Monday, 31 July 2017

WhatsApp Best messages

Bhut hi pyara msg
💮💮💮💮
काबू में रखें - प्रार्थना के वक़्त अपने दिल को, 
काबू में रखें - खाना खाते समय पेट को,
काबू में रखें - किसी के घर जाएं तो आँखों को,
काबू में रखें - महफ़िल मे जाएं तो ज़बान को, 
काबू में रखें - पराया धन देखें तो लालच को, 
💮💮💮
भूल जाएं - अपनी नेकियों को, 
भूल जाएं - दूसरों की गलतियों को, 
भूल जाएं - अतीत के कड़वे संस्मरणों को, 
💮💮💮
छोड दें - दूसरों को नीचा दिखाना,
छोड दें - दूसरों की सफलता से जलना,
छोड दें - दूसरों के धन की चाह रखना, 
छोड दें - दूसरों की चुगली करना,
छोड दें - दूसरों की सफलता पर दुखी होना,
💮💮💮💮
 यदि आपके फ्रिज में खाना है, बदन पर कपड़े हैं, घर के ऊपर छत है और सोने के लिये जगह है,
तो दुनिया के 75% लोगों से ज्यादा धनी हैं

 यदि आपके पर्स में पैसे हैं और आप कुछ बदलाव के लिये कही भी जा सकते हैं जहाँ आप जाना चाहते हैं
तो आप दुनिया के 18% धनी लोगों में शामिल हैं

 यदि आप आज पूर्णतः स्वस्थ होकर जीवित हैं
तो आप उन लाखों लोगों की तुलना में खुशनसीब हैं जो इस हफ्ते जी भी न पायें

 जीवन के मायने दुःखों की शिकायत करने में नहीं हैं
बल्कि हमारे निर्माता को धन्यवाद करने के अन्य हजारों कारणों में है!!!

 यदि आप मैसेज को वाकइ पढ़ सकते हैं और समझ सकते हैं
तो आप उन करोड़ों लोगों में खुशनसीब हैं जो देख नहीं सकते और पढ़ नहीं सकते 

अगर आपको यह सन्देश बार बार मिले तो परेशान होनेकी
बजाय आपको खुश होना चाहिए !

धन्यवाद...

मैंने भेज दिया 
अब आपकी बाऱी है ।
👌::  *एक   खूबसूरत   सोच*  ::👌:

                     अगर कोई पूछे कि जिंदगी में क्या खोया और क्या पाया ? .... .... तो बेशक कहना, जो कुछ खोया वो मेरी नादानी थी और जो भी पाया वो प्रभू की मेहेरबानी थी। क्या खुबसूरत रिश्ता है मेरे और मेरे भगवान के बीच में, ज्यादा मैं मांगता नहीं और कम वो देता नहीं...✍"॥
                      

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 ☄जीवन के तीन मंत्र☄

☄ *आनंद में  -  वचन मत दीजिये* 

☄ *क्रोध में  -  उत्तर मत दीजिये* 

☄ *दुःख में  -  निर्णय मत लीजिये* 

 💐💎    जीवन मंत्र      💎💐

१) धीरे बोलिये      👉  शांति मिलेगी
२) अहम छोड़िये   👉  बड़े बनेंगे
३) भक्ति कीजिए   👉  मुक्ति मिलेगी
४) विचार कीजिए  👉  ज्ञान मिलेगा
५) सेवा कीजिए    👉  शक्ति मिलेगी
६) सहन कीजिए   👉  देवत्व मिलेगा
७) संतोषी बनिए   👉  सुख मिलेगा 

                    "इतना छोटा कद रखिए कि सभी आपके साथ बैठ सकें। और इतना बड़ा मन रखिए कि जब आप खड़े हो जाऐं, तो कोई बैठा न रह सके।" 

              👌 शानदार बात👌

                     झाड़ू जब तक एक सूत्र में बँधी होती है, तब तक वह "कचरा" साफ करती है।

                      लेकिन वही झाड़ू जब बिखर जाती है, तो खुद कचरा हो जाती है।

                     इस लिये, हमेशा संगठन से बंधे रहें , बिखर कर कचरा न बनें। 

acha lage to share jarur kare

Curruption in Bollywood

मानना पड़ेगा ये सारे "खान " अभिनेता को... अब मुझे सुदर्शन न्यूज़ के उस खबर पर यकीन हो गया है .... ...जिसमें फिल्म को जबरदस्ती हिट बनाने के लिए इनलोगों के द्वारा खेले गए बड़े कारनामे को उजागर किया था .... और सरकार से जांच की मांग भी की थी

आज न्यूज़ में देखा कि बजरंगी भाईजान ......कमाई के मामले में बाहुबली के रिकॉर्ड को तोड़ने जा रही है ... अब यहाँ सारा खेल सिर्फ आंकड़ों का है ... और वो भी बिना दर्शकों के ..
.
सच यही है कि बाहुबली की तुलना किसी भी तरह से बजरंगी भाईजान के साथ नहीं हो सकती ... और कमाई के मामले में भी नहीं .. इसकी कमाई फिर बहुबल्ली से ज्यादा हुयी कैसे ? ? दो दिन पहले मैंने न्यूज़ पढ़ा कि बहुत सारे जगहों पर बजरंगी भाईजान को हटा कर वापिस पब्लिक डिमांड पर बाहुबली को लगाया गया .. और उसका अच्छा रेस्पोंस मिला ....

सुदर्शन न्यूज़ ने स्टिंग ऑपरेशन के जरिये बिहार के कई सिनेमाघरों में जब फिल्म पीके चल रही थी तो ये दिखाया था कि बाहर में होउसेफुल के बोर्ड लगे थे जबकि हॉल के अन्दर मुश्किल से ५० दर्शक भी नहीं थे... फिर टिकट किसने ख़रीदे थे ? ? ?

और तब ये खुलासा हुआ था कि इस तरीके से ब्लैक मनी को वाइट मनी में बदला जाता है ... ब्लैक मनी वाले अपने सारे पैसे हॉल के टिकट के माध्यम से सफ़ेद बनाते हैं ...

ये बात मेरे सामने तब सच साबित हुयी जब मैं मुंबई में आज से करीब एक हफ्ते पहले बजरंगी भाईजान देखने गया था .. जैसे अफवाह था भीड़ की वैसा कुछ नहीं था .. जबकि अभी इसके रिलीज हुए १० दिन भी नहीं हुए थी... जब मैं टिकट लेकर अन्दर एक दोस्त के साथ घुसा था तो दंग रह गया .. .मेरे सिवा सिर्फ दो आदमी और थे पुरे हॉल में ........... बस....
भाई फिर ये कमाई करोडो में कैसे बढती जा रही है ?

इसके बाद भी कल ही मेरे एक दोस्त ने मुंबई में रात के ९ बजे बाहुबली देखने के आसपास के हॉल को देखना शुरू किया तो एक भी जगह हॉल में टिकट उपलब्ध नहीं थी .. .रात के समय में भी नहीं ......... और यही नहीं बाहुबली पुरे विश्व में कारोबार कर रही है ....

अब ये साबित हो चूका है ये खान लोगों का सम्बन्ध सारे ब्लैक मनी वालों से है या फिर ऐसे डॉन लोगों से जिनका पैसा इस माध्यम से भारत में उजले किये जा रहे हैं .. इनके फिल्म के कमाई घंटा नहीं है... बस सब काली कमाई वालों से इनके सम्बन्ध का खेल चल रहा है ... यही कारन है इन तीनों के ऊपर ही सिर्फ ज्यादा पैसे लगा कर फिल्में बनायी जाती है .. क्यूँ पैसे की वसूली दुसरे तरीकों से पक्की होती है .

Saturday, 29 July 2017

Kashmir samasya ka samadhan

सोच रहा था कि कुछ अलग विषय पर लिखा जाए परंतु देश की मौजूदा राजनीति में ही इतने मसले दिख जाते हैं कि ध्यान कहीं और जाता ही नहीं। 
मौजूदा राजनीतिक हालात में विपक्ष और खासकर कांग्रेस की फजीहत होते देखकर इतना सुकून मिलता है जिसकी कोई सीमा नहीं है। एक तरफ जहाँ विपक्ष कमजोर हुआ , वहीं दूसरी ओर कांग्रेसी विधायकों में पार्टी छोड़ने की होड़ मची हुई है। 
कांग्रेसी विचारधारा का यही श्राद्ध यदि और पहले कर दिया गया होता तो आज हालात कुछ और होते।
खैर देर आए दुरुस्त आए...
जरा याद करें , कुछ हफ्तों पहले मणिशंकर अय्यर श्रीनगर गये थे ....कुछ सिविल सोसायटी के सदस्यों को लेकर जिसमें एक पत्रकार महोदय भी थे विनोद शर्मा ।
हुर्रियत नेता मिरवायज फारूख और अली शाह गिलानी से गले मिलकर ठहाके लगाते हुए उस वीडियो को आपने देखा ही होगा .... जिसमें गिलानी ने भारतीय सेना पर व्यंग्य पूर्ण कटाक्ष किया था और नालायक मणिशंकर ने जोरदार ठहाका लगाया था। 
न्यूज चैनलों पर जब यह वीडियो दिखाया गया तो कांग्रेस पार्टी ने अपने आप को इससे अलग कर लिया था।
बाद में जब पत्रकारों ने मणिशंकर से उसके आने की वजह पूछा , तो वह कहा था कि वो काश्मीर की मौजूदा हालात देखने आया है ... लोगों की परेशानियों को समझने आया है ... हुर्रियत नेताओं को काश्मीर समस्या के समाधान के लिए आगे आने को कहने आया है।
पत्रकारों के सामने एक बयान भी दिया था उसने ...उन हुर्रियत नेताओं के सामने जो बयान दिया था मैं उसे हूबहू यहाँ लिख रहा हूँ ...
"" जो भी काश्मीर से जुड़ा हुआ है वह जानता है कि , हम चाहें या ना चाहें घाटी में हुर्रियत का अपना अलग प्रभाव है , हुर्रियत को नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं ""
अब इस बयान का जरा अर्थ समझें ...
मणिशंकर यह कहना चाहता था कि हुर्रियत के लीडरों की काश्मीरियों पर इतनी पकड़ है कि वे वहाँ के शहंशाह हैं ....चाहें तो घाटी को बंधक बना ले ...वहाँ आग लगा दें ... इनके बिना वहाँ परिंदा भी पर नहीं मार सकता है।
हुर्रियत के बारे में ऐसा मानना सिर्फ मणिशंकर का ही नहीं था , बल्कि कांग्रेस भी सालों से यही मानती आई थी। हुर्रियत को काश्मीर समस्या का एक मुख्य पक्षकार /पार्टी के रूप में भाव देना कांग्रेस की एक शातीर चाल थी । हुर्रियत को ना जाने कितनी बार केंद्र और राज्य की कांग्रेसी सरकारों ने धन देकर काश्मीर की शांति खरीदी थी , और ये इल्जाम तो फारुख अब्दुल्ला भी लगा चुके हैं।
पर आज क्या हालात हैं वहाँ ?
सात हुर्रियत नेताओं को जब NIA ने हाल में ही गिरफ्तार किया , तब घाटी के अन्य हुर्रियत आकाओं की घिघ्घी बंध गई ... दिन में तारे नज़र आने लगे ... आतंक फैलाने के लिए विदेशी फंड लेने की जाँच शुरू हो गई ....अपने गुस्से को दिखाने के लिए विरोध स्वरूप इन्होंने श्रीनगर में बंद का आह्वान कर दिया । 
... पर आश्चर्य कि जिस प्रकार से वहाँ के लोगों ने बंद को पूरी तरह से विफल कर दिया और लोगों ने हुर्रियत की अौकात बता दी , तो अब ये बातें बहुत कुछ सोचने को मजबूर कर देती है ...काश्मीरी नागरिकों में हुर्रियत को लेकर कितनी खौफ थी या उनकी कितनी पकड़ थी उनकी ये सच्चाई अब सामने आ चुकी है।
यह कोई छोटी बात नहीं है क्योंकि बात निकलेगी तो दूर तक जाएगी। 
मेरा सीधा आरोप कांग्रेस पार्टी पर है जिसने हुर्रियत की ताकत और सामर्थ्य को जानते हुए भी , या ना जानने का ढोंग करते हुए देश के लोगों को गुमराह किया , हुर्रियत को भाव देते रहे थे ...कांग्रेसियों ने हमें अँधेरे में रखा ..... हुर्रियत का खौफ हमारे दिलों में बनाए रखा .... ये गद्दार हुर्रियत वाले एक तरफ तो काश्मीरी और पाकिस्तानी आतकियों को पनाह देते रहे थे , हथियार और पैसे मुहैया कराते रहे थे और दूसरी तरफ ये कांग्रेसी उन्हें सहयोग देते रहे।
हुर्रियत है क्या ? पाकिस्तानी दल्ले हैं साले , पैसों के लिए निर्दोष काश्मीरियों पर जुल्म ढाने वाले ....पहलेे पंडितों पर और अब बेगुनाह काश्मीरी लोगों पर .. ।
सच तो ये है कि हुर्रियत कुछ अलगाववादी नेताओं का एक गिरोह है जो चंद कट्टर काश्मीरी नौजवानों के दम पर समूची घाटी को बंधक बनाने का दम भरता है ..इनका काम घाटी और देश को अस्थिर करने के लिए पाकिस्तान , सउदी या अन्य देशों से फंड मंगाना , लोकल नागरिकों से जबरन धन उगाही करना , आतंकियों को पनाह देना , नौजवानों को भारत के खिलाफ उकसाना .....और विदेशी पैसों पर ऐश करना था।
परंतु अब मोदी सरकार के आने के बाद से सारा सीन ही बदल गया । पहले तो मोदी ने इन्हें काश्मीर का पक्षकार मानने से इनकार किया .... बातचीत के लायक नहीं माना .... इनके नेताओं की सुरक्षा में लगे सुरक्षाकर्मियों की संख्या में कटौती की ..... जाँच एजेंसियों को पीछे लगाया ...इनकी हैसियत को तौला , एजेंसियों ने इन पर निगाहें रखी ....और सबूत मिलते ही इन्हें दबोच  लिया गया। 
हक्के बक्के रह गए हुर्रियत वाले , इनके आका जो बचे हुए हैं डर के मारे सहमे हुए हैं...उन पर भी दबोचे जाने का खतरा मंडरा रहा है , वे स्तब्ध हैं , किंकर्तव्यविमूढ़ हैं। 
टाॅप हुर्रियत नेता अली शाह गिलानी का बेटा और दामाद के साथ बिट्टा कराटे ("आजतक" चैनल के एक स्टिंग में बिट्टा कराटे ने बाईस पंडितो का कत्ल करने की बात स्वीकार की थी ) पकड़ा गया है।
आज काश्मीर घाटी में इनके समर्थन में ना कहीं प्रदर्शन हो रहे हैं ना पत्थरबाजी हो रही है और ना ही कोई अशांति है। 
घाटी शांत है ,लोग अपने अपने कामों में लगे हैं , अमरनाथ यात्रा भी निर्बाध चल रही है , सेना आतंकियों को ढूंढ कर मारने का अपना दैनिक काम कर रही है ।
अब यहाँ एक प्रश्न जरूर उठता है कि क्या ये काम पहले नहीं किया जा सकता था ? 
हुर्रियत पर क्या नकेल नहीं कसी जा सकती थी ? क्या उनके नेताओं को बाॅडीगार्ड मुहैया करवा कर हर साल करोड़ों रुपये का नुकसान करना आवश्यक था ? उन्हें धन देकर शांत करने की नीति सही थी ? उन्हें बातचीत में शामिल करके उनका भाव बढ़ाना जरूरी था ?
नेहरू तो काश्मीर समस्या के आरोपी हैं ही , उनके वारिसों ने भी इसे जान बूझकर समस्या बनाया और अपने वोट बैंक को खुश करने के लिए सेक्युलर धर्म का निर्वहन बहुत ईमानदारी से किया ........
................एक तरफ जहाँ काश्मीर जलता रहा वहीं दूसरी तरफ ये देश मे सांप्रदायिक राजनीति करने के साथ साथ लूट और भ्रष्टाचार करते हुए शासन करते रहे ।
अतः इस पार्टी का श्राद्ध होते देखना एक सुखद अनुभूति का एहसास करना है।


हमें गर्व हैं मोदी जी आप पर... 
जय हिन्द जय भारत

Thursday, 27 July 2017

Hindu Sanatan Dharm

एक मित्र बचपन में अफगानिस्तान के गजनी नामक स्थान गये थे | वहाँ उन्होंने उस जगह को देखा जहाँ हिन्दु औरतों की नीलामी हुई थी | उस स्थान पर मुसलमानों ने एक स्तम्भ बना रखा है | जिसमे लिखा है-
'दुख्तरे हिन्दोस्तान, नीलामे दो दीनार' 
अर्थात इस जगह हिन्दुस्तानी औरतें दो-दो दीनार में नीलाम हुई | 

उस समय तो यह सब बाते समझ नहीं आई पर आज उस वाक्य के बारे में जानने की इच्छा हुई | खोजने पर पता चला कि महमूद गजनवी ने हिन्दुओं को अपमानित करने के लिये अपने सत्रह हमलों में लगभग चार लाख हिन्दु औरतें पकड़ कर गजनी उठा ले गया | महमूद गजनवी जब इन औरतों को गजनी ले जा रहा था तो वे अपने पिता, भाई और पतियों से बुला-बुला कर बिलख-बिलख कर रो रही थी और अपनी रक्षा के लिए की निवेदन कर रही थी | लेकिन करोडो हिन्दुओं (गैर सैनिक) के बीच से मुठ्ठी भर मुसलमान सैनिकों द्वारा भेड़ बकरियों की तरह ले जाई गई | 


रोती बिलखती इन लाखों हिन्दु नारियों को बचाने न उनके पिता आये, न पति, न भाई और न ही इस विशाल भारत के करोड़ो समान्य हिन्दु उनकी रक्षा के लिये न तो कोई अवतार हुआ और न ही कोई देवी देवता आये |



 महमूद गजनवी ने इन हिन्दु लड़कियों और औरतों को ले जा कर गजनवी के बाजार में समान की तरह बेंच ड़ाला | विश्व की किसी वर्ग के साथ ऐसा अपमान नही हुआ जैसा हिन्दु वर्ग के साथ हुआ | और ऐसा इसलिये हुआ क्योंकि वह सोचते हैं कि जब अत्याचार बढ़ेगा तब भगवान स्वयं उन्हें बचाने आयेंगे | 


परन्तु इतिहास से सबक लेते हुये हिन्दुओं को समझ लेना चाहिये कि भगवान भी अव्यवहारिक अहिंसा व अतिसहिष्णुता को नपुसंकता करार देते हैं | क्योकि भगवान ने अपने सभी अवतारों में यही संदेश दिया है कि अपनी रक्षा स्वयं करों | तुम्हें नेत्र दिए हैं गलत का विरोध करो पीछे मै सदैव तुम्हारे साथ खड़ा हूँ | 



परन्तु अत्याचारियों के प्रतिस्पर्धा किये बिना उनके द्वारा मारे जाना स्वर्ग का मार्ग न होकर नरक का मार्ग है स्मरण रखो एक गाल पर कोई मारे तो दूसरा गाल आगे कर दो यह तो आर्यो की नीति नही, अन्यायी से प्रेम अहिंसा यह तो गीता की निति नही, हे राम बचाओ जो कहता है वह कायर है स्वयं अपना हत्यारा है जो करे वीरता, अति साहस वही भगवान श्री राम एवं श्री कृष्ण का प्रिय है | 


आज पुनः इतिहास हमारी परीक्षा ले रहा है | उठों जागो अपने सनातन धर्म की रक्षा के लिए मैदान में उतर कर सेवा- रूपी "सत्याग्रह" आंदोलन शुरू करो अन्यथा बहुत देर हो जाएगी | 
जाग जाओ हिन्दुओ वरना मारे जाओगे इस कलयुग में ।

Sunday, 23 July 2017

राघवयादवीयम् Raghavyadaviyam Book

" दक्षिण का एक ग्रन्थ " 

क्या ऐसा संभव है कि जब आप किताब को सीधा पढ़े तो रामायण की कथा पढ़ी जाए और जब उसी किताब में लिखे शब्दों को उल्टा करके पढ़े 
तो कृष्ण भागवत की कथा सुनाई दे।

जी हां, कांचीपुरम के 17वीं शदी के कवि वेंकटाध्वरि रचित ग्रन्थ "राघवयादवीयम्" ऐसा ही एक अद्भुत ग्रन्थ है। 

इस ग्रन्थ को 
'अनुलोम-विलोम काव्य' भी कहा जाता है। पूरे ग्रन्थ में केवल 30 श्लोक हैं। इन श्लोकों को सीधे-सीधे
पढ़ते जाएँ, तो रामकथा बनती है और 
विपरीत (उल्टा) क्रम में पढ़ने पर कृष्णकथा। इस प्रकार हैं तो केवल 30 श्लोक, लेकिन कृष्णकथा के भी 30 श्लोक जोड़ लिए जाएँ तो बनते हैं 60 श्लोक। 

पुस्तक के नाम से भी यह प्रदर्शित होता है, राघव (राम) + यादव (कृष्ण) के चरित को बताने वाली गाथा है ~ "राघवयादवीयम।"

उदाहरण के तौर पर पुस्तक का पहला श्लोक हैः

वंदेऽहं देवं तं श्रीतं रन्तारं कालं भासा यः ।
रामो रामाधीराप्यागो लीलामारायोध्ये वासे ॥ १॥

अर्थातः 
मैं उन भगवान श्रीराम के चरणों में प्रणाम करता हूं, जो
जिनके ह्रदय में सीताजी रहती है तथा जिन्होंने अपनी पत्नी सीता के लिए सहयाद्री की पहाड़ियों से होते हुए लंका जाकर रावण का वध किया तथा वनवास पूरा कर अयोध्या वापिस लौटे।

विलोमम्:

सेवाध्येयो रामालाली गोप्याराधी भारामोराः ।
यस्साभालंकारं तारं तं श्रीतं वन्देऽहं देवम् ॥ १॥

अर्थातः 
मैं रूक्मिणी तथा गोपियों के पूज्य भगवान श्रीकृष्ण के
चरणों में प्रणाम करता हूं, जो सदा ही मां लक्ष्मी के साथ
विराजमान है तथा जिनकी शोभा समस्त जवाहरातों की शोभा हर लेती है।

 " राघवयादवीयम" के ये 60 संस्कृत श्लोक इस प्रकार हैं:-

राघवयादवीयम् रामस्तोत्राणि
वंदेऽहं देवं तं श्रीतं रन्तारं कालं भासा यः ।
रामो रामाधीराप्यागो लीलामारायोध्ये वासे ॥ १॥

विलोमम्:
सेवाध्येयो रामालाली गोप्याराधी भारामोराः ।
यस्साभालंकारं तारं तं श्रीतं वन्देऽहं देवम् ॥ १॥

साकेताख्या ज्यायामासीद्याविप्रादीप्तार्याधारा ।
पूराजीतादेवाद्याविश्वासाग्र्यासावाशारावा ॥ २॥

विलोमम्:
वाराशावासाग्र्या साश्वाविद्यावादेताजीरापूः ।
राधार्यप्ता दीप्राविद्यासीमायाज्याख्याताकेसा ॥ २॥

कामभारस्स्थलसारश्रीसौधासौघनवापिका ।
सारसारवपीनासरागाकारसुभूरुभूः ॥ ३॥

विलोमम्:
भूरिभूसुरकागारासनापीवरसारसा ।
कापिवानघसौधासौ श्रीरसालस्थभामका ॥ ३॥

रामधामसमानेनमागोरोधनमासताम् ।
नामहामक्षररसं ताराभास्तु न वेद या ॥ ४॥

विलोमम्:
यादवेनस्तुभारातासंररक्षमहामनाः ।
तां समानधरोगोमाननेमासमधामराः ॥ ४॥

यन् गाधेयो योगी रागी वैताने सौम्ये सौख्येसौ ।
तं ख्यातं शीतं स्फीतं भीमानामाश्रीहाता त्रातम् ॥ ५॥

विलोमम्:
तं त्राताहाश्रीमानामाभीतं स्फीत्तं शीतं ख्यातं ।
सौख्ये सौम्येसौ नेता वै गीरागीयो योधेगायन् ॥ ५॥

मारमं सुकुमाराभं रसाजापनृताश्रितं ।
काविरामदलापागोसमावामतरानते ॥ ६॥

विलोमम्:
तेन रातमवामास गोपालादमराविका ।
तं श्रितानृपजासारंभ रामाकुसुमं रमा ॥ ६॥

रामनामा सदा खेदभावे दया-वानतापीनतेजारिपावनते ।
कादिमोदासहातास्वभासारसा-मेसुगोरेणुकागात्रजे भूरुमे ॥ ७॥

विलोमम्:
मेरुभूजेत्रगाकाणुरेगोसुमे-सारसा भास्वताहासदामोदिका ।
तेन वा पारिजातेन पीता नवायादवे भादखेदासमानामरा ॥ ७॥

सारसासमधाताक्षिभूम्नाधामसु सीतया ।
साध्वसाविहरेमेक्षेम्यरमासुरसारहा ॥ ८॥

विलोमम्:
हारसारसुमारम्यक्षेमेरेहविसाध्वसा ।
यातसीसुमधाम्नाभूक्षिताधामससारसा ॥ ८॥

सागसाभरतायेभमाभातामन्युमत्तया ।
सात्रमध्यमयातापेपोतायाधिगतारसा ॥ ९॥

विलोमम्:
सारतागधियातापोपेतायामध्यमत्रसा ।
यात्तमन्युमताभामा भयेतारभसागसा ॥ ९॥

तानवादपकोमाभारामेकाननदाससा ।
यालतावृद्धसेवाकाकैकेयीमहदाहह ॥ १०॥

विलोमम्:
हहदाहमयीकेकैकावासेद्ध्वृतालया ।
सासदाननकामेराभामाकोपदवानता ॥ १०॥

वरमानदसत्यासह्रीतपित्रादरादहो ।
भास्वरस्थिरधीरोपहारोरावनगाम्यसौ ॥ ११॥

विलोमम्:
सौम्यगानवरारोहापरोधीरस्स्थिरस्वभाः ।
होदरादत्रापितह्रीसत्यासदनमारवा ॥ ११॥

यानयानघधीतादा रसायास्तनयादवे ।
सागताहिवियाताह्रीसतापानकिलोनभा ॥ १२॥

विलोमम्:
भानलोकिनपातासह्रीतायाविहितागसा ।
वेदयानस्तयासारदाताधीघनयानया ॥ १२॥

रागिराधुतिगर्वादारदाहोमहसाहह ।
यानगातभरद्वाजमायासीदमगाहिनः ॥ १३॥

विलोमम्:
नोहिगामदसीयामाजद्वारभतगानया ।
हह साहमहोदारदार्वागतिधुरागिरा ॥ १३॥

यातुराजिदभाभारं द्यां वमारुतगन्धगम् ।
सोगमारपदं यक्षतुंगाभोनघयात्रया ॥ १४॥

विलोमम्:
यात्रयाघनभोगातुं क्षयदं परमागसः ।
गन्धगंतरुमावद्यं रंभाभादजिरा तु या ॥ १४॥

दण्डकां प्रदमोराजाल्याहतामयकारिहा ।
ससमानवतानेनोभोग्याभोनतदासन ॥ १५॥

विलोमम्:
नसदातनभोग्याभो नोनेतावनमास सः ।
हारिकायमताहल्याजारामोदप्रकाण्डदम् ॥ १५॥

सोरमारदनज्ञानोवेदेराकण्ठकुंभजम् ।
तं द्रुसारपटोनागानानादोषविराधहा ॥ १६॥

विलोमम्:
हाधराविषदोनानागानाटोपरसाद्रुतम् ।
जम्भकुण्ठकरादेवेनोज्ञानदरमारसः ॥ १६॥

सागमाकरपाताहाकंकेनावनतोहिसः ।
न समानर्दमारामालंकाराजस्वसा रतम् ॥ १७ विलोमम्:
तं रसास्वजराकालंमारामार्दनमासन ।
सहितोनवनाकेकं हातापारकमागसा ॥ १७॥

तां स गोरमदोश्रीदो विग्रामसदरोतत ।
वैरमासपलाहारा विनासा रविवंशके ॥ १८॥

विलोमम्:
केशवं विरसानाविराहालापसमारवैः ।
ततरोदसमग्राविदोश्रीदोमरगोसताम् ॥ १८॥

गोद्युगोमस्वमायोभूदश्रीगखरसेनया ।
सहसाहवधारोविकलोराजदरातिहा ॥ १९॥

विलोमम्:
हातिरादजरालोकविरोधावहसाहस ।
यानसेरखगश्रीद भूयोमास्वमगोद्युगः ॥ १९॥

हतपापचयेहेयो लंकेशोयमसारधीः ।
राजिराविरतेरापोहाहाहंग्रहमारघः ॥ २०॥

विलोमम्:
घोरमाहग्रहंहाहापोरातेरविराजिराः ।
धीरसामयशोकेलं यो हेये च पपात ह ॥ २०॥

ताटकेयलवादेनोहारीहारिगिरासमः ।

हासहायजनासीतानाप्तेनादमनाभुवि  ॥ २१॥

विलोमम्:
विभुनामदनाप्तेनातासीनाजयहासहा ।
ससरागिरिहारीहानोदेवालयकेटता ॥ २१॥

भारमाकुदशाकेनाशराधीकुहकेनहा ।
चारुधीवनपालोक्या वैदेहीमहिताहृता ॥ २२॥

विलोमम्:
ताहृताहिमहीदेव्यैक्यालोपानवधीरुचा ।
हानकेहकुधीराशानाकेशादकुमारभाः ॥ २२॥

हारितोयदभोरामावियोगेनघवायुजः ।
तंरुमामहितोपेतामोदोसारज्ञरामयः ॥ २३॥

विलोमम्:
योमराज्ञरसादोमोतापेतोहिममारुतम् ।
जोयुवाघनगेयोविमाराभोदयतोरिहा ॥ २३॥

भानुभानुतभावामासदामोदपरोहतं ।
तंहतामरसाभक्षोतिराताकृतवासविम् ॥ २४॥

विलोमम्:
विंसवातकृतारातिक्षोभासारमताहतं ।
तं हरोपदमोदासमावाभातनुभानुभाः ॥ २४॥

हंसजारुद्धबलजापरोदारसुभाजिनि ।
राजिरावणरक्षोरविघातायरमारयम् ॥ २५॥

विलोमम्:
यं रमारयताघाविरक्षोरणवराजिरा ।
निजभासुरदारोपजालबद्धरुजासहम् ॥ २५॥

सागरातिगमाभातिनाकेशोसुरमासहः ।
तंसमारुतजंगोप्ताभादासाद्यगतोगजम् ॥ २६॥

विलोमम्:
जंगतोगद्यसादाभाप्तागोजंतरुमासतं ।
हस्समारसुशोकेनातिभामागतिरागसा ॥ २६॥

वीरवानरसेनस्य त्राताभादवता हि सः ।
तोयधावरिगोयादस्ययतोनवसेतुना ॥ २७॥

विलोमम्
नातुसेवनतोयस्यदयागोरिवधायतः ।
सहितावदभातात्रास्यनसेरनवारवी ॥ २७॥

हारिसाहसलंकेनासुभेदीमहितोहिसः ।
चारुभूतनुजोरामोरमाराधयदार्तिहा ॥ २८॥

विलोमम्
हार्तिदायधरामारमोराजोनुतभूरुचा ।
सहितोहिमदीभेसुनाकेलंसहसारिहा ॥ २८॥

नालिकेरसुभाकारागारासौसुरसापिका ।
रावणारिक्षमेरापूराभेजे हि ननामुना ॥ २९॥

विलोमम्:
नामुनानहिजेभेरापूरामेक्षरिणावरा ।
कापिसारसुसौरागाराकाभासुरकेलिना ॥ २९॥

साग्र्यतामरसागारामक्षामाघनभारगौः ॥
निजदेपरजित्यास श्रीरामे सुगराजभा ॥ ३०॥

विलोमम्:
भाजरागसुमेराश्रीसत्याजिरपदेजनि ।स
गौरभानघमाक्षामरागासारमताग्र्यसा ॥ ३०॥

॥ इति श्रीवेङ्कटाध्वरि कृतं श्री  ।।

कृपया अपना थोड़ा सा कीमती वक्त निकाले और उपरोक्त श्लोको को गौर से अवलोकन करें की दुनिया में कहीं भी ऐसा नही पाया गया ग्रंथ है ।

            

शत् शत् प्रणाम ऐसे रचनाकार को  ll

Saturday, 22 July 2017

Dedicate to All Father and Daughter

लड़कियों के स्कूल में आने वाली नई टीचर बेहद खूबसूरत और शैक्षणिक तौर पर भी मजबूत थी लेकिन उसने अभी तक शादी नहीं की थी...

सब लड़कियां उसके इर्द-गिर्द जमा हो गईं और मज़ाक करने लगी कि मैडम आपने अभी तक शादी क्यों नहीं की...?

मैडम ने दास्तान कुछ यूं शुरू की- एक महिला की पांच बेटियां थीं, पति ने उसको धमकी दी कि अगर इस बार भी बेटी हुई तो उस बेटी को बाहर किसी सड़क या चौक पर फेंक आऊंगा, ईश्वर की मर्जी वो ही जाने कि छटी बार भी बेटी ही पैदा हुई और पति ने बेटी को उठाया और रात के अंधेरे में शहर के बीचों-बीच चौक पर रख आया, मां पूरी रात उस नन्हीं सी जान के लिए दुआ करती रही और बेटी को ईश्वर के सुपुर्द कर दिया।

दूसरे दिन सुबह पिता जब चौक से गुजरा तो देखा कि कोई बच्ची को नहीं ले गया है, बाप बेटी को वापस घर लाया लेकिन दूसरी रात फिर बेटी को चौक पर रख आया लेकिन रोज़​ यही होता रहा, हर बार पिता बाहर रख आता और जब कोई लेकर नहीं जाता तो मजबूरन वापस उठा लाता, यहां तक कि उसका पिता थक गया और ईश्वर की मर्जी पर राज़ी हो गया। 

फिर ईश्वर ने कुछ ऐसा किया कि एक साल बाद मां फिर पेट से हो गई और इस बार उनको बेटा हुआ, लेकिन कुछ ही दिन बाद बेटियों में से एक की मौत हो गई, यहां तक कि माँ पांच बार पेट से हुई और पांच बेटे हुए लेकिन हर बार उसकी बेटियों में से एक इस दुनियां से चली जाती ।

सिर्फ एक ही बेटी ज़िंदा बची और वो वही बेटी थी जिससे बाप जान छुड़ाना चाह रहा था, मां भी इस दुनियां से चली गई इधर पांच बेटे और एक बेटी सब बड़े हो गए।

टीचर ने कहा- पता है वो बेटी जो ज़िंदा रही कौन है ? "वो मैं हूं" और मैंने अभी तक शादी इसलिए नहीं की, कि मेरे पिता इतने बूढ़े हो गए हैं कि अपने हाथ से खाना भी नहीं खा सकते और कोई दूसरा नहीं जो उनकी सेवा करें। बस मैं ही उनकी खिदमत किया करती हूं और वो पांच बेटे कभी-कभी आकर पिता का हालचाल पूछ जाते हैं ।

पिता हमेशा शर्मिंदगी के साथ रो-रो कर मुझ से कहा करते हैं, मेरी प्यारी बेटी जो कुछ मैंने बचपन में तेरे साथ किया उसके लिए मुझे माफ करना।

मैंने कहीं बेटी की बाप से मुहब्बत के बारे मैं एक प्यारा सा किस्सा पढ़ा था कि एक पिता बेटे के साथ फुटबॉल खेल रहा था और बेटे का हौंसला बढ़ाने के लिए जान बूझ कर हार रहा था। दूर बैठी बेटी बाप की हार बर्दाश्त ना कर सकी और बाप के साथ लिपट के रोते हुए बोली बाबा आप मेरे साथ खेलें, ताकि मैं आपकी जीत के लिए हार सकूँ ।

सच ही कहा जाता है कि बेटी तो बाप के लिए रहमत होती है...

दिल को छू गया हो तो इसे आगे बढ़ने से मत रोको.....

Thursday, 13 July 2017

New dare message

चुटकुला तो इसको कहते हैं~~~

              एक लड़की अपने  पिता       के साथ ''बरामदे'' में बैठी थी
तभी वहां उसका ''बॉयफ्रेंड'' आ गया !

*लड़की अपने बॉयफ्रेंड से --* _क्या आप ''रामपाल  यादव'' की बुक dad is home लाये हो ?_

*बॉयफ्रेंड --* _नहीं मैं तो ''कीमती आनंद'' की where should i wait for u किताब लेने आया हूँ !_

*लड़की --* _नहीं मेरे पास तो ''प्रेम बाजपेयी'' की under the mango tree है !_

*बॉयफ्रेंड --* _ठीक है तुम आते समय ''आनंद बक्शी'' की call u in five mnt लेती आना !_

*लड़की --* _ok मैं ''जॉन इब्राहिम'' की I wont let u down जरूर लेती आउंगी !_

लड़का लड़की के पिता के ''चरण स्पर्श'' करके चला जाता है !
लड़की का पिताभी दोनों की बातों को ध्यान से सुन रहा था -----

*बोला --* _बेटी ये लड़का इतनी ''ढ़ेर सारी'' किताबे पढ़ कैसे लेता है ?_

*लड़की --* _पिता जी ये हमारी क्लास का सबसे समझदार और intelligent लड़का है !_

*बाप --* _तो बेटी इसको कहना एक बार ''गुलशन चावला'' की old men are not stupid भी पढ़ ले !_ .....

😂🤣😂🤣😂🤣😂😂🤣🤣

Wednesday, 12 July 2017

खुशी की वजह...

खुशी की वजह.....
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मैं एक घर के करीब से गुज़र रहा था की अचानक से मुझे उस घर के अंदर से एक बच्चे की रोने की आवाज़ आई। उस बच्चे की आवाज़ में इतना दर्द था कि अंदर जाकर वह बच्चा क्यों रो रहा है, यह मालूम करने से मैं खुद को रोक ना सका।

अंदर जा कर मैने देखा कि एक माँ अपने दस साल के बेटे को आहिस्ता से मारती और बच्चे के साथ खुद भी रोने लगती। मैने आगे हो कर पूछा बहनजी आप इस छोटे से बच्चे को क्यों मार रही हो ? जबकि आप खुद भी रोती हो।

उसने जवाब दिया भाई साहब इसके पिताजी भगवान को प्यारे हो गए हैं और हम लोग बहुत ही गरीब हैं, उनके जाने के बाद मैं लोगों के घरों में काम करके घर और इसकी पढ़ाई का खर्च बामुश्किल उठाती हूँ और यह कमबख्त स्कूल रोज़ाना देर से जाता है और रोज़ाना घर देर से आता है।

जाते हुए रास्ते मे कहीं खेल कूद में लग जाता है और पढ़ाई की तरफ ज़रा भी ध्यान नहीं देता है जिसकी वजह से रोज़ाना अपनी स्कूल की वर्दी गन्दी कर लेता है। मैने बच्चे और उसकी माँ को जैसे तैसे थोड़ा समझाया और चल दिया।

इस घटना को कुछ दिन ही बीते थे की एक दिन सुबह सुबह कुछ काम से मैं सब्जी मंडी गया। तो अचानक मेरी नज़र उसी दस साल के बच्चे पर पड़ी जो रोज़ाना घर से मार खाता था। मैं क्या देखता हूँ कि वह बच्चा मंडी में घूम रहा है और जो दुकानदार अपनी दुकानों के लिए सब्ज़ी खरीद कर अपनी बोरियों में डालते तो उनसे कोई सब्ज़ी ज़मीन पर गिर जाती थी वह बच्चा उसे फौरन उठा कर अपनी झोली में डाल लेता। 

मैं यह नज़ारा देख कर परेशानी में सोच रहा था कि ये चक्कर क्या है, मैं उस बच्चे का चोरी चोरी पीछा करने लगा। जब उसकी झोली सब्ज़ी से भर गई तो वह सड़क के किनारे बैठ कर उसे ऊंची ऊंची आवाज़ें लगा कर वह सब्जी बेचने लगा। मुंह पर मिट्टी गन्दी वर्दी और आंखों में नमी, ऐसा महसूस हो रहा था कि ऐसा दुकानदार ज़िन्दगी में पहली बार देख रहा हूँ ।

अचानक एक आदमी अपनी दुकान से उठा जिसकी दुकान के सामने उस बच्चे ने अपनी नन्ही सी दुकान लगाई थी, उसने आते ही एक जोरदार लात मार कर उस नन्ही दुकान को एक ही झटके में रोड पर बिखेर दिया और बाज़ुओं से पकड़ कर उस बच्चे को भी उठा कर धक्का दे दिया।

वह बच्चा आंखों में आंसू लिए चुप चाप दोबारा अपनी सब्ज़ी को इकठ्ठा करने लगा और थोड़ी देर बाद अपनी सब्ज़ी एक दूसरे दुकान के सामने डरते डरते लगा ली। भला हो उस शख्स का जिसकी दुकान के सामने इस बार उसने अपनी नन्ही दुकान लगाई उस शख्स ने बच्चे को कुछ नहीं कहा। 

थोड़ी सी सब्ज़ी थी ऊपर से बाकी दुकानों से कम कीमत। जल्द ही बिक्री हो गयी, और वह बच्चा उठा और बाज़ार में एक कपड़े वाली दुकान में दाखिल हुआ और दुकानदार को वह पैसे देकर दुकान में पड़ा अपना स्कूल बैग उठाया और बिना कुछ कहे वापस स्कूल की और चल पड़ा। और मैं भी उसके पीछे पीछे चल रहा था। 

बच्चे ने रास्ते में अपना मुंह धोकर स्कूल चल दिया। मै भी उसके पीछे स्कूल चला गया। जब वह बच्चा स्कूल गया तो एक घंटा लेट हो चुका था। जिस पर उसके टीचर ने डंडे से उसे खूब मारा। मैने जल्दी से जाकर टीचर को मना किया कि मासूम बच्चा है इसे मत मारो। टीचर कहने लगे कि यह रोज़ाना एक डेढ़ घण्टे लेट से ही आता है और मै रोज़ाना इसे सज़ा देता हूँ कि डर से स्कूल वक़्त पर आए और कई बार मै इसके घर पर भी खबर दे चुका हूँ।

खैर बच्चा मार खाने के बाद क्लास में बैठ कर पढ़ने लगा। मैने उसके टीचर का मोबाइल नम्बर लिया और घर की तरफ चल दिया। घर पहुंच कर एहसास हुआ कि जिस काम के लिए सब्ज़ी मंडी गया था वह तो भूल ही गया। मासूम बच्चे ने घर आ कर माँ से एक बार फिर मार खाई। सारी रात मेरा सर चकराता रहा।

सुबह उठकर फौरन बच्चे के टीचर को कॉल की कि मंडी टाइम हर हालत में मंडी पहुंचें। और वो मान गए। सूरज निकला और बच्चे का स्कूल जाने का वक़्त हुआ और बच्चा घर से सीधा मंडी अपनी नन्ही दुकान का इंतेज़ाम करने निकला। मैने उसके घर जाकर उसकी माँ को कहा कि बहनजी आप मेरे साथ चलो मै आपको बताता हूँ, आप का बेटा स्कूल क्यों देर से जाता है।

वह फौरन मेरे साथ मुंह में यह कहते हुए चल पड़ीं कि आज इस लड़के की मेरे हाथों खैर नही। छोडूंगी नहीं उसे आज। मंडी में लड़के का टीचर भी आ चुका था। हम तीनों ने मंडी की तीन जगहों पर पोजीशन संभाल ली, और उस लड़के को छुप कर देखने लगे। आज भी उसे काफी लोगों से डांट फटकार और धक्के खाने पड़े, और आखिरकार वह लड़का अपनी सब्ज़ी बेच कर कपड़े वाली दुकान पर चल दिया।

अचानक मेरी नज़र उसकी माँ पर पड़ी तो क्या देखता हूँ कि वह  बहुत ही दर्द भरी सिसकियां लेकर लगातार रो रही थी, और मैने फौरन उसके टीचर की तरफ देखा तो बहुत शिद्दत से उसके आंसू बह रहे थे। दोनो के रोने में मुझे ऐसा लग रहा था जैसे उन्हों ने किसी मासूम पर बहुत ज़ुल्म किया हो और आज उन को अपनी गलती का एहसास हो रहा हो।

उसकी माँ रोते रोते घर चली गयी और टीचर भी सिसकियां लेते हुए स्कूल चला गया। बच्चे ने दुकानदार को पैसे दिए और आज उसको दुकानदार ने एक लेडी सूट देते हुए कहा कि बेटा आज सूट के सारे पैसे पूरे हो गए हैं। अपना सूट लेलो, बच्चे ने उस सूट को पकड़ कर स्कूल बैग में रखा और स्कूल चला गया। 

आज भी वह एक घंटा देर से था, वह सीधा टीचर के पास गया और बैग डेस्क पर रखकर मार खाने के लिए अपनी पोजीशन संभाल ली और हाथ आगे बढ़ा दिए कि टीचर डंडे से उसे मार ले। टीचर कुर्सी से उठा और फौरन बच्चे को गले लगाकर इस क़दर ज़ोर से रोया कि मैं भी देख कर अपने आंसुओं पर क़ाबू ना रख सका।

मैने अपने आप को संभाला और आगे बढ़कर टीचर को चुप कराया और बच्चे से पूछा कि यह जो बैग में सूट है वह किसके लिए है। बच्चे ने रोते हुए जवाब दिया कि मेरी माँ अमीर लोगों के घरों में मजदूरी करने जाती है और उसके कपड़े फटे हुए होते हैं कोई जिस्म को पूरी तरह से ढांपने वाला सूट नहीं और और मेरी माँ के पास पैसे नही हैं इसलिये अपने माँ के लिए यह सूट खरीदा है।

तो यह सूट अब घर ले जाकर माँ को आज दोगे ? मैने बच्चे से सवाल पूछा। जवाब ने मेरे और उस बच्चे के टीचर के पैरों के नीचे से ज़मीन ही निकाल दी। बच्चे ने जवाब दिया नहीं अंकल छुट्टी के बाद मैं इसे दर्जी को सिलाई के लिए दे दूँगा। रोज़ाना स्कूल से जाने के बाद काम करके थोड़े थोड़े पैसे सिलाई के लिए दर्जी के पास जमा किये हैं।

टीचर और मैं सोच कर रोते जा रहे थे कि आखिर कब तक हमारे समाज में गरीबों और विधवाओं के साथ ऐसा होता रहेगा उनके बच्चे त्योहार की खुशियों में शामिल होने के लिए जलते रहेंगे आखिर कब तक।

क्या ऊपर वाले की खुशियों में इन जैसे गरीब विधवाओंं का कोई हक नहीं ? क्या हम अपनी खुशियों के मौके पर अपनी ख्वाहिशों में से थोड़े पैसे निकालकर अपने समाज मे मौजूद गरीब और बेसहारों की मदद नहीं कर सकते।

आप सब भी ठंडे दिमाग से एक बार जरूर सोचना ! ! ! !
और हाँ अगर हो सके तो इस लेख को उन सभी सक्षम लोगो को बताना है ताकि हमारी इस छोटी सी कोशिश से किसी भी सक्षम के दिल मे गरीबों के प्रति हमदर्दी का जज़्बा ही जाग जाये और यही लेख किसी भी गरीब के घर की खुशियों की वजह बन जाये।

धन्यवाद व आभार 

Tuesday, 11 July 2017

Congress inside India

कोंग्रेस सिर्फ हिन्दू विरोधी ही नहीं भारत विरोधी भी है....
जानिए ये काला सच 

मित्रो इतिहास का एक छोटा सा पन्ना पलटा तो एक रहस्य ये भी दिखा की कोंग्रेस सिर्फ हिन्दू विरोधी ही नहीं भारत विरोधी भी है!

भारत को काँग्रेसियों ने आतंकवादियों का पनाहगाह अड्डा बना डाला!

हमारा सबसे बड़ा मित्र देश इस्राइल होना चाहिये था! लेकिन काँग्रेसियों की सरकार ने देश में आतंकवाद की आग जलती रहने के लिये चुना अराफ़ात को!!!

जब आतंकवादी यासिर अराफात ने फिलिस्तीन राष्ट्र की घोषणा की तो फिलिस्तीन को सबसे पहले मान्यता देने वाला देश कौन था ??

पता है ?
सउदी अरब?
जी नहीं!

पाकिस्तान?
नहीं भाई, नहीं!

अफगानिस्तान?
एकदम नहीं!!

तो क्या भारत??
जी हाँ!!
वो देश भारत ही था!

इंदिरा गाँधी ने मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए सबसे पहले फिलिस्तीन को मान्यता दिया! और यासिर अराफात जैसे आतंकवादी को नेहरु शांति पुरस्कार ५ करोड़ रूपये दिया! और राजीव गाँधी ने उसको इंदिरा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय शांति पुरस्कार दिया!

राजीव गाँधी ने तो उसको पुरे विश्व में घूमने के लिए बोईंग ७४७ गिफ्ट में दिया था!

अब आगे सुनिए!

वही खुराफात सॉरी अराफात ने कश्मीर को पाकिस्तान का अभिन्न भाग बताया! और बोला कि पाकिस्तान जब चाहे तब मेरे लड़ाके कश्मीर की आज़ादी के लिए लड़ेंगे!!

इतना ही नहीं जिस व्यक्ति को दुनियाँ के १०३ देश आतंकवादी घोषित किये हों! और जिसने १० विमानों का अपहरण किया हो! और जिसने दो हज़ार निर्दोष लोगो को मारा हो!

ऐसे आतंकवादी यासिर अराफात को सबसे पहले भारत की कंगली कांग्रेस सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार ने नवाजा!

जी हाँ !!

इंदिरा गाँधी ने इसे नेहरु शांति पुरस्कार दिया! जिसमे पांच करोड़ रूपये नगद और दो सौ ग्राम सोने से बना एक शील्ड होता है!

अब आप सोचिये १९८३में मतलब आज से करीब ३४ साल पहले पांच करोड़ रूपये की क्या वैल्यू रही होगी ?

फिर राजीव गाँधी ने इसे इंदिरा गाँधी अंतरराष्ट्रीय शांति पुरस्कार से नवाजा!

फिर बाद मे यही यासिर अराफात कश्मीर के मामले पर खुलकर पाकिस्तान के साथ हो गया! और इसने घूम-घूम कर पूरे इस्लामिक देशों में कहा कि फिलिस्तीन और कश्मीर दोनों जगहों के मुसलमान गैर-मुसलमानों के हाथों मारे जा रहे हैं!

इसलिए पूरे मुस्लिम जगत को इन दोनों मामलो पर एकजुट होना चाहिए!

वाह रे काँग्रेस की सत्ता के लिए वोट बैंक की गंदी और घटिया राजनीति!
सबसे बड़ी आश्चर्य की बात! भारत की बहुसंख्यक हिन्दू जनता आंख मूंद कर गांधी के बन्दर बने थे।
वंदे मातरम्

Sunday, 9 July 2017

Father's Day

*वैचारिक आँकलन -*
एक पुत्र अपने पिता के विषय में उम्र के अलग-अलग पड़ाव पर क्या विचार रखता है....

*4 वर्ष    :*  मेरे पापा महान है ।

*6 वर्ष    :*  मेरे पापा सबकुछ जानते है, वे सबसे होशियार है।।     

*10 वर्ष  :*  मेरे पापा अच्छे है, परन्तु गुस्से वाले है।

*12 वर्ष  :*  मैं जब छोटा था, तब मेरे पापा मेरे साथ अच्छा व्यवहार करते थे ।

*16 वर्ष  :*  मेरे पापा वर्तमान समय के साथ नही चलते, सच पूछो तो उनको कुछ भी ज्ञान ही  नही है !

*18 वर्ष  :*  मेरे पापा दिनों दिन चिड़चिड़े और अव्यवहारिक होते जा रहे है।

*20 वर्ष  :*  ओहो... अब तो पापा के साथ रहना ही असहनीय हो गया है....मालुम नही मम्मी इनके साथ कैसे रह पाती है।

*25 वर्ष  :*  मेरे पापा हर बात में मेरा विरोध करते है, कौन जाने, कब वो दुनिया को समझ सकेंगे।

*30 वर्ष  :*  मेरे छोटे बेटे को सम्भालना मुश्किल होता जा रहा है... बचपन में मै अपने पापा से कितना डरता था ?

*40 वर्ष  :*  मेरे पापा ने मुझे कितने अनुशासन से पाला था, आजकल के लड़को में कोई अनुशासन और शिष्टाचार ही नही है।

*50 वर्ष  :*  मुझे आश्चर्य होता है, मेरे पापा ने कितनी मुश्किलें झेल कर हम चार भाई-बहनो को बड़ा किया, आजकल तो एक सन्तान को बड़ा करने में ही दम निकल जाता है।

*55 वर्ष  :*  मेरे पापा कितनी दूरदृष्टि वाले थे, उन्होंने हम सभी भाई-बहनो के लिये कितना व्यवस्थित आयोजन किया था, आज वृद्धावस्था में भी वे संयमपुर्वक जीवन जी सकते है।

*60 वर्ष  :*  मेरे पापा महान थे, वे जिन्दा रहे तब तक हम सभी का पूरा ख्याल रखा।
 सच तो यह है की..... पापा ( पिता ) को अच्छी तरह समझने में पुरे 60 साल लग गये ।

कृपया आप अपने पापा को समझने में इतने वर्ष मत लगाना, समय से पहले समझ जाना।क्योंकि हमारे पिता हमारे बारे में कभी भी गलत विचार नही रखते सिर्फ हमारे विचार उनके प्रति गलत होते है जो हमे समय निकल जाने के बाद अहसास होता है।
अपने पिता का सम्मान करे और उनके विचार का सम्मान करे
🌹🌹🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🌹🌹

Satsang marg

एक सेठ और सेठानी रोज सत्संग में जाते थे। सेठजी के एक घर एक पिंजरे में तोता पाला हुआ था। तोता एक दिन पूछता हैं कि सेठजी आप रोज कहाँ जाते है। सेठजी बोले कि 

सत्संग में ज्ञान सुनने जाते है। तोता कहता है, सेठजी संत महात्मा से एक बात पूछना कि में आजाद कब होऊंगा। सेठजी सत्संग खत्म होने के बाद संत से पूछते है कि महाराज हमारे घर जो तोता है उसने पूछा हैं की वो आजाद कब होगा? संत जी ऐसा सुनते हीं बेहोश होकर गिर जाते है। सेठजी संत की हालत देख कर चुप-चाप वहाँ से निकल जाते है। घर आते ही तोता सेठजी से पूछता है कि सेठजी संत ने क्या कहा। सेठजी कहते है कि तेरे किस्मत ही खराब है जो तेरी आजादी का पूछते ही वो बेहोश हो गए। तोता कहता है कोई बात नही सेठजी में सब समझ गया।

दूसरे दिन सेठजी सत्संग में जाने लगते है तब तोता पिंजरे में जानबूझ कर बेहोश होकर गिर जाता हैं। सेठजी उसे मरा हुआ मानकर जैसे हीं उसे पिंजरे से बाहर निकालते है, तो वो उड़ जाता है। 

सत्संग जाते ही संत सेठजी को पूछते है कि कल आप उस तोते के बारे में पूछ रहे थे ना अब वो कहाँ हैं। सेठजी कहते हैं, हाँ महाराज आज सुबह-सुबह वो जानबुझ कर बेहोश हो गया , मैंने देखा की वो मर गया है इसलिये मैंने उसे जैसे ही बाहर निकाला तो वो उड़ गया। 

तब संत ने सेठजी से कहा की देखो तुम इतने समय से सत्संग सुनकर भी आज तक सांसारिक मोह-माया के पिंजरे में फंसे हुए हो और उस तोते को देखो बिना सत्संग में आये मेरा एक इशारा समझ कर आजाद हो गया। दोस्तों इस कहानी से तात्पर्य ये है कि हम सत्संग में तो जाते हैं ज्ञान की बाते करते हैं या सुनते भी हैं, पर हमारा मन हमेशा सांसारिक बातों में हीं उलझा रहता हैं। सत्संग में भी हम सिर्फ उन बातों को पसंद करते है जिसमे हमारा स्वार्थ सिद्ध होता हैं। जबकि सत्संग जाकर हमें सत्य को स्वीकार कर सभी बातों को महत्व देना चाहिये और जिस असत्य, झूठ और अहंकार को हम धारण किये हुए हैं उसे साहस के साथ मन से उतार कर सत्य को स्वीकार करना चाहिए।

Wednesday, 5 July 2017

A true story for inspiration

रौनक चेहरे 

उन आठों की एक ही कहानी थी, दया के पात्र तो वे सब ही के थे लेकिन अवसर उन्हें कोई नहीं देता। पढ़े-लिखे, युवा लेकिन बात ठहरती वहाँ जा कर कि ये कुछ कर भी पाएँगे? वे विकलाँग हैं, बहुत कोफ्त आती, संयोग से आठों का मिलना एक ही जगह हुआ। साथ मिल जाए तो हिम्मत हो ही जाती है, विचार बिल्कुल अनूठा था- एक गौशाला खोलने का। जगह पसन्द की रानिमाई सियादेही के 12 पठारों के बीच मड़वापथरा जँगलों की। जी हाँ, मैं बात कर रहा हूँ छत्तीसगढ़ की। वैसे भी रिहायशी इलाके की जमीन उन्हें देता भी कौन? दूसरा सोचा, जँगलों के बीच होगी तो खुद ही चारे की व्यवस्था कर लेंगे क्योंकि वे जानते थे लोग उन की काबिलियत पर कितना भरोसा करेंगे कि वे चारा खरीद सकें! जब कोई रास्ता नहीं दिखता तब व्यक्ति धरती में भी सुराख कर लेता है, उन्होंने जो कुछ था उससे गौशाला की शुरुआत कर ली। 

धीरे-धीरे गाँव और आस-पास उनके हौसलों की बात होने लगी, और एक व्यक्ति ने अपनी तरफ से एक एकड़ जमीन मुहैया करवा दी, तो साधारण किसानों ने अपनी गायें भी उनके पास छोड़ दी। वे विकलाँग थे, तो दूसरे विकलाँग भी उत्साहित हो गौशाला से जुड़ने लगे। इस गौशाला को सिर्फ विकलाँग सम्भालते हैं जो आज 40 हो चुके। तीस वर्षीय भोज कहती हैं कि मैंने सिलाई भी सीखी पर न तो काम मिला और न ही जीवन साथी, आज यहाँ मैं अपनी मेहनत से कमाई रोटी खाती हूँ और सुकून की जिन्दगी जी रही हूँ। पति की मौत के बाद अंजनी को तो उसकी सास ने घर से ही निकाल दिया था। उसने यहाँ के बारे में सुना, देखने आयी और यहीं की होकर रह गयी। 

कितना अच्छा हो इस गौशाला से सबक ले ऐसे समाज की सोचने तो लगें जहाँ हर इन्सान के पास बराबर के मौके हों। कितने रौनक होंगे सारे चेहरे!

Monday, 3 July 2017

रामायण ज्ञान

लक्ष्मण जी के त्याग की अदभुत कथा । एक अनजाने सत्य से परिचय--- 

अगस्त्य मुनि अयोध्या आए और लंका युद्ध का प्रसंग छिड़ गया -

अगस्त्य मुनि बोले- 

श्रीराम बेशक रावण और कुंभकर्ण प्रचंड वीर थे, लेकिन सबसे बड़ा वीर तो मेघनाध ही था ॥ उसने अंतरिक्ष में स्थित होकर इंद्र से युद्ध किया था और बांधकर लंका ले आया था॥

 ब्रह्मा ने इंद्रजीत से दान के रूप में इंद्र को मांगा तब इंद्र मुक्त हुए थे ॥

 लक्ष्मण ने उसका वध किया इसलिए वे सबसे बड़े योद्धा हुए ॥

श्रीराम को आश्चर्य हुआ लेकिन भाई की वीरता की प्रशंसा से वह खुश थे॥ 
फिर भी उनके मन में जिज्ञासा पैदा हुई कि आखिर अगस्त्य मुनि ऐसा क्यों कह रहे हैं कि इंद्रजीत का वध रावण से ज्यादा मुश्किल था ॥

अगस्त्य मुनि ने कहा- प्रभु इंद्रजीत को वरदान था कि उसका वध वही कर सकता था जो 
💥 चौदह वर्षों तक न सोया हो,
💥 जिसने चौदह साल तक किसी स्त्री का मुख न देखा हो और 
💥 चौदह साल तक भोजन न किया हो ॥

अगस्त्य मुनि ने कहा -  क्यों न लक्ष्मणजी से पूछा जाए ॥

लक्ष्मणजी आए प्रभु ने कहा कि आपसे जो पूछा जाए उसे सच-
सच कहिएगा॥

प्रभु ने पूछा- हम तीनों चौदह वर्षों तक साथ रहे फिर तुमने सीता का मुख कैसे नहीं देखा ?
 फल दिए गए फिर भी अनाहारी कैसे रहे ? 
और 14 साल तक सोए नहीं ?
 यह कैसे हुआ ?

लक्ष्मणजी ने बताया- भैया जब हम भाभी को तलाशते ऋष्यमूक पर्वत गए तो सुग्रीव ने हमें उनके आभूषण दिखाकर पहचानने को कहा ॥

आपको स्मरण होगा मैं तो सिवाए उनके पैरों के नुपूर के कोई आभूषण नहीं पहचान पाया था क्योंकि मैंने कभी भी उनके चरणों के ऊपर देखा ही नहीं.

चौदह वर्ष नहीं सोने के बारे में सुनिए -  आप औऱ माता एक कुटिया में सोते थे. मैं रातभर बाहर धनुष पर बाण चढ़ाए पहरेदारी में खड़ा रहता था. निद्रा ने मेरी आंखों पर कब्जा करने की कोशिश की तो मैंने निद्रा को अपने बाणों से बेध दिया था॥

निद्रा ने हारकर स्वीकार किया कि वह चौदह साल तक मुझे स्पर्श नहीं करेगी लेकिन जब श्रीराम का अयोध्या में राज्याभिषेक हो रहा होगा और मैं उनके पीछे सेवक की तरह छत्र लिए खड़ा रहूंगा तब वह मुझे घेरेगी ॥ आपको याद होगा
राज्याभिषेक के समय मेरे हाथ से छत्र गिर गया था.

अब मैं 14 साल तक अनाहारी कैसे रहा! मैं जो फल-फूल लाता था आप उसके तीन भाग करते थे. एक भाग देकर आप मुझसे कहते थे लक्ष्मण फल रख लो॥ आपने कभी फल खाने को नहीं कहा- फिर बिना आपकी आज्ञा के मैं उसे खाता कैसे?

मैंने उन्हें संभाल कर रख दिया॥

 सभी फल उसी कुटिया में अभी भी रखे होंगे ॥ प्रभु के आदेश पर लक्ष्मणजी चित्रकूट की कुटिया में से वे सारे फलों की टोकरी लेकर आए और दरबार में रख दिया॥ फलों की
गिनती हुई, सात दिन के हिस्से के फल नहीं थे॥

 प्रभु ने कहा-
इसका अर्थ है कि तुमने सात दिन तो आहार लिया था?

लक्ष्मणजी ने सात फल कम होने के बारे बताया- उन सात दिनों में फल आए ही नहीं, 
 1. जिस दिन हमें पिताश्री के स्वर्गवासी होने की सूचना मिली, हम निराहारी रहे॥  

2. जिस दिन रावण ने माता का हरण किया उस दिन फल लाने कौन जाता॥ 

3. जिस दिन समुद्र की साधना कर आप उससे राह मांग रहे थे, 

4. जिस दिन आप इंद्रजीत के नागपाश में बंधकर दिनभर अचेत रहे, 

5. जिस दिन इंद्रजीत ने मायावी सीता को काटा था और हम शोक में
रहे, 

6. जिस दिन रावण ने मुझे शक्ति मारी 

7. और जिस दिन आपने रावण-वध किया ॥

इन दिनों में हमें भोजन की सुध कहां थी॥  विश्वामित्र मुनि से मैंने एक अतिरिक्त विद्या का ज्ञान लिया था- बिना आहार किए जीने की विद्या. उसके प्रयोग से मैं चौदह साल तक अपनी भूख को नियंत्रित कर सका जिससे इंद्रजीत मारा गया ॥

भगवान श्रीराम ने लक्ष्मणजी की तपस्या के बारे में सुनकर उन्हें ह्रदय से लगा लिया ।

Rules of Nature 3

प्रकृति  का तिसरा नियम 
आपको  जीवन से जो कुछ भी मिलें  उसे पचाना सीखो क्योंकि 
भोजन  न पचने  पर रोग बढते है।
पैसा न पचने  पर दिखावा बढता है 
बात  न पचने पर चुगली  बढती है ।
प्रशंसा  न पचने पर  अंहकार  बढता है।
निंदा  न पचने पर  दुश्मनी  बढती है ।
राज न पचने पर  खतरा  बढता है ।
दुःख  न पचने पर  निराशा बढती है ।
और सुख न पचने पर  पाप बढता है ।
बात  कडुवी बहुत  है  पर सत्य  है

Rules of Nature 2

प्रकृति  का दूसरा  नियम 
जिसके  पास  जो होता है  वह वही बांटता  है।
सुखी "सुख  "बांटता है 
दुःखी  "दुःख " बांटता  है 
ज्ञानी "ज्ञान" बांटता है
भ्रमित  "भ्रम "बांटता है 
भयभीत"  भय "बांटता हैं