Tuesday, 9 May 2017

Charu nigam ke anshu

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#चारु_निगम_के_आँसू

मिडिया  के एक वर्ग विशेष को आधी स्टोरी बताने या यूं कह लें कि स्टोरी सहूलियत के हिसाब से छिपाने की एक बहुत बुरी लत लगी हुई है और जब स्टोरी दक्षिणपंथ,हिन्दू,भाजपा से सम्बंधित हो तो चढ़ जाओ तेल पानी लेकर.. एक खबर अख़बार और टीवी मिडिया की सुर्खियां बनी हुई है कि भाजपा के MLA राधामोहन अग्रवाल ने एक महिला पुलिस अधिकारी चारु निगम को डांट दिया.वीडियो शेयर किए जा रहे हैं और फिर स्वाभाविक भी है "मोदिया को गरियाने" का कोई मौका क्यों छोड़े मिडिया एक विशेष हिस्सा और एनजीओ गैंग क्योंकि इनके खाद पानी की सप्लाई लाइन आते ही मोदी ने काट दी..

वापस घटना पर आते हैं,आधा सच ये है कि राधामोहन अग्रवाल एक महिला पुलिस अधिकारी पर चिल्लाते हुए कह रहे हैं कि "आप चुप रहिये मैं SDM साहब से बात कर रहा हूँ" और थोड़े देर बार मोहतरमा के आँखों में आंसू आते हैं और मीडिया का कवरेज प्रारम्भ.. दरअसल शराब का ठेका बंद कराने के लिए महिलाएं प्रदर्शन कर रही थी और वहां पुलिस अधिकारी चारु निगम व्यवस्था संभाल रही थी,झड़प हुई फिर पुलिस की वर्दी ने अपना रंग दिखाया महोदय ने पटक पटक कर महिलाओं को पीटा पैर और जूते से महिलाओं के पेट में मारा.गर्भवती महिला को भी नहीं बख्शा..एक आठ साल के बच्चे को उठा के फेक दिया.
जनता तो निरीह होती ही है उसका तो काम ही है कभी नेताओं के तो कभी पुलिस के लात जूते खाना और ये परिपाटी अंग्रेजो के समय से चली आ रही है..राधा मोहन अग्रवाल जी ने शायद यही गलती कर दी वो भूल गए की "वर्दी लगाये महिला पुलिस अधिकारी" के दिमाग में ये बात बहुत गहरे में बैठी है कि वो जनता की मालकिन है, और बिना लाग लपेट कह सकता हूँ कि,ये बात कहीं न कहीं नेता जी के मन में बैठी है कि वो सर्वोपरि सत्ता है। मगर इनके बीच अगर कोई पिसता है तो वो आम जनता.. 
चारु महोदया का दर्द अकेला नहीं है, वो जनता जिसे वो जूतों के नोक पर रखती है उसी जनता के सामने उस जनता के लिए कोई "जनप्रतिनिधि" उनको डाट डपट दे. फिर आँख में आंसू आना स्वाभाविक है। अहंकार टूटता है तो ये स्वाभाविक प्रतिक्रिया है। और इसमें चारु की गलती नहीं मानता मैं, पुलिस और जनता का सम्बन्ध आजादी से पहले जैसा था,आजादी के बाद भी लगभग वही रहा है..सामान्य जनता ने अगर प्रमाणिकता से अपनी बात रख दी और "दिवान साहब" के पास कोई जबाब नहीं तो अगले ही सेकेण्ड माँ बहन की गालियां देते हुए लाठियां भांजी दी जाएंगी..
पुलिस जनता के सम्बन्ध को सामान्य करने के लिए विभिन्न कमेटियों की रिपोर्ट उपलब्ध है मगर ट्रेनिंग में शायद ये पार्ट नजरअंदाज ही जाता है जिससे "खाकी" के एक बड़े हिस्से का आज तक अंग्रेजो के जमाने वाले व्यवहार से आगे नहीं बढ़ पाती है..जनता भी उनसे जुड़ नहीं पाती..
अब जब जनता महिला और बच्चों को "खाकी" अपने जूतों से मार रही हो तो उस समय जनता के बीच ने निकला एक जनप्रतिनिधि जिसने "खादी" पहनी है उसने खादी की ताकत दिखाते हुए "आम जनता के पक्ष में" बोला तो कितना बड़ा अपराध किया.. 

वीडियो देखिये, राधामोहन अग्रवाल ने पुलिस अधिकारी को डांट कर गलत किया या सही निर्णय स्वयं कीजिये...

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