिखा था कि कमजोर माली हालत के चलते कोई भी मेरी मदद करने को तैयार नहीं है। ये चिठ्ठी कोई और नहीं स्वयं अम्बेडकर ने महाराजा सयाजी गायकवाड़ के लिए लिखी थी। उस चिठ्ठी के साथ अंबेडकर ने अपनी मार्क शीट भी भेजी थी ताकि उनकी काबिलियत को महाराजा समझ पाएं। डॉ. अंबेडकर की मार्कशीट को देखकर सयाजी महाराज काफी प्रभावित हुए और अम्बेडकर को मिलने के लिए बुलाया और उनसे कहा तुम विदेश में पढ़ाई करने जाओ हम हर संभव तुम्हारी मदद करेंगे। महाराजा ने कहा कि किसी बात की चिंता मत करना बस मन लगा के पढ़ाई करना। महाराज ने अम्बेडकर की पढ़ाई के सारे खर्चे उठाये और उनके विदेश में रहने का भी प्रबंध किया। डॉ. भीमराव अंबेडक की समस्याएं सिर्फ पढ़ाई खत्म करने के बाद खत्म नहीं हो गई थीं। उनकी समस्या तब और बढ़ गई जब उनको कोई पीएचडी करने के बाद नौकरी नहीं देना चाहता था। ऐसे में एक बार फिर महाराज सयाजी ने डॉ. अंबेडकर की मदद की उन्हें नौकरी देते हुए अपनी रियासत में महामंत्री के पद पर नियुक्त किया। उस जमाने में अंबेडकर को 10,000 रुपए मिलते थे। जो कि उस जमाने में 1 करोड़ के बराबर होता था। जिन संविधान निर्माता डॉ. अंबेडकर को दलित नेता वोट बैंक के लिए इस्तेमाल करते हैं। वो कभी महाराजा सयाजी गायकवाड़ का नाम नहीं लेते और न उनकी मदद की बात किसी को बताते हैं। दलित नेता आवाम का समर्थन हासिल करने के लिए डॉ. अंबेडकर को दबा कुचला बताकर अपनी राजनीति को चमकाने का काम करते हैं।

Who is better

*💐#बुद्धिमान #कौन*💐*

एक गाँव में एक अर्थविद रहता था, उसकी ख्याति दूर दूर तक फैली थी। एक बार वहाँ के राजा ने उसे चर्चा पर बुलाया। 

काफी देर चर्चा के बाद उसने कहा "महाशय, आप बहुत बडे अर्थ ज्ञानी है, पर आपका लडका इतना मूर्ख क्यों है? उसे भी कुछ सिखायें। उसे तो सोने चांदी में मूल्यवान क्या है यह भी नही पता॥" 
यह कहकर वह जोर से हंस पडा।

अर्थविद को बुरा लगा, वह घर गया व लडके से पूछा "सोना व चांदी में अधिक मूल्यवान क्या है?"

"सोना", बिना एकपल भी गंवाए उसके लडके ने कहा।

"तुम्हारा उत्तर तो ठीक है, फिर राजा ने ऐसा क्यूं  कहा? सभी के बीच मेरी खिल्ली भी उठाई।"

लडके समझ मे आ गया, वह बोला "राजा गाँव के पास एक खुला दरबार लगाते हैं, जिसमें सभी प्रतिष्ठित व्यक्ति भी शामिल होते हैं। यह दरबार मेरे स्कूल जाने के मार्ग मे हि पडता है।  

मुझे देखते हि बुलवा लेते हैं, अपने एक हाथ मे सोने का व दूसरे मे चांदी का सिक्का रखकर, जो अधिक मूल्यवान है वह ले लेने को कहते हैं ऒर मैं चांदी का सिक्का ले लेता हूं।
सभी ठहाका लगाकर हंसते हैं व मजा लेते हैं।
ऐसा तकरीबन हर दूसरे दिन होता है।"

"फिर तुम सोने का सिक्का क्यों नही उठाते, चार लोगों के बीच अपनी फजिहत कराते हो व साथ मे मेरी भी।"

लडका हंसा व हाथ पकडकर अर्थविद को अंदर ले गया ऒर कपाट से एक पेटी निकालकर दिखाई जो चांदी के सिक्कों से भरी हुई थी। 

यह देख अर्थविद हतप्रभ रह गया।

लडका बोला "जिस दिन मैंने सोने का सिक्का उठा लिया उस दिन से यह खेल बंद हो जाएगा। वो मुझे मूर्ख समझकर मजा लेते हैं तो लेने दें, यदि मैं बुद्धिमानी दिखाउंगा तो कुछ नही मिलेगा।"

*मूर्ख होना अलग बात है व समझा जाना अलग। स्वर्णिम मॊके का फायदा उठाने से बेहतर है हर मॊके को स्वर्ण मे तब्दील करना।*

*जैसे समुद्र सबके लिए समान होता है, कुछ लोग पानी के अंदर टहलकर आ जाते हैं, कुछ मछलियाँ ढूंढ पकड लाते हैं व कुछ मोती चुन कर आते हैं।*
🙏*

Friday, 14 April 2017

We are Indians

Brushing with *Colgate*

Shaving with *Gillette*

Bathing with *Pears*

Aftershave with *Old Spice*

Wearing *Jocky* 
underwear 

Wearing a 
*Van heusen* shirt

Wearing a *Levis* pant

Eating *Maggi* and 

Drinking *Nescafe*

Using a *Samsung* phone

Wearing a *Ray-ban*

Seeing time on *Casio*

Moving on a *Honda* bike

Using *Apple computer*

with *Coke* on the side

Finishing lunch at ,
*McDonald's*

Buying Pizza  for the 
wife from *Dominos*

And...,

Then asking a question,
*"WHY IS THE INDIAN*
*RUPEE GOING DOWN*
*AGAINST THE DOLLAR*


*Eye opener Message for all intelligent Indians.*